रजिस्ट्रार के समर्थन में सडक़ पर उतरे छात्र

  • विवि प्रशासन के खिलाफ छात्रों में हैै रोष
  • नौकरी जाने के डर से शिक्षक नहीं आ रहे सामने

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। छात्रों से लेकर प्रोफेसर व रजिस्ट्रार सभी विवि के कुलपति व पूर्व प्रॉक्टर के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि कुलपति व पूर्व प्रॉक्टर कमल जायसवाल ने रजिस्ट्रार सुनीता चन्द्रा को इतना प्रताडि़त किया कि मजबूरन उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। रजिस्ट्रार के इस्तीफा देने के बाद छात्र उनके समर्थन में आ गए है और उन्होंने प्रदर्शन कर उनका इस्तीफा वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
बीते दिनों बीबीएयू कई कारणों से अखबार की सुर्खियों में रहा है। कभी नोटिस को लेकर तो कभी साफ-सफाई को लेकर। इस संबंध में वहां के जिम्मेदार व्यक्तियों का कहना है कि छात्र जानबूझकर अपनी समस्याओं को बढ़ा-चढ़ा कर हंगामा करते हैं। छात्रों के किसी आरोप में सच्चाई नहीं होती है। छात्रों के आरोप को बीबीएयू के जिम्मेदार भले ही झूठा साबित कर रहे हो लेकिन पिछले दिनों शोध छात्रा की शिकायत पर जारी नोटिस पर जब सवाल किया गया तो जवाब देते नहीं बन रहा था। इसके अलावा बीबीएयू की रजिस्ट्रार सुनीता चंद्रा के इस्तीफे पर भी जिम्मेदारों बोलने को तैयार नहीं है। छात्रों का आरोप है कि बीबीएयू में इतना भ्रष्टïाचार बढ़ गया है कि यहां इमानदारी से काम करने वालों को परेशान किया जा रहा है। ऐसा ही रजिस्ट्रार सुनीता चंद्रा के साथ भी किया गया है। वह अपना काम पूरी ईमानदारी से करती थी, जिसके कारण कुलपति व पूर्व प्रॉक्टर उन्हें परेशान कर रहे थे। तंग आकर उन्होंने इस्तीफा दिया है। सुनीता के इस्तीफे के बाद छात्र उनके समर्थन में उतर आए है और उनका इस्तीफा वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक कुलपति उन्हें वापस नहीं बुलाएंगे तब तक हम प्रदर्शन करेंगे। बीबीएयू में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिम्मेदारों का कारनामों की वजह से विवि सुखिर्यों में रहा है।
केस-1
शोध छात्रा बेला तुर्के को कुलपति व पूर्व प्रॉक्टर कमल जायसवाल व उनके सहयोगियों ने लम्बे समय तक शोध पत्र जमा करने को लेकर परेशान किया गया। उसके बाद किसी तरह जब बेला ने शोध पत्र जमा किया तो उसकों छात्रवृत्ति व चरित्र प्रमाण पत्र के लिए प्रताडि़त किया गया। जिसकी शिकायत छात्रा ने पीएम मोदी तक से की थी। इन बातों का विवि के जिम्मेदारों पर कोई असर नहीं पड़ा, जिसके बाद छात्रा ने न्याय के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग का दरवाजा खटखटाया।
केस-2
होली पार्टी में छात्रों के बीमार होने पर इलाज कराने के बजाए छात्रों को नोटिस थमा दी गई। छात्रों पर आरोप था कि उन्होंने तेज आवाज में डीजे व बिना सूचना दिए हॉस्टल से बाहर चले गए, जबकि इस संबंध में छात्रों का कहना था कि खाने में कुछ गड़बड़ी के कारण छात्र की तबियत खराब हो गई थी, जिन्हें लेकर हम लोग अस्पताल गए थे। वापस आने पर इन लोगों ने नोटिस थमा दी।
केस-3
किसी भी शैक्षिक संस्था का यह उद्देश्य होता है कि उनकी संस्था में सभी छात्रों को एक समान समझें, लेकिन बीबीएयू जिन छात्रों के हित के लिए खोला गया है उन्हीं के साथ भेदभाव कर रहा है। यहां के कुलपति व पूर्व प्रॉक्टर छात्रों को धर्म व जाति को लेकर आपस में लड़वाते रहते हैं। इसकी शिकायत पर इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
केस-4
यह विवि एक खास तबके के लोगों को ध्यान में रखकर खोला गया है, जिसके पीछे यह उद्देश्य था कि इस तबके के लोग भी सबके साथ शिक्षा से जुड़े। जिसके लिए उन्होंने विवि के नियमों में यह साफ तौर से दर्ज किया था कि 50 प्रतिशत सीट एससी,एसटी के लिए आरक्षित रहेगी। लेकिन कुलपति व उनके सहयोगियों ने इस आरक्षण वाले नियमों को बदलने के लिए कोर्ट में अपील कर रखी है।

दबी जुबान में शिक्षक कर रहे हैं विरोध

शिक्षकों का कहना है कि यहां के भ्रष्टïाचार के बारे में हम खुलकर बोल नहीं सकते, क्योकि हमें अपनी नौकरी बचानी है। यदि हम लोग इसका विरोध करते हैं तो हमें भी प्रताडि़त किया जाएगा। बहुत सी ऐसे गलत बाते हैं जिन्हें हमे न चाहते हुए भी सहन करना पड़ता है। जब ऊपर बैठा हुआ व्यक्ति ही भ्रष्टï है तो चाह के भी हम नहीं लड़ सकते हैं। इस संबंध में रजिस्ट्रार सुनीता चंद्रा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हां मैंने इस्तीफा दिया है, इसके आगे मैं अभी कुछ नहीं कहूंगी। वहीं विश्वविद्यालय प्रवक्ता प्रो. कमल जायसवाल से बात की गई तो उन्होंने सारे सवालों पर अनभिज्ञता जाहिर की।

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