यूपी विधानसभा के कटघरे में 4 मार्च को खड़े होंगे पत्रकार

  1. मुजफ्फरनगर दंगे के स्टिंग आरोपी पत्रकारों को आज होना था विधानसभा में पेश, पत्रकारों ने मांगी कुछ और समय सीमा
  2. आज तक के स्टिंग ऑपरेशन को राजनेताओं ने बनाया मुद्दा
  3. पत्रकार संगठन के नेताओं ने कहा कि बड़ा दिल दिखाएं राजनेता और खत्म करें मामला
  4. देश भर के मीडिया संस्थानों की निगाह होगी यूपी विधानसभा के 4 मार्च के फैसले पर
  5. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए बड़ा संदेश लेकर आ सकता है यह फैसला

 संजय शर्मा
aaaaaa1111लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान आज तक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन ने देश भर में हंगामा मचा दिया था, मगर अब यही स्टिंग ऑपरेशन चैनल के लिए मुसीबत बन गया है। विधानसभा की जांच समिति ने पाया था कि यह स्टिंग ऑपरेशन फर्जी था और सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खान की छवि को बदनाम करने की कोशिश थी। इस जांच समिति की रिपोर्ट ने नेताओं को मीडिया पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया। विधानसभा में बहुमत के आधार पर दोषी पत्रकारों को विधानसभा में बुलाने और उन्हें दंडित करने की मांग की गयी। भाजपा के अलावा इस मुद्दे पर सभी दल एक जुट हो गए। पत्रकारों के लिए विधानसभा में एक अस्थायी कटघरा भी बना दिया गया। विधानसभा के इस कटघरे में जाने-माने पत्रकारों के खड़े होने की खबर ने देश भर के मीडिया संस्थानों में तहलका मचा दिया। आज विधानसभा शुरू होने से पहले पत्रकारों ने एक प्रार्थना पत्र दिया और कुछ समय और देने की मांग की। इस पत्र पर निर्णय के लिए विधानसभा में चर्चा चल रही है। जाहिर है कि एक स्टिंग ऑपरेशन अब मीडिया संस्थानों के लिए बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।
मुजफ्फरनगर दंगें के स्टिंग ऑपरेशन ने पूरे देश में तहलका मचा दिया था। इस स्टिंग ऑपरेशन में आजम खां के ऊपर उंगली उठाते हुए कहा गया था कि दंगे के आरोपियों को छुड़ाने में उनकी बहुत बड़ी भूमिका थी। देश भर के राजनेताओं ने इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद अखिलेश सरकार पर हमला बोल दिया था और आजम खां के इस्तीफे की मांग की थी। विधानसभा में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद आजम खां ने इस पर कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि अगर यह सिद्ध हो जाए कि उन्होंने किसी भी पुलिसकर्मी को दोषी लोगों को छोडऩे के लिए फोन किया था तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
इसके बाद विधायक सतीश कुमार निगम की अध्यक्षता में 7 विधायकों की समिति बनाकर इस मामले की जांच सौंपी गई थी। इस समिति ने 23 फरवरी को तीन सौ पचास पन्ने की रिपोर्ट पेश की, जिसमें समिति ने कहा था कि 17-18 सितंबर 2013 को किया गया न्यूज चैनल का स्टिंग ऑपरेशन फर्जी था। इस स्टिंग ऑपरेशन की रिपोर्ट के बाद यूपी विधानसभा में लगभग सभी पार्टियों के नेताओं ने एकजुट होकर मीडिया संस्थानों की कारगुजारियों पर हमला बोला। नेताओं ने कहा कि अब मीडिया हाउस बिजनेस हाउस बन गए हैं और पत्रकारिता के नाम पर ब्लैकमेलिंग की जा रही है। हालांकि भाजपा ने यह भी कहा कि उंगली सिर्फ आजम खां पर ही क्यों उठी। पत्रकारों को आज विधानसभा में पेश होना था। आज तक के यूपी हेड अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें अपनी बात कहने के लिए कुछ समय मांगा है। अब 4 मार्च को पत्रकार यूपी विधानसभा के कटघरे में खड़े होंगे।

मुझे पूरा भरोसा है कि यह मुद्दा अब निपट जाएगा। यूपी की विधानसभा की गौरवशाली परंपरा रही है। यहां के सभी पार्टियों के नेता मीडिया का पूरा सम्मान करते हैं।
-प्रांशु मिश्रा, अध्यक्ष
राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति

पत्रकारों को भी अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभानी चाहिए। हर कोई पत्रकारों पर भरोसा करता है। अगर कोई गलती हो गई है तो अच्छा हो कि सिर्फ चेतावनी देकर मामले को खत्म कर दिया जाए।
-ज्ञानेन्द्र शुक्ला
न्यूज वल्र्ड इंडिया

देश में अगर कभी भी लोकसभा या विधानसभा में ऐसा मामला सामने आया तो पत्रकