राजधानी के लोग गर्मी में झेलेंगे भयंकर जल संकट, नहीं मिलेगा पीने लायक पानी

भूगर्भ जल स्तल में लगातार गिरावट की वजह से बढ़ी पेय जल की समस्या
राजधानी के 60 प्रतिशत इलाकों में पेयजल और साफ पानी का टोटा
गोमती नदी का गिरता जल स्तर बड़ी चिंता का विषयCapture प्रभात तिवारी

लखनऊ। राजधानी में भूगर्भ जल का स्तर लगातार घट रहा है। बरसात नहीं होने और भूगर्भ जल का भयंकर दोहन खतरनाक साबित हो रहा है। शहरी क्षेत्र के 60 प्रतिशत मोहल्लों में रहने वाले लोग पीने लायक पानी के लिए तरस रहे हैं। रोजाना पेयजल आपूर्ति बाधित होने की समस्या को लेकर लोग सडक़ों पर उतर रहे हैं। इस समस्या का समाधान करने में जलकल विभाग के भी हाथ पांव फूलने लगे हैं। ऐसे में मई और जून के महीने में जनता को भयंकर जल संकट जूझने के लिए तैयार रहना होगा।
जिले में मोहनलालगंज, महिलाबाद और बीकेटी का भू जल स्तर क्रिटिकल कंडीशन में पहुंच चुका है। पीने के पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग पीने के पानी का संकट झेल ही रहे थे। शहरी क्षेत्र में भी पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। शहर की आधी से अधिक आबादी घरों में पानी आने की आस लगाये नल की तरफ टकटकी लगाये बैठी रहती हैं। मोहल्ले में पानी आने की उम्मीद में नल के आस-पास सैकड़ों बाल्टियां और अन्य बर्तन लेकर इंतजार करते लोगों का दिखना आम बात हो चली है। जिन मोहल्लों में पानी की सप्लाई हो रही है। वहां भी 24 घंटे में मात्र दो घंटे के लिए पानी आता है। वह भी इतना गंदा होता है कि पीने से तमाम तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। जल कल विभाग के अधिकारी पीने के पानी को क्लोरीनेशन के माध्यम से पीने लायक बनाने की तमाम कोशिशें करते हैं लेकिन पीने के पानी की पाइप लाइन में जगह-जगह लीकेज की वजह से साफ पानी मिल पाना चुनौती बनता जा रहा है। हालांकि राजधानी के अधिकांश घरों में साफ पानी के लिए लोगों ने आरओ और आफ लाइन फिल्टर लगवा लिया है।

घरों में लगातार बढ़ रही पानी की खपत
जिले में पानी का स्तर गिरने के बावजूद घरों में इस्तेमाल होने वाले पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। भूगर्भ जल विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2005 में भूगर्भ जल का दोहन 190 मिलियन लीटर प्रतिदिन का था लेकिन 2016 में बढक़र करीब 405 मिलियन लीटर प्रतिदिन हो गया है। जिले में जलसंरक्षण के मकसद से करोड़ो रुपये खर्च कर की गई तालाबों की खोदाई भी बरसात न होने की वजह से काम नहीं आ सकी। ऐसे में गोमती नदी का जलस्तर भी लगातार घटता जा रहा है। पर्यावरणविदों की मानें तो गोमती नदी का घटता जल स्तर बहुत ही खतरनाक संकेत दे रहा हैं। यह स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। इसलिए मामले को गंभीरता से लेकर राज्य सरकार को ट्यूबवेल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिेए। ऐसा करके ही गोमती नदी और लखनऊ को पेयजल संकट से बचाया जा सकता है।

वैज्ञानिकों को मिले सर्वे में खतरनाक संकेत
भूगर्भ जल वैज्ञानिकों के सर्वे में लखनऊ का भू जल स्तर लगातार गिर रहा है। जिले में पिछले एक दशक में ट्यूबवेल की संख्या में भी दो गुना से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। सरकारी फाइलों में दर्ज आंकड़ों पर गौर करें तो 10 साल में ट्यूबवेल की संख्या 300 से बढक़र 672 हो गई है। इसके अलावा अनधिकृत ट्यूबवेल की अनुमानित संख्या 10 हजार से अधिक है। शहरी और नगरीय क्षेत्र में सबमर्सिबल लगवाने वालों की संख्या भी हजारों में हैं। इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि भूगर्भ जल का दोहन किसने व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। इसी वजह से भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा था कि मोहनलालगंज, मलिहाबाद और बीकेटी क्षेत्र में नये नलकूप लगवाने पर रोक लगा दी जाये। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र में भी सबमर्सिबल पम्प लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इन सबके बावजूद धड़ल्ले से सबमर्सिबल पम्प की बोरिंग की जा रही है। इस बारे में नगर निगम और जल कल विभाग के अधिकारियों को भी जानकारी है लेकिन सबने चुप्पी साध ली है।

जिन क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति में संकट और गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं। वहां विभागीय अधिकारियों को भेजकर मामले की जांच करवाई जा रही है। इसके साथ ही पेयजल संबंधी समस्या का समाधान भी तत्परता के साथ किया जा रहा है। जिन इलाकों में हैण्डपम्प या ओवरहेड टैंक लगाने की अनुमति मिल चुकी है। वहां बजट की उपलब्धता के अनुसार काम भी किया जा रहा है। हमारा पूरा प्रयास है कि आने वाले महीनों में भी जनता को पेयजल संकट झेलने की जरूरत न पड़े।
राजीव वाजयेपी, महाप्रबंधक, जलकल विभाग

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