राजधानी में बढ़ती जा रही है असलहा पाने की चाहत

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
शस्त्र लाइसेंस के लिए लोगों की लंबी है कतार

  • जिले में शस्त्र लाइसेंस के 50 हजार आवेदन पत्र लंबित
  • असलहा कार्यालय में जुट रही आवेदकों की भीड़
  • हाई कोर्ट की तरफ से रोक हटाये जाने के बाद बढ़ी आवेदकों की संख्या

 

लखनऊ। नवाबों की नगरी में हथियारों के शौकीन खूब हैं। इसका पता शस्त्र लाइसेंस पर हाईकोर्ट के रोक हटने के बाद आए लाइसेंस के आवेदनों से चलता है। हाईकोर्ट की तरफ से शत्र लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक हटते ही कलेक्ट्रेट में सिफारिशी पत्र और दलालों की जुटना शुरू हो गई है। राजधानी में शस्त्र लाइसेंस के लंबित आवेदनों की संख्या 50 हजार से कहीं ज्यादा है। इसके बावजूद लाइसेंस के लिए रोजाना औसतन 50 आवेदन किए जा रहे हैं। इससे लोगों की हथियारों के प्रति लगाव का भी पता चलता है।
राजधानी में हर व्यक्ति खुद को असुरक्षित बताकर शस्त्र लाइसेंस लेने की फिराक में है। कमर में पिस्टल लटकाकर और बड़ी-बड़ी गाडिय़ों में असलहाधारियों की सुरक्षा में चलना लोगों को खूब भा रहा है। शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों में वकील से लगाए प्रापर्टी डीलर, व्यवसायी, नेता, सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस कर्मी बेल्ट में खुलेआम रिवॉल्वर लगाकर घूमते नजर आते हैं। इन पर कोई कानूनी चाबुक भी नहीं चलता है। इन्हीं सब वजहों से लोगों में शस्त्र रखने का क्रेज बढ़ रहा है। हाईकोर्ट की तरफ से शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटने के बाद से ही असलहा कार्यालयों खूब भीड़ जुटने लगी है। राजधानी में अपनी जान का खतरा बताकर लाइसेंस लेने वाले आवेदकों की संख्या 75 फीसद से अधिक है। असलहा कार्यालय में शस्त्र लाइसेंस लेने वालों के आवेदनों में इसी तरह की वजहे बताई गई हैं। हाईकोर्ट ने विधानपरिषद, लोकसभा, पंचायत चुनाव और उप चुनावों की वजह से असलहा लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस की संख्या पुलिस विभाग के पास मौजूद शस्त्रों की संख्या से अधिक होने के मामले को गंभीरता से लिया था। इसलिए करीब डेढ़ साल तक शस्त्र लाइसेंस के सामान्य आवेदन पत्रों पर कोई विचार ही नहीं किया गया। इसलिए लंबित आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
सक्रिय हुए दलाल
जिले में असलहा लेने के प्रति लोगों में क्रेज देखकर दलाल भी सक्रिय हो गये हैं। ये हमेशा की तरह एक बार फिर लाइसेंस दिलाने के नाम पर लोगों के कागजात तैयार करवाने और हर हाल में शस्त्र लाइसेंस दिलाने का झांसा देते हैं। इसके बदले में एक व्यक्ति से शस्त्र लाइसेंस दिलाने के नाम पर 20-30 हजार रुपये तक वसूलते हैं। इसके अलावा शस्त्र लाइसेंस लेने के शौकीन जिलाधिकारी से लेकर सत्ताधारी पार्टी के मंत्री और नेता तक से शस्त्र लाइसेंस जारी करवाने की सिफारिशें करने में भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। जबकि जिलाधिकारी की तरफ से शस्त्र लाइसेंस दिलाने के नाम पर लोगों को झांसा देने वालों पर नजर रखने, शिकायत मिलने और पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई का भी निर्देश दिया है। इसके बावजूद दलालों की सक्रियता जारी है।

“जिले में शस्त्र लाइसेंस धारकों की संख्या 56 हजार है। इस समय शस्त्र लाइसेंस के लिए भरे गये लगभग 50 हजार आवेदन पत्र लंबित हैं। जिन पर शस्त्र लाइसेंस जारी करने और अस्वीकार करने संबंधी निर्णय जाना लंबित है। इसके अलावा रोजाना शस्त्र लाइसेंस लेने वालों के आवेदन पत्र आ रहे हैं। इनकी जांच भी करवाई जा रही है। फिलहाल शस्त्र लाइसेंस संबंधी फाइलों पर जिला मजिस्ट्रेट ही निर्णय करेंगे। तदनुसार लाइसेंस जारी किया जायेगा।”

-विनोद कुमार, असलहा प्रभारी व नगर मजिस्ट्रेट

असलहा लाइसेंस की स्थिति
जिले में कुल 56 हजार शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। इन लाइसेंस धारकों से संबंधित सारा डाटा नेशनल आर्म्स की वेबसाइट पर ऑनलाइन फीड कर दिया गया है। जिला प्रशासन लखनऊ में सभी असलहा लाइसेंस धारकों का सत्यापन शुरू कर दिया है। इसमें करीब 80 फीसद शस्त्र लाइसेंस धारकों ने आवश्यक कागजात देकर सत्यापन करवा भी लिया है। सत्यापन की प्रक्रिया लगातार चल रही है। वहीं गृह मंत्रालय के आदेशानुसार शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण करवाने वालों का शस्त्र चलाने में निपुणता संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें प्रशासन की तरफ से नादरगंग शूटिग रेंज में हर महीने चार दिन शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसकी आवेदकों से निर्धारित फीस भी ली जायेगी। इस आदेश का पालन करवाने संबंधी आदेश भी सभी थाना प्रभारियों को भेजा जा चुका है। उनको स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी आवेदन पत्र का सत्यापन करने से पूर्व आवेदक के असलहा चलाने में निपुणता संबंधी प्रमाण पत्र अवश्य देखें। इसके बाद ही फाइल को आगे बढ़ायें।

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