राजधानी में खुलेआम बिक रही विदेशों से चोरी करके लाई गई सिगरेट

  • जिले में खुली सिगरेट की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश भी हवा-हवाई
  • विदेशी कंपनियों के सिगरेट की स्मगलिंग बढऩे से व्यापारियों में रोष

 प्रभात तिवारी

Captureलखनऊ। जिले में खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश हवा-हवाई साबित हो चुका है। अब शहर में खुलेआम विदेशों से स्मगल कर लाई गई सिगरेट मानकों के विपरीत बेची जा रही है। इन उत्पादों पर तम्बाकू से होने वाले नुकसान से बचाव की सचित्र जानकारी तक मौजूद नहीं है। जबकि देश में बनने वाले सभी उत्पादों पर 85 प्रतिशत सचित्र चेतावनी छापने का आदेश लागू करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के अधिकारी फैक्ट्रियों और दुकानों में छापेमारी कर रहे हैं। तम्बाकू बनाने वाली फैक्ट्रियों के मालिकान पर जुर्माना लगाने और व्यापार बंद करवाने की चेतावनी दी जा रही है लेकिन विदेशी सिगरेट की अवैध बिक्री की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों ने जानबूझकर अपनी आंखे मूंद ली हैं। इसलिए व्यापार संघ ने विदेश कंपनियों के सिगरेट की स्मगलिंग पर बैन लगाने और देश में बने तम्बाकू उत्पादों पर सचित्र चेतावनी संबंधी नियमों में बदलाव की मांग शुरू कर दी है।
प्रदेश सरकार की कैबिनेट में लिए गए फैसले के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अरविन्द कुमार ने नवंबर 2015 में खुली सिगरेट की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की अधिसूचना जारी की थी। इसके लिए सभी जिलों में आवश्यक दिशा निर्देश भेज दिये गये थे, जिसमें खुली सिगरेट बेचने वाले दुकानदारों पर जुर्माना लगाने और जेल भेजने का नियम था। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। राजधानी में आदेश मिलने के करीब डेढ़ महीने बाद तक खुली सिगरेट की बिक्री करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया गया। शहर में खुली सिगरेट बेचने वाले 25 से अधिक दुकानदारों का चालान काटा गया। जुर्माना वसूला गया लेकिन समय बीतने के साथ ही सारा मामला ठंडा हो गया। जब अधिकारियों का दबाव पड़ता है, तब अधिकारी छापेमारी करने निकलते हैं। इसलिए शहर में खुली सिगरेट की बिक्री की जा रही है। जबकि सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम 2003 की धारा 7 की उपधारा 2 के तहत चेतावनी के बिना खुली सिगरेट की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उक्त अधिनियम की धारा 20 के तहत दंडित किया जाएगा। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों के अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
धड़ल्ले से बिक रही विदेशी सिगरेट
उत्तर प्रदेश व्यापार संघ के अध्यक्ष डॉ. हर्ष अग्रवाल के मुताबिक देश में अमेरिका, जापान और चीन में बने तम्बाकू उत्पादों की बिक्री की जा रही है। इस देशों में बनने वाले तम्बाकू उत्पादों पर बिल्कुल भी सचित्र चेतावनी नहीं होती है। इन सबके बावजूद विदेशी कंपनियों के 20 से 40 ब्रांड की सिगरेट शहर में खुलेआम बिक रही है। जिसमें प्रमुख रूप से ब्लैक, मोर, गुडांग रगरम, डनहिल समेत कई अन्य ब्रांड की सिगरेट पापुलर हैं। ये कंपनियां देश में बेचे जाने वाले तम्बाकू उत्पादों के संबंध में जारी नियमों और मानकों का पालन भी नहीं करती हैं। इनमें से किसी भी ब्रांड पर तम्बाकू उत्पादों से होने वाले नुकसान की सचित्र जानकारी नहीं होती है। इन सबके बावजूद विदेशों से स्मगलिंग करके लाई जा रही सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है। जबकि देश में 1 अप्रैल 2016 से प्रभावी तम्बाकू उत्पादों पर 85 प्रतिशत सचित्र चेतावनी का नियम लागू करवाने के लिए व्यापारियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इससे व्यापारी काफी परेशान हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश व्यापार संघ ने केन्द्र सरकार को ज्ञापन भेजकर विदेशी कंपनियों की तरह देश में बने तम्बाकू उत्पादों पर अधिकतम 40 प्रतिशत सचित्र चेतावनी छापने का नियम लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही भारत में बने सभी तम्बाकू उत्पादों पर 85 प्रतिशत तक सचित्र चेतावनी छापने संबंधी आदेश वापस लेने की मांग की गई है। व्यापार संघ के कमलेश चौरसिया ने कहा कि देश में नये कानून की वजह से तम्बाकू व्यवसाय में लगे चार करोड़ परिवारों का रोजगार पर असर हो रहा है। इसलिए सरकार को उत्पादों पर छपे जागरूकता संदेशों से जुड़ा आदेश कड़ाई से लागू करवाने की बजाय विदेशी सिगरेट पर रोक लगाने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने विदेशी सिगरेट की स्मगलिंग पर रोक लगाने और देश में तम्बाकू उत्पादों पर छपने वाली चेतावनी संबंधी नियमों के बारे में जल्द ही कोई फैसला नहीं लिया तो संगठन व्यापक आंदोलन करेगा।

कई जानलेवा बीमारियां देता है तंबाकू
तम्बाकू का सेवन से कैंसर, हृदय रोग और सांस की बीमारी तेजी से फैलती है। ïिवशेषज्ञों के मुताबिक तम्बाकू उत्पादों में अनेकों प्रकार के हानिकारक रसायन होते हैं,जो शरीर के विभिन्न अंगों को किसी न किसी रूप में नुकसान पहुंचाते हैं। इंंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार भारत में सालाना तम्बाकू की वजह से 10 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। देश में 39.9 फीसदी युवा तम्बाकू का सेवन करते हैं। इसमें 25.3 फीसदी आबादी चबाने वाली तम्बाकू और 2.3 फीसदी युवा सिगरेट का सेवन करते हैं, जबकि 12.4 फीसदी युवा बीड़ी का सेवन करते हैं।

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