रसूखदार पुलिसकर्मियों के सामने बेअसर एसएसपी के आदेश

  • दागी पुलिसकर्मी मलाईदार पोस्टिंग छोडऩे को तैयार नहीं
  • पुलिस कार्यालय से जारी ट्रांसफर आर्डर साबित होते हैं कोरे कागज़

 आमिर अब्बास
3लखनऊ। राजधानी में प्रदेश सरकार की छवि खराब करने वाले पुलिस कर्मी पूरे शहर में अपनी जड़ें जमाए हुए हंै। इन बेलगाम पुलिसकर्मियों की वजह से एसएसपी ही नहीं बल्कि सरकार की बदनामी भी होती रहती है। थानेदार हों या सिपाही, लखनऊ में एक से बढ़ कर एक रसूखदार पुलिसकर्मी तैनात हैं. जिनकी पहुंच सत्ता में बैठे लोगों से है। इन्हीं पुलिसकर्मियों की कारिस्तानी से पुलिस विभाग और सरकार पर हमेशा सवालिया निशान लगते रहते हैं। लेडी सिंघम के नाम से जानी जाने वाली तेज़ तर्रार और साफ सुथरी छवि के लिए मशहूर एसएसपी मंजिल सैनी के आदेश भी कुछ पुलिस कर्मियों पर असरकारक साबित नहीं हो पा रहे हैं। ऊंची पहुंच रखने वाले पुलिसकर्मी तबादला हो जाने के बावजूद अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं हैं। दबंग और ऊंची पहुंच रखने वाले ये ऐसे पुलिस कर्मी हैं। जिनका विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। बावजूद इसके एसएसपी का आदेश पुलिस कर्मियों पर बेअसर साबित हो रहा है।
रसूखदार पुलिस कर्मियों का जीता जागता उदाहरण चौक कोतवाली की मेडिकल कालेज चौकी पर पिछले 10 वर्षों से तैनात सिपाही राम अवध यादव है। इस पुलिसकर्मी की पहुंच सत्ता में बैठे लोगों तक है। इस सिपाही की कारगुजारियों के नाखुश होकर एसएसपी ने 5 दिन पूर्व लाईन हाजिर करने का आदेश दिया था, लेकिन एसएसपी के आदेश का आज तक पालन नहीं हो पाया। एक छोटी सी पुलिस चौकी पर तैनात रसूखदार सिपाही राम अवध यादव मलाईदार चौकी छोडऩे को बिल्कुल भी तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार 10 वर्षों से इसी चौकी पर तैनात इस सिपाही पर खून के सौदागरों से मिली भगत का आरोप भी लग चुका है। इसने कोहली ब्लड बैंक में पकड़े गये खून के काले कारोबारियों को बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। इसके अलावा ट्रामा सेन्टर के बाहर खड़ी होने वाली प्राइवेट एम्बुलेन्स चालकों से इस सिपाही की वसूली के चर्चे आम हैं। यह सिपाही लाश गाडिय़ों से भी महीना वसूलता है। इसके अलावा बाजारखाला की टिकैतगंज चौकी पर अपनी पहुंच के दम पर दूसरी बार जुगाड़ से पोस्टिंग पाने वाले दंबग सिपाही अवधेश दूबे की कारस्तानी भी कुछ इसी तरह की बताई गई है। क्षेत्र में गैर कानूनी काम करने वाले लोगों से वसूली करने के लिए बदनाम इस सिपाही का पांच दिन पहले एसएसपी ने हुसैनगंज कोतवाली में तबादले का आदेश दिया था। तबादले का फरमान आते ही दूसरी बार मनचाही चौकी पर तैनाती पाने वाला ये सिपाही तबादले का आदेश निरस्त कराने के लिए जुट गया। फिलहाल एसएसपी के आदेश का अब तक पालन नहीं हो पाया है। यह सिपाही सादे कपड़ों में क्षेत्रीय दबंगो के साथ होटलों में बैठकर मौज मस्ती करने के लिए चर्चित है। सूत्रों के अनुसार मेहदीगंज मे कुछ दिनों पूर्व पकड़े गये जुआरियों के पास से बरामद नगदी में से भी इस सिपाही ने अच्छी खासी रकम पार कर दी थी। इसलिए इंस्पेक्टर ने शक होने पर सिपाही को जमकर फटकार लगाई थी। ये दोनों सिपाही तो बानगी भर हैं। शहर के 43 थानों मे ऐसे सिपहियों की भरमार है। जो अपने रसूख के बल पर अधिकारियों का आदेश ताक पर रखकर अपनी मर्जी के मुताबिक नौकरी कर रहे हैं।

