राजधानी में अब सस्ती दाल उपलब्ध करवाने की होड़

दाल एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन के बाद कर्मचारी कल्याण निगम भी मैदान में कूदा
30 अक्टूबर से 120 रुपये प्रति किग्रा की दर से जनता को अरहर की दाल दिलाने का वादा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। जिले में आम जनता को रियायती दर पर अरहर की दाल उपलब्ध कराने वालों में आपसी होड़ शुरू हो चुकी है। लखनऊ दाल एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन की तरफ से 150 रुपये प्रति किग्रा की दाल उपलब्ध करवाने को लोकप्रियता मिलते ही राज्य कर्मचारी कल्याण निगम भी सस्ती दाल उपलब्ध करवाने के लिए मैदान में कूद पड़ा। कर्मचारी कल्याण निगम ने 30 अक्टूबर से 120 रुपये कीमत पर आम जनता को दाल उपलब्ध करवाने की घोषणा कर दी है। इससे आम जनता में आसमान छूती दाल की कीमतों और खरीदारी में राहत मिलने की उम्मीद जाग गई है।
उत्तर प्रदेश में दाल की कीमतें आसमान छू रही हैं। गरीब की थाली से दाल गायब होने के बाद मध्यम वर्ग के परिवारों में मेहमानों के आने के बाद ही दाल बन रही है। हर तरफ डबल सेंचुरी का आंकड़ा पार कर चुकी दाल की चर्चा हो रही है। इस मुद्दे पर अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों से दाल की कीमतों को नियंत्रित करने की सलाह ली जा रही है। सरकार आम जनता को सस्ती दाल उपलब्ध करवाने की कोशिशें कर रही है। इसमें स्थानीय प्रशासन व्यापार संगठनों और अन्य संगठनों की मदद से लोगों को रियायती दर पर अरहर की दाल उपलब्ध करवा रही है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में लखनऊ दाल एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन व पाण्डेयगंज व्यापार मंडल की संयुक्त पहल से आम जनता को तीन दिन से सस्ती दरों पर अरहर की दाल उपलब्ध करवाई जा रही है। इसमें शहरी क्षेत्र में कुल 10 आउटलेट्स पर 150 रुपये प्रति किग्रा की दर से अरहर की दाल बेची जा रही है। प्रति व्यक्ति दो किग्रा दाल खरीद सकता है। संगठन ने तीन दिन में 70 कुतंल से अधिक की अरहर की दाल बेचने का अनुमान लगाया है। आम जनता ने अरहर की दाल उपलब्ध कराने की इस पहल का स्वागत किया है। इसके साथ ही संगठन के कार्यों की सराहना भी की जा रही है। वहीं राज्य कर्मचारी कल्याण निगम ने भी अरहर की दाल को रियायती दर पर उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। निगम के पदाधिकारियों ने आगामी 30 अक्टूबर से 120 रुपये प्रति किग्रा की दर से लोगों को दाल उपलब्ध करवाने की घोषणा कर दी है। माना जा रहा है कि महंगाई बढऩे पर आलू, प्याज और टमाटर को रियायती दर पर उपलब्ध कराने का अभियान चलाकर खूब वाहवाही बटोरी थी। ये अलग बात है कि शहर में 35 आउटलेट्स पर आलू, प्याज और टमाटर की बिक्री की घोषणा करने के बावजूद मात्र आठ जगहों से ही रियायती सामान उपलब्ध करवाने में सफल हो पाया था। ऐसे में व्यापार संगठन की तरफ से निर्धारित मूल्य से भी कम कीमत पर दाल बेचने का अभियान चलाने को लेकर पूरी तैयारी कर लेनी चाहिए। इससे पूर्व की भांति कल्याण निगम अपनी किरकिरी कराने से बच जायेगा।
गौरतलब हो कि अरहर की दाल के दाम में पिछले छह महीने में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है। दाल की कीमतें 70 रुपये प्रति किग्रा से बढक़र 210 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच चुकी हैं। अचानक से मार्केट में दाल की कीमतों में उछाल की प्रमुख वजह दाल की जमाखोरी बताई जा रही है। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों की छापेमारी में करोड़ों रुपये की दालों की जमाखोरी का मामला सामने आ चुका है।
प्रशासन ने हजारों कुंतल दालों को गोदामों में सीज करवा दिया है। सरकारी महकमा आम जनता को सस्ती दरों पर दालें उपलब्ध करवाने की कोशिशें कर रहा है। लेकिन हकीकत में दाल की कीमतों पर अभी भी नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। बाजार में अभी भी अरहर की दाल 210 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। वहीं आर्थिक विश्लेषकों और व्यापार संगठनों का अनुमान है कि अरहर की दाल की कीमतों में बहुत जल्द गिरावट आयेगी। इसकी वजह व्यापक स्तर पर जमाखोरों के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान और दाल के दामों को नियंत्रित करने की सरकार की तरफ से की जाने वाली अन्य कोशिशें हैं। इसलिए आम जनता को सस्ती दर पर दाल उपलब्ध करवाने की होड़ में दाल एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन, पाण्डेयगंज व्यापार मंडर और कर्मचारी कल्याण निगम के अलावा कई अन्य संगठन भी शामिल होने का मन बना रहे हैं। जो आम जनता के लिए लाभकारी साबित होगा।

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