राजधानी को एक और बर्न यूनिट की आवश्यकता सिविल की बर्न यूनिट में अधिकांश बेड रहते हैं फुल

 

केजीएमयू प्रशासन बर्न यूनिट को लेकर गंभीर है। शासन को बर्न यूनिट का प्रस्ताव भेजा जा चुका अभी तक कोई जबाब नहीं आया।
– डॉ. वेद, डिप्टी सीएमएस, केजीएमयू

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। अभी हाल में ही एक पत्रिका ने केजीएमयू को देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में दूसरा स्थान दिया था लेकिन देश के दूसरे नंबर के संस्थान की एक कड़वी हकीकत यह है कि इस संस्थान में बर्न यूनिट नहीं है। जिससे आने वाले गंभीर मरीजों को मायूसी का सामना करना पड़ता है। हैरानी की बात यह भी है कि केजीएमयू प्रशासन की ओर से बर्न यूनिट को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
हैरत की बात ये है कि राजधानी की 45 लाख की आबादी पर प्रमुख रूप से मात्र एक बर्न यूनिट है। मेडिकल कॉलेज में में पर आस-पास के जिलों से आने वाले मरीजों की भी खासी संख्या रहती है। सूबे के अन्य जिलों की बात तो दूर केवल राजधानी में बर्न के रोजाना 10 मरीज पाये जा रहे हैं। राजधानी के सिविल और बलरामपुर अस्पताल में बर्न यूनिट की व्यवस्था है। जहां सिविल अस्पताल की बर्न यूनिट में कुल 40 बेड हैं वहीं बलरामपुर अस्पताल की बर्न यूनिट में मात्र 12 बेड हैं। साल के मई और जून महीनों में आग से झुलसने की घटनायें अधिक होती हैं। इसके चलते सिविल और बलरामपुर अस्पताल की बर्न यूनिट में ज्यादातर बेड फुल हो गये हैं। राजधानी के इन अस्पतालों की बर्न यूनिट में पूर्वांचल के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। हालात यह हैं कि कई मरीजों को बर्न वार्ड में रखना पड़ रहा है।
बना रहता है इंफेक्शन का खतरा
बर्न यूनिट फुल हो जाने से आग से झुलसे कई मरीजों को बर्न वार्ड में ही रखना पड़ता है। जिससे उन्हें इंफेक्शन का खतरा रहता है। इसका कारण यह है कि आग से झुलसने वाले मरीजों के लिए बर्न वार्ड में सीमित व्यवस्था रहती है जबकि बर्न यूनिट में इन मरीजोंं के लिए सभी प्रकार की सुविधायें रहती हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
एसिड अटैक से पीडि़त भी होते हैं भर्ती
30 जुलाई 2014 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एसिड अटैक की शिकार महिलाओं के इलाज मुफ्त कराने की बात कही थी। सवाल यह है कि एसिड पीडि़ता का इलाज होगा कहां क्योंकि राजधानी में जो बर्न यूनिट हैं वह अक्सर फुल रहती हैं।

 

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