राजधानी में धड़ल्ले से हो रहा घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल

सिलेंडरों के अवैध इस्तेमाल पर रोक लगाने में नाकाम आपूर्ति विभाग

 Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिले में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों, रेस्टोरेंट्स और चाय-नाश्ते की दुकानों पर सरकारी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लखनऊ में बिना पंजीकरण के खाद्य पदार्थों को बेचने और बनाने का कारोबार अबाध गति से चल रहा है। सहालग में अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के लिए राजधानी के दुकानदार खुलेआम घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इन पर रोक लगाने वाले जिम्मेदार विभागों के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, जो घरेलू सिलेंडर का अवैध कारोबार करने वालों का हौसला बढ़ाने वाला कृत्य साबित हो रहा है।
राजधानी में घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल आम बात हो चली है। शहर के प्रमुख बाजारों, होटलों, रेस्टोरेंट्स और सडक़ों के किनारे ठेला लगाकर खाद्य कारोबार करने वाले धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल करते हैं। इस नजारे को जिम्मेदार महकमों के अधिकारी रोजाना देखते हैं। इंडियन ऑयल और आपूर्ति विभाग के अधिकारी अक्सर घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ अभियान चलाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात करते हैं लेकिन हकीकत में कार्रवाई नहीं होती। इन विभागों के अधिकारी त्यौहारों के समय में उच्चाधिकारियों की फटकार पर सक्रियता दिखाते हैं। तब घरेलू सिलेंडर का अवैध इस्तेमाल, सिलेंडर की घटतौली और अवैध रीफिलिंग करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। इसके बाद अभियान चलाने का मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जबकि इंडियन ऑयल और आपूर्ति विभाग के अधिकारी नियमित अभियान चलाते तो घरेलू सिलेंडर का अवैध कारोबार करने पर अवश्य रोक लगती और कारोबार में लिप्त लोगों को सजा मिलती।

दुकानदारों के लिए किफायती है घरेलू सिलेंडर
पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर का अलग-अलग मूल्य निर्धारित किया है। इसमें 14.2 किग्रा वजन वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 615 रुपये और 19 किग्रा वजन वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत करीब 1313 रुपये है। यदि दुकानदार ब्लैक में दो घरेलू सिलेंडर यानी 28.4 किग्रा वजन की एलपीजी लेता है, तो उसको 1230 रुपये देने पड़ते हैं। जबकि एक कामर्शियल सिलेंडर यानी 19 किग्रा एलपीजी की कीमत करीब 1313 रुपये होती है। इसलिए अपने लाभ को ध्यान में रखकर दुकानदार घरेलू सिलेंडर को ब्लैक में खरीदना पसंद करते हैं। इसमें गैस एजेंसियों के डिलीवरीमैन को माध्यम बनाकर आसानी से सिलेंडर हासिल कर लेते हैं।

जिले में मात्र 1500 कामर्शियल कनेक्शन
राजधानी में होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और फास्ट फूड का व्यवसाय करने वाली दुकानों की संख्या 5000 से अधिक है। नियमानुसार सभी दुकानों पर व्यावसायिक सिलेंडर का इस्तेमाल होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ में अनुमानित1500 कामर्शियल सिलेंडर के कनेक्शन हैं। इसके अलावा अन्य सभी दुकानों पर धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल हो रहा है। आपूर्ति विभाग और पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारी घरेलू सिलेंडर का दुकानों में अवैध रूप से इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते हैं।

बिना पंजीकरण हो रहा खाद्य कारोबार
खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन की टीम के निरीक्षण में बिना पंजीकरण और लाइसेंस के खाद्य कारोबार करने वालों का खुलासा हुआ है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह के मुताबिक मकबरा रोड स्थित माक्र्समैन रेस्टोरेंट, रॉयल स्काई रेस्टोरेंट, रॉयल कैफे रेस्टोरेंट, मोतीमहल, चौधरी स्वीट्स, गोल्डमैन कैफे, रोवर्स और जॉन हींग रेस्टोरेंट के किचन में गंदगी पाई गई। इसके अलावा प्रतिष्ठान में भी बहुत गंदगी थी। इसके अलावा टीम के सदस्यों ने शहर के अलग-अलग इलाकों पर फुटपाथ और अन्य जगहों पर चाय, सब्जी और पूड़ी कचौड़ी का ठेला लगाने वाले तीन दर्जन से ज्यादा लोग बिना पंजीकरण के कारोबार करते पाये। इन सभी का चालान किया गया। इसके साथ ही रेस्टोरेंट में सफाई व्यवस्था नहीं रखने वाले लोगों को भी नोटिस दिया गया है।

व्यापक स्तर पर हो रहा घरेलू सिलेंडर का अवैध कारोबार
लखनऊ में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या आठ लाख 65 हजार है। इसमें इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की कुल 54 गैस एजेंसियां हैं। जिले में घरेलू सिलेंडर की काफी किल्लत है। उपभोक्ताओं को एजेंसी पर सिलेंडर की बुकिंग करवाने के सप्ताह भर बाद ही डिलीवरी मिल रही है। इसकी बड़ी वजह गैस एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत से राजधानी में धड़ल्ले से चल रहा घरेलू सिलेंडर का अवैध कारोबार है। इस काम में लगे लोगों की पहुंच ऊपर तक बताई जाती है। इसी वजह से न तो इंडियन ऑयल के अधिकारी एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं और न ही आपूर्ति विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई करते हैं। नतीजतन खुलेआम घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो शहर में सैकड़ों दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट में धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल हो रहा है। इन व्यवसायियों को घरेलू सिलेंडर उपलब्ध कराने का काम अधिकांशत: गैस एजेंसियों के डिलीवरीमैन करते हैं। ये लोग दुकानदारों से 14.2 किग्रा वजन वाले सिलेंडर की कीमत 850 रुपये वसूलते हैं। इसकी जानकारी गैस एजेंसियों के मालिकान और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को भी है लेकिन सबने चुप्पी साध ली है। इसलिए कोई कार्रवाई नहीं होती।

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