राजधानी में बढऩे लगी डेंगू के मरीजों की संख्या

शुरुआत में ही बीमारी पर पकड़ बनाना आवश्यक, बढऩे पर संभालना होता है मुश्किल
Captureअस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था लेकिन बीमारी बढऩे से मच सकती है अफरातफरी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अभी तक शहर के वार्डों में नगर निगम की ओर से फॉगिंग को लेकर लापरवाही बरती जा रही है जिससे डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी और बढ़ सकती है। सरकारी अस्पतालों में डेंगू से ग्रसित मरीज भर्ती होने लगे हैं। साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में वायरल बुखार, मलेरिया सहित डेंगू के लक्षणों के तमाम मरीज पहुंच रहे हैं।
प्रत्येक वर्ष राजधानी में सितंबर माह आते-आते डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है फिर भी नगर निगम की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। लापरवाही का आलम यह है कि वार्डों में अभी तक फॉगिंग का काम नहीं शुरू हुआ है। खासकर पुराने लखनऊ के इलाकों चौक, सआदतगंज, नक्खास, हैदरगंज, बुलाकी अड्डा, फैजुल्लागंज सहीत तमाम जगहां पर फागिंग नहीं की जा रही है। यहां से प्रतिवर्ष बहुत बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज सरकारी अस्पतालों में आते हैैं। डेंगू के मरीजों की संख्या बढऩे से हालात इतने बेकाबू हो जाते हैं कि बीमारी को संभालने में शासन के हाथ-पांव फूल जाते हैं। इसका कारण यह है कि शुरूआत में इस बीमारी को लेकर सतर्कता नहीं बरती जाती है।
राजधानी के सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से बेड रिजर्व किये गये हैं। सिविल और बलरामपपुर में जहां डेंगू के मरीजों के लिए आठ-आठ बेडों की व्यवस्था की गई है वहीं लोहिया में दस बेड डेंगू के लिए आरक्षित हैं। सीएमओ एसएनएस यादव ने नगर निगम को पत्र लिखकर फॉगिंग करने के निर्देश दिये हैं। बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में आये दो मरीजों में डेंगू की पुष्टिï हई है जिसके बाद दोनों मरीजों को भर्ती कर लिया गया है।
क्या होता है डेंगू
डेंगू वायरस जनित बीमारी है, जो मादा एडीज मच्छर के काटने से होती है। डेंगू का मच्छर गंदे पानी की बजाय साफ पानी में पनपता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं और यह दिन के समय, खासकर सुबह-सवेरे काटते हैं।
हर वर्ष डेंगू अगस्त से लेकर नवंबर महीने तक ज्यादा फैलता है, क्योंकि इस मौसम में मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल नमी और तापमान मिल जाता है। डेंगू का लक्षण मच्छर के काटने के करीब 3 से 5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।
न खायें दर्द निवारक दवाइयां
3 दिन से अधिक बुखार आने पर एस्प्रिन, डिस्प्रिन, ब्रूफेन व वॉब्रोन जैसी दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिये, बल्कि तुरंत एक अच्छे डॉक्टर को दिखाना चाहिये। दरअसल डेंगू होने पर मरीज को तेज बुखार के साथ-साथ हाथ-पैरों और शरीर में दर्द होता है। साथ ही उसकी प्लेटलेट्स में कमी आने लगती है। ऐसे में जब व्यक्ति अपनी मर्जी से इन दवाओं को दर्द निवारक के तौर पर लेता है तो उसकी प्लेटलेट्स में अधिक तेजी से कमी आने पर स्थिति सुधरने की बजाय और गंभीर हो जाती है।

लक्षण

तेज बुखार और जोड़ों में दर्द।
सिर और बदन में तेज दर्द।
शरीर पर निशान होना।
 उल्टी होना और दस्त लगना।
पेट का फू लना और दर्द होना।
सांस लेने में तकलीफ ।
लिवर में सूजन होना।
कभी-कभी दौरे पडऩा और बेहोश होना।

बचाव
डेंगू का अभी तक न तो कोई टीका विकसित हुआ है और न ही कोई विशेष दवा तैयार हुई है इसलिए मच्छरों से बचाव ही इस रोग की रोकथाम का एक प्रमुख उपाय है। मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
अपने घर, स्कूल और ऑफि स के आसपास पानी एकत्र न होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें। अगर ठहरा हुआ पानी निकालना संभव न हो, तो उसमें मिट्टी का तेल डालें।
अच्छा महसूस न होने पर बाहर न निकलें
तरल पदार्थ, दाल का पानी और जूस पिए
 पैरासिटामॉल खा सकते हैं
 बुखार के 7 दिन बाद ब्लड टेस्ट कराएं

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