राजधानी में दहेजलोभियों का शिकार हो रही हैं विवाहिताएं

मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा से तंग आकर वर्ष के पहले पखवाड़े में कइयों ने की आत्महत्या
पिछले वर्ष 36 महिलाओं ने चुनी मौत, पुलिस मुकदमा दर्ज कर चुप बैठी

captureआमिर अब्बास
लखनऊ। सरकार की तमाम कवायदों और सख्त कानून के बावजूद भी विवाहिताएं दहेज की बेदी पर चढ़ाई जा रही है। वे लगातार दहेज लोभियों का शिकार हो रही है। नए साल के पहले पखवाड़े में ही दहेज को लेकर कम से कम तीन विवाहिताओं ने मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा से तंग आकर अपनी जान दे दी। किसी ने आग्नि स्नान कर लिया तो किसी ने जहर पी लिया। पुलिस इन मामलों में बस मुकदमा दर्ज कर खानापूर्ति कर रही है। बीते वर्ष भी राजधानी में कम से कम 36 विवाहिताएं दहेज की बेदी पर चढ़ा दी गई थी। सरकार भी कानून बनाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर चुकी है।
राजधानी में दहेज हत्या के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। नए साल में भी दहेज को लेकर समाज की सोच बदलती नहीं दिखी। यही वजह है कि जनवरी के पहले पखवाड़े में ही तीन महिलाएं दहेज लोभियों की शिकार हो गईं। हालांकि ये घटनाएं साल के पहले चार दिनों के भीतर घटी हैं। इस कुप्रथा ने शहर से लेकर गांव तक को अपनी चपेट में ले रखा है। हालांकि इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया है। बीते वर्ष यहां करीब तीन दजनों विवाहिताओं को दहेजलोभियों ने मौत को गले लगाने के लिए मजबूर कर दिया। वहीं, इस वर्ष की शुरुआत में तीन विवाहिताएं दहेज की बेदी पर चढ़ा दी गई हैं। मसलन, ठाकुरगंज थाना क्षेत्र स्थित बालागंज में गौशाला रोड निवासी मुकेश तिवारी की शादी चार वर्ष पहले हरदोई की साधना तिवारी से हुई थी। दोनों से डेढ़ वर्ष का बेटा है। एक जनवरी को साधना ने प्रताडऩा से तंग आकर खुद को कमरे में बंद करके आग लगा ली थी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मायके वालों की तहरीर पर मुकेश व उसके घरवालों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने पति मुकेश व सास-ससुर को जेल भेज दिया है। इसी दिन कैसरबाग थाना क्षेत्र में दहेजहत्या का मामला संज्ञान में आया। कैसरबाग के खयालीगंज निवासी मोनू अब्बासी की पत्नी नौरीन ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने नौरीन की मां की तहरीर पर मोनू व उसकी मां काफिया खातून के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसी कड़ी में चार जनवरी को एक और विवाहिता ने जान दे दी। निगोहां थाना क्षेत्र स्थित राती गांव निवासी किसान चंद्रभूषण ने बेटी कमलेश कुमारी का विवाह एक अप्रैल 2015 में उतरावां गांव के अशोक के बेटे सुजीत के साथ किया था। एक सप्ताह पूर्व कमलेश ससुराल आयी थी। सुजीत के मुताबिक पत्नी घर पर अकेली थी। दोपहर जब वह लौटा तो घर का बाहर का दरवाजा अंदर से बन्द था। जब वह अंदर गए तो पत्नी रस्सी के सहारे लटकी थी। इस मामले में कमलेश के परिजनों ने दहेज हत्या का आरोप लगाया था। वहीं, बीते वर्ष तीन दर्जन महिलाओं को दहेज लोभियों का शिकार होना पड़ा है। जिसमें कई दहेज लोभियों को सजा मिली लेकिन कई आज भी समाज में खुलेआम घूम रहे हैं। ये घटनाएं बानगी भर है। आज भी कई विवाहिताएं रोज प्रताडऩा का शिकार हो रही है। तमाम शिकायतों के बावजूद पुलिस ऐसे मामलों में समझौता कराकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है। लेकिन दबाव में कराया गया यह समझौता ज्यादा देर तक नहीं चलता और अंत में इसका परिणाम दुखद ही होता है।

सरकार करे सख्ती
समाज वैज्ञानिक अजीत प्रताप सिंह चौहान का कहना है कि दहेज मांगने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण होते हैं। अधिकांश मौके पर लोग बिना मेहनत किए सुख-सुविधाएं चाहते हैं। इसके लिए वे पत्नी पर अपने परिवार से कई वस्तुओं मसलन गाड़ी या पैसे की मांग करते हैं। इसकी पूर्ति नहीं होने पर वे महिला को प्रताडि़त करते हैं। दहेज प्रथा कानूनन जुर्म होने के बावजूद आज भी समाज में चल रही है। सरकार को इस पर सख्ती से नियंत्रण लगाना चाहिए। लोग एक दूसरे की देखादेखी भी दहेज की मांग करते हैं।

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