रश्म अदायगी न बने देशभक्ति

15 अगस्त और 26 जनवरी हमारा राष्टï्रीय त्यौहार है। इसके महत्व को सभी देशवासियों को समझना चाहिए। तिरंगे का अपमान करने का हक किसी को नहीं है। सबसे ज्यादा तिरंगे का अपमान सरकारी कार्यक्रमों में देखने को मिलता है। स्कूलों में बच्चे तिरंगा लेकर जाते हैं लेकिन वह तिरंगे के महत्व को समझते हैं और उसे संभाल कर रखते हैं, लेकिन सरकारी दफ्तरों में 15 अगस्त और 26 जनवरी को रश्म अदायगी से ज्यादा कुछ नहीं दिखता।

sanjay sharma editor5किसी भी देश की पहचान उसका राष्टï्रध्वज होता है। राष्टï्रध्वज देश का गौरव, मान सब अपने में समेटे रहता है। इसलिए झंडे का अपमान कोई भी देशवासी बर्दाश्त नहीं कर पाता। 26 जनवरी को पूरे देश ने गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया। स्कूल, कॉलेजों से लेकर अमूमन सभी सरकारी दफ्तरों में गणतंत्र दिवस मनाया गया। देश के लिए गणतंत्र दिवस की क्या अहमियत है, इसे बताने की जरूरत नहीं है। देश को अपनी आजादी के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। ऐसे ही यह आजादी नहीं मिली। इसलिए इस आजादी की कद्र होनी चाहिए। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर सुबह-सुबह बच्चों-से लेकर बूढ़ों तक के हाथों में तिरंगा दिखायी देता है, लेकिन दोपहर तक लोगों के हाथ में झंडे नहीं दिखायी देते। वह झंडे सडक़ों पर, नालियों में पड़े होते हैं, और देशवासियों पर इसका रत्ती भर असर नहीं दिखाई देता। जो तिरंगा, देश की पहचान है, गौरव है, वह नालियों में, सडक़ों पर और कूड़े के ढेर में पड़ी रहे, यह कहां से ठीक है।
झंडे का अपमान देखकर ही कोर्ट ने प्लास्टिक के झंडे पर प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि प्लास्टिक नष्टï नहीं होता है, इसलिए कूड़े के ढेर में महीनों तिरंगा पड़ा रहता था। कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित होने के बावजूद आज भी प्लास्टिक का झंडा बाजार में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। 15 अगस्त और 26 जनवरी हमारा राष्टï्रीय त्यौहार है। इसके महत्व को सभी देशवासियों को समझना चाहिए। तिरंगे का अपमान करने का हक किसी को नहीं है। सबसे ज्यादा तिरंगे का अपमान सरकारी कार्यक्रमों में देखने को मिलता है। स्कूलों में बच्चे तिरंगा लेकर जाते हैं लेकिन वह तिरंगे के महत्व को समझते हैं और उसे संभाल कर रखते हैं, लेकिन सरकारी दफ्तरों में 15 अगस्त और 26 जनवरी को रश्म अदायगी से ज्यादा कुछ नहीं दिखता। न तो तिरंगे को मान दिया जाता है और न ही इस त्यौहार को लेकर वह जोश दिखता है, जो दिखना चाहिए। उत्साह सिर्फ लड्डू खाने तक ही दिखता है। इस बार भी गणतंत्र दिवस के मौके पर कार्यक्रम खत्म होने के बाद कार्यक्रम स्थलों पर जमीन पर झंडे पड़े दिखायी दिये साथ ही सडक़ व नालियों में भी भारी संख्या में झंडे दिखे। यह लोगों की कैसी देशभक्ति है जो मान से ज्यादा अपमान का कारण बन रही है। लोग यदि तिरंगे की इज्जत नहीं कर सकते हैं, तो इसका अपमान भी न करें।

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