रफ्तार का खतरनाक गिफ्ट

देश में सडक़ों की सबसे खस्ता हालत उत्तर प्रदेश में है। यहां की सडक़ों की बदहाली के कारण पिछले एक साल में लगभग 17 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। परिवहन मत्रांलय ने ऐसे 276 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान भी की है, जहां सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। इसलिए सरकार के साथ-साथ आम जनता को भी अपनी जिम्मेदार को समझना होगा और सडक़ दुर्घटना के कारणों को समाप्त करने में मिल जुलकर प्रयास करना होगा।

sanjay sharma editor5आजकल के युवाओं के लिए रफ्तार पैशन और जुनून बन गई है। यही जुनून हादसों की वजह भी बन रहा है। देश में रोजाना हजारों व्यक्ति सडक़ दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं। इसमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक होती है। ऐसे में विकास को गति देने के मकसद से बनाई गईं सडक़ें और बच्चों को गिफ्ट में दी गई हाई-स्पीडर गाडिय़ां मौत को दावत देने वाली साबित हो रही हैं। इस पर रोक लगाना जनता और सरकार दोनों के लिए चुनौती है।
केन्द्रीय गृहमत्रांलय अनुसंधान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में रोजाना 1774 सडक़ हादसे होते हैं, जिसमें करीब 400 लोगों की मौत होती है। 100 में से 77 सडक़ हादसों में गलती गाड़ी चलाने वाले की होती है। देश में सडक़ों की सबसे खस्ता हालत उत्तर प्रदेश में है। यहां की सडक़ों की बदहाली के कारण पिछले एक साल में लगभग 17 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। परिवहन मत्रांलय ने ऐसे 276 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान भी की है, जहां सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। इसलिए सरकार के साथ-साथ आम जनता को भी अपनी जिम्मेदार को समझना होगा और सडक़ दुर्घटना के कारणों को समाप्त करने में मिलजुलकर प्रयास करना होगा।
हर मां-बाप अपने बच्चों की छोटी-बड़ी ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करता है। उसके जेहन में हमेशा एक बात तरो-ताजा रहती है कि मुझे जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, उनसे मेरे बच्चों का सामना बिल्कुल न हो। हर तरह की सुविधा देने की चाहत में कुछ ऐसा भी कर गुजरते हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित होता है। आजकल के मां-बाप में अपने बच्चों को उनके जन्मदिन और परीक्षा में पास होने पर बाइक, स्कूटी, महंगी कारों और अन्य गाडिय़ों का तोहफा देने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन गाडिय़ों पर अक्सर ‘डैड गिफ्ट’ ‘मॉम गिफ्ट’ ‘बर्थडे’ गिफ्ट लिखा होता है। ऐसी गाडिय़ां रोजाना हमारी नजरों के सामने से गुजरती हैं। यदि हम अपनी याददास्त पर रोशनी डालें तो अक्सर ऐसी गाडिय़ों को चलाने वाले युवाओं की गाड़ी की स्पीड 70-80 किमी. प्रति घंटा से कम नहीं होती है। ऐसे लोग अक्सर सडक़ दुर्घनाओं के शिकार होते हैं। इनकी वजह से अक्सर अन्य लोगों को भी अपनी जान गंवानी पड़ती है।
ऐसे में हमें अपने बच्चों को खतरनाक गिफ्ट देने से बचना चाहिए। हम अपने बच्चों से प्यार करते हैं, उनकी जिन्दगी को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो उन्हें सही और गलत की जानकारी भी दें। यदि बच्चे गलत डिमांड करते हैं, तो उन्हें टोकने और बहलाने का हुनर भी हमें आना चाहिए।

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