रंग ला रही अखिलेश की मेहनत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन के चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि अखिलेश यादव द्वारा लिये गये निर्णयों से होने वाले फायदों की खुशबू अब चारों तरफ फैल रही है। मुख्य सचिव ने सबसे पहले कौशल विकास द्वारा संचालित योजनाओं का ब्योरा रखा। आलोक रंजन के मुताबिक जरूरत के हिसाब से नये आईटीआई खोले जा रहे हैं वहीं अलोकप्रिय सब्जेक्ट को खत्म कर लोकप्रिय विषयों की सीटों को बढ़ाया जा रहा है। यही नहीं कौशल मिशन ने बिजली विभाग के साथ एमओयू साइन किया है जिसमें दो वर्ष का ऐसा नया डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाएगा जिससे बिजली विभाग के टेक्निकल ग्रेड 2 के इंजीनियर बनाये जा सकें। उनके मुताबिक प्रत्येक आईटीआई कैम्पस में एक ऐसा स्मार्ट क्लास बनाया जाएगा जो मार्डन युग की सभी तकनीक से लैस होगा।
प्रदेश में कुल 280 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान व उनकी महिला शाखायें संचालित हैं एवं अगस्त, 2015 के प्रशिक्षण सत्र में होने वाले प्रवेशों को सम्मिलित करते हुये इनकी कुल प्रशिक्षण क्षमता 1,11,550 सीटों की है। फाइनेंशियल ईयर 2012-13 से 2014-15 तक प्रदेश की असेवित तहसीलों एवं विकास खण्डों में कुल 60 नये राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की गयी है, जिनमें से फाइनेंशियल ईयर 2012-13 में स्वीकृत 13 नये राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आगामी प्रशिक्षण सत्र अगस्त, 2015 से प्रशिक्षण हेतु क्रियाशील किया गया है। अवशेष 47 नये संस्थानों के भवन निर्माण की प्रगति के दृष्टिगत उनमें से 30 संस्थानों को प्रशिक्षण सत्र अगस्त, 2016 से क्रियाशील किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन समस्त संस्थानों के भवन निर्माण हेतु वर्तमान तक रु. 134.00 करोड़ की धनराशि जारी की गयी है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की प्रशिक्षण क्षमता में विस्तार के अन्र्तगत पिछले 02 वर्षों में कुल 46600 प्रशिक्षण सीटों की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया था, जिसके तहत कुल 42580 सीटों की वृद्धि कर ली गयी है। इस वृद्धि में नये संस्थानों की 6240 सीटें तथा पूर्व से संचालित संस्थानों की 36340 सीटें हैं। समस्त संस्थानों में वृद्धि हेतु वांछित निर्माण कार्य, मशीनें व उपकरणों का क्रय व उनकी स्थापना, पदों का सृजन, इत्यादि को भी पूर्ण कर लिया गया है। स्थापित संस्थानों में एन.सी.वी.टी. के नवीन मानकों के अनुसार 102 कार्यशालाओं तथा 116 थ्योरी कक्षों का निर्माण कराया गया है। इन समस्त संस्थानों में निर्माण कार्यों हेतु रु. 49.00 करोड़ तथा उपकरणों हेतु रु. 103.50 करोड़ की धनराशि जारी की गयी है। नये 13 संस्थानों में प्रशिक्षण कार्य प्रदान करने हेतु रु0 16.90 करोड़ की धनराशि उपकरणों के क्रय हेतु जारी की गयी है। प्रदेश सरकार द्वारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में संचालित 08 व्यवसाय यथा मैकेनिक रिपेयर एण्ड मेंटीनेंस ऑफ लाइट व्हीकल, मैकेनिक रेडियो एण्ड टी0वी0, मैकेनिक कन्ज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स, मैकेनिक कम्यूनिकेशन इक्यूपमेंट मेंटीनेंस, मैकेनिक कम ऑपरेटर इलेक्ट्रनिक कम्यूनिकेशन सिस्टम, प्लेट मेकर कम इम्पोजीटर, लीथो ऑफसेट माइन्डर तथा वीविंग ऑफ वुलेन फैब्रिक्स, जो कि अलोकप्रिय हो गये थे, को समाप्त कर उनके स्थान पर लोकप्रिय व रोजगारपरक व्यवसाय मैकेनिक मोटर साइकिल, इलेक्ट्रनिक मैकेनिक, कम्प्यूटर हार्डवेयर एण्ड नेटवर्क मेंटीनेंस तथा मैकेनिक कन्ज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स एप्लॉयन्सेज को खोला गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2015-16 में विभाग के आयोजनेत्तर पक्ष में आवंटित सम्पूर्ण बजट रु0 312.62 करोड़ को जारी कर दिया गया है। इसी प्रकार वर्तमान वित्तीय वर्ष 2015-16 के प्रारम्भ से वर्तमान तक आयोजनागत पक्ष के अन्र्तगत आवंटित कुल बजट रु0 453.10 करोड़ में से रु0 170.00 करोड़ की धनराशि को विकास कार्यों हेतु जारी कर दिया गया है।

बच्चों का बढ़ा इंतजार कोर्ट बन्दी के साथ थमीं उम्मीदें
लखनऊ। निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश पाने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि आरटीई के तहत प्रवेश के लिए कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। 31 बच्चे जिनका प्रवेश सीएमएस इन्दिरानगर को अपने यहां देना था उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर इनके प्रवेश को अधर में लटका दिया है। बीएसए की तरफ से नोटिस जारी करने के बाद अभी तक सीएमएस को स्टे ऑडर नहीं मिला है। कानून के तहत जब तक किसी मामले में स्टे ऑर्डर नहीं मिलता है तब तक किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जा सकती। सीएमएस ने न सिर्फ उन बच्चों के भविष्य को बल्कि कानून को भी खिलवाड़ बना रखा है। यूपी में अधिकतर स्कूलों ने आरटीई के तहत गरीब बच्चों का प्रवेश लिया है किन्तु सीएमएस ने इन बच्चों का प्रवेश लेना तो दूर इनके प्रवेश की उम्मीदों को कानूनी दांव में फसा दिया है। साथ ही जिन लोगों ने इन्हें कानून की मर्यादा बताने की कोशिश की तो उन्होंने उन्हें दोषी करार देते हुए इनके खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश हो रहा है। अवकाश के बाद कोर्ट बैठने पर इसका फैसला किया जायेगा। बच्चों को अब स्कूल जाने के लिए कोर्ट का फैसला आने तक का इंतजार करना पड़ेगा।

 

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