राजधानी में ऐसे कैसे हट पायेगा सडक़ों के किनारे से अतिक्रमण

प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद भी चारबाग से बर्लिंगटन तक अतिक्रमण का बोलबाला

अतिक्रमण के चलते घंटों लगा रहता है जाम, परेशानी से जूझते हैं लोग

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में सडक़ों को अतिक्रमणमुक्त करवाना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। नगर निगम और प्रशासन की टीम दिन में सडक़ों के किनारे से अतिक्रमण हटवाती है। इसके बाद दुकानदार शाम ढ़लने के साथ ही दुकानें लगाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में सडक़ों से अतिक्रमण हटवाने में प्रशासनिक विभाग की तरफ से की जा रही कार्रवाई ढाक के तीन पात साबित हो रही है। वहीं मेट्रो के दूसरे चरण का अभियान तय समय पर शुरू हो पायेगा, इस पर भी संदेह के बादल मंडराने लगे हैं।
नगर निगम के अधिकारी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करवाने की कार्रवाई कर चुके हैं लेकिन सडक़ों पर अतिक्रमण बदस्तूर जारी है। नगर निगम की टीम सुबह जिन-जिन इलाकों और जिन-जिन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटवाती है, शाम को उन्हीं सडक़ों पर दोबारा दुकानें सज जाती हैं। राजधानी में सडक़ों पर अतिक्रमण करने संबंधी घटनाएं रोजाना चारबाग, बर्लिंगटन चौराहा, हजरतगंज, नाका, अमीनाबाद, कैसरबाग और पत्रकारपुरम समेत विभिन्न इलाकों में होती रहती हैं। इनको अतिक्रमण मुक्त करने का समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। जिसमें लाखों रुपये का खर्च आता है लेकिन नतीजा सिफर साबित हो रहा है। सडक़ों पर अतिक्रमण किसकी वजह से बार-बार हो रहा है। इस बारे में नगर निगम और पुलिस विभाग के अधिकारी एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं लेकिन सही मायने में सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करने की कठोर कार्रवाई नहीं हो पाती। जो शहर में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम की प्रमुख वजह बन रहा है। हालांकि सडक़ों पर दुकानें लगाने वाले सैडक़ों दुकानदार दबी जुबान में नगर निगम और पुलिस विभाग के अधिकारियों पर दुकान लगाने के बदले रोजाना 50-100 रुपये की अवैध वसूली का भी आरोप लगाते रहे हैं। इसलिए अतिक्रमण नहीं हट पाने की एक बड़ी वजह से रूप में पुलिस विभाग और नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की होने वाली अवैध कमाई भी बताई जा रही है, जिसको बिल्कुल भी नकारा नहीं जा सकता है।

मेट्रो के दूसरे चरण में बाधक बन सकता है अतिक्रमण

राजधानी में मेट्रो रेल का जाल बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। इसमें प्रथम चरण के अंतर्गत चारबाग से एयरपोर्ट तक मेट्रो का रूट तैयार किया जा रहा है। इन क्षेत्रों को बड़ी मुश्किल से अतिक्रमण मुक्त करवाया गया लेकिन शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक चारबाग की सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करवाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। इन क्षेत्रों में नगर निगम के अधिकारी आधा दर्जन से अधिक बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चला चुके हैं लेकिन सडक़ों पर दोबारा अतिक्रमण हो जाता है। ऐसे में चारबाग से हजरतगंज तक मेट्रो रेल का जाल बिछवाना प्रशासन और मेट्रो रेल प्राधिकरण के लिए नाकों चने चबाने के बराबर होगा। इसलिए बेहतर है, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मिलकर सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करने की ठोक कार्रवाई करें और पटरी दुकानदारों की समस्याओं का समुचित समाधान करें, तभी अतिक्रमण और जाम से निजात मिल सकती है।

अमीनाबाद से भी नहीं हट पाया है अतिक्रमण
लखनऊ में सडक़ों पर अतिक्रमण कोई नई बात नहीं है। यहां अमीनाबाद और कैसर बाग क्षेत्र की आधा से अधिक सडक़ों पर पटरी दुकानदारों का अतिक्रमण है। इसके अलावा बड़े दुकानदारों ने अपनी दुकान के सामने शो रूम बनाकर स्थायी अतिक्रमण कर रखा है। जिसकी वजह से अमीनाबाद क्षेत्र में रोजाना भयंकर जाम लगता है। इस क्षेत्र से गुजरने वाला व्यक्ति 500 मीटर का रास्ता तय करने में एक-डेढ़ घंटे तक का समय लगाता है, जिसमें पेट्रोल का खर्च और समय की बर्बादी तो होती ही है, प्रदूषण से शरीर को नुकसान पहुंचने का भी खतरा रहता है। इससे छुटकारा पाने को लेकर क्षेत्रीय लोग बहुत बार नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। नगर निगम के अधिकारी युद्ध स्तर पर अमीनाबाद को अतिक्रमण मुक्त करवाने का अभियान चला चुके हैं। सडक़ों के किनारे पीली पट्टी खींची जा चुकी है, जिसके बाहर दुकान लगाने वाले दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जुर्माना लगाने की बात कही गई थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। आज भी अमीनाबाद, गड़बड़झाला मार्केट और कैसरबाग क्षेत्र में सडक़ों पर अतिक्रमण है, जिसकी वजह से रोजाना घंटों जाम लगा रहता है।

दोबारा अतिक्रमण के लिए पुलिस जिम्मेदार: जोनल अधिकारी

इस संबंध में नगर निगम जोन-दो के जोनल अधिकारी संजय ममगाई का कहना है कि नगर निगम की टीम ने सडक़ों के किनारे से अतिक्रमण हटवा दिया था। यदि दोबारा सडक़ों पर अतिक्रमण हुआ है, तो उसको हटवाने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। इसलिए बेहतर है पुलिस विभाग के अधिकारी सडक़ों पर दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें और सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करवायें। यदि तब भी अतिक्रमण नहीं हटा तो नगर निगम की टीम दोबारा अभियान चलाकर सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करवायेगी।

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