रईसजादों का कहर और फुटपाथ पर मरते लोग

अहम सवाल यह है कि क्या आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज देने से आरोप सच साबित हो जायेगा? क्या गरीब परिवार हिट एंड रन केस की लंबी प्रक्रिया का इंतजार कर सकेंगे? क्या आने वाले दिनों में लोग शराब पीकर गाड़ी नहीं चलायेंगे? क्या फुटपाथ पर सोने वाले लोग बेखौफ अपनी नींद पूरी कर सकेंगे? इस हादसे ने एक बार फिर ऐसे तमाम सवाल उठा दिए हैं, जिनका सही-सही जवाब और गरीब परिवार को न्याय मिल सकेगा, इसकी संभावना कम ही लग रही है।

sajnaysharmaदुनिया वालों की नजर में खुद को बड़ा आदमी साबित करने और हाई सोसाइटीज में उठने बैठने की चाहत रखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंसान गलत और सही का फर्क करने के बजाय झूठी शान और हैसियत के पीछे पागल है। इसीलिए अपनी गलतियों के कारण दूसरों की जान लेने का गुनाह करने से भी नहीं डरता है। शराब पीकर तेज स्पीड में गाड़ी चलाने और फुटपाथ पर सोने वाले लोगों या सडक़ पार करने वालों को अपना शिकार बनाने वाली घटनाओं का मूल कारण यही है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बहुखंडी इमारत के सामने एक संस्था के रैन बसेरे में सो रहे लोगों पर पूर्व विधायक अशोक रावत के बेटे आयुष ने अपनी कार चढ़ा दी। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। आठ से अधिक लोग घायल हो गये। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया, लेकिन क्या आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज देने से आरोप सच साबित हो जायेगा? क्या गरीब परिवार हिट एंड रन केस की लंबी प्रक्रिया का इंतजार कर सकेंगे? क्या आने वाले दिनों में लोग शराब पीकर गाड़ी नहीं चलायेंगे? क्या फुटपाथ पर सोने वाले लोग बेखौफ अपनी नींद पूरी कर सकेंगे? इस हादसे ने एक बार फिर ऐसे तमाम सवाल उठा दिए हैं, जिनका सही-सही जवाब और गरीब परिवार को न्याय मिल सकेगा, इसकी संभावना कम ही लग रही है।
बॉलीवुड स्टार सलमान खान का मामला हर किसी को याद होगा। वर्ष 2002 में 28 सितंबर की रात खबर आई कि सलमान की तेज स्पीड कार की चपेट में आकर बांद्रा इलाके में फुटपाथ पर सो रहे एक व्यक्ति की मौत हो गई। चार अन्य घायल हो गये। इस केस की लंबी सुनवाई भी हुई। आखिरकार कोर्ट ने सलमान को बरी कर दिया। जबकि उनके सिक्योरिटी गार्ड ने बयान दिया था कि हादसे के वक्त सलमान ही गाड़ी चला रहे थे। इसी तरह जनवरी 2016 में तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद सोहराब के बेटे ने वायुसेना के एक अधिकारी को अपनी कार से रौंद दिया था। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। अप्रैल 2016 में दिल्ली के कश्मीरी गेट क्षेत्र में लुडकल स्कूल के सामने 12वीं के एक छात्र की कार ने रोड क्रास कर रहे मार्केटिंग एक्जिक्यूटिव सिद्घार्थ को रौंद दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसी तरह लखनऊ में शनिवार की रात रैनबसेरे में सोने वालों पर कार चढ़ा दी गई। चार की मौत भी हो गई।
इस तरह के हादसे न हों, इसके लिए पुलिस को कड़ाई से नियमों का पालन करना होगा। ऐसा करने वाले लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सेलिब्रिटी और पॉपुलर होने का लाभ बिल्कुल भी नहीं मिलना चाहिए।

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