दबंग थानेदारों पर भी आदेश बेअसर

राजधानी में तैनात ऊंची पहुंच वाले बहुत से थानेदार भी उच्चाधिकारियों का आदेश नहीं मानते हैं। हाल ही में गाजीपुर जैसे महत्वपूर्ण थाने पर तैनात हुए इन्स्पेक्टर नागेन्द्र चौबे की तैनाती के बाद एसएसपी द्वारा की गई इस तैनाती पर कई सवाल उठे थे। ये वही नागेन्द्र चौबे हैं, जिन्होंने गुडम्बा थाने में तैनाती के दौरान कुत्ते की खाल को शेर की खाल बता कर गुडवर्क कर वाहवाही लूटने की कोशिश की थी। सूत्रों के अनुसार इस इन्स्पेक्टर पर वर्दी को शर्मसार करने वाले कई बदनुमा दाग भी लग चुके हंै, बावजूद इसके ऊंची पहुंच के मालिक इस इन्स्पेक्टर को मलाईदार पोस्टिंग मिल गई। सत्ता के करीबी माने जाने वाले विजयमल यादव की गिनती भी ऐसे ही पुलिस अधिकारियों में की जाती है। सूत्रों के अनुसार चिनहट में पोस्टिंग के दौरान भी इनके कारनामें जग जाहिर हुए थे। इसके बावजूद हजरतगंज कोतवाली पर अपनी पहुंच के दम पर कब्जा जमाए बैठे हैं। इनके खिलाफ कई शिकायतों के बावजूद लेडी सिंघम भी अपनी कलम चलाने में हिचकती हैं। इसी तरह अपनी आशिक मिजाजी के लिए कुछ माह पूर्व चर्चा में रहे इंस्पेक्टर अमीनाबाद जयकरन सिंह पटेल भी रसूखदार इन्स्पेक्टरों की फेहरिस्त में शामिल हैं। मडिय़ाव थाने में तैनाती के दौरान पूर्व एसएसपी आशुतोष पाण्डेय ने इन पर भूमाफियाओं से मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप में कार्यवाही की थी। इसके बावजूद इस रसूखदार इंस्पेक्टर को अमीनाबाद जैसी महत्वपूर्ण कोतवाली का चार्ज दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक कुछ माह पूर्व थाने पर शिकायत लेकर आई एक सुन्दर युवती से मोबाईल नम्बर प्राप्त कर उससे फोन पर अश्लील बातें करने और युवती को जुबान खोलने पर धमकाने का आरोप भी जयकरन सिंह पर लग चुका है। संवेदनशील मानी जाने वाली वजीर गंज कोतवाली का रसूख के दम पर चार्ज पाये एसओ हरीश चन्द्र से भी एसएसपी नाखुश हैं। आगामी दिनो में पुराने लखनऊ में मोहर्रम के कार्यक्रम होने हैं लेकिन मोहर्रम से पूर्व हरीश चन्द्र ने क्षेत्रीय लोगों से कोई समन्वय नहीं बनाया। जनता से मधुर संबंध न रखने के लिए एसएसपी ने इन्हें फटकार तो ज़रूर लगाई, लेकिन उनकी फटकार का कोई असर इन पर दिखाई नहीं दे रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसएसपी ने एसओ वजीरगंज को शाहिद आलम मामले में लापरवाही और मिलीभगत के आरोप में भी जम कर फटकारा था। ऊंची पहुंच रखने वालों की फेहरिस्त में इंस्पेक्टर बाजार खाला अनिल कुमार सिंह का नाम भी शामिल है। कई मामलों में लापरवाही उजागर होने के बावजूद इंस्पेक्टर बाजार खाला एसएसआई से लेकर इंस्पेक्टर की कुर्सी तक इसी थाने में हथियाए हुए हैं। सरल स्वभाव के लिए भले ही इंस्पेक्टर बाजारखाला मशहूर हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरल स्वभाव के पीछे इनके कारनामे ऐसे हैं, जिसको अगर निष्पक्ष निगाहों से देखा जाये तो खुद ही इनकी करतूतों से पर्दा उठ जायेगा। सोचनीय विषय यह है कि कानून व्यवस्था को पटरी पर न रखने और थाने पर आने वाले पीडि़तों को न्याय दिलाने में असफल साबित होने वाले पुलिसकर्मियों को राजनेता क्यों बचाते है। ऐसे पुलिस कर्मियों के रहते हुए आम जनता को निष्पक्ष न्याय और सुरक्षा व्यवस्था कैसे मिल पायेगी।

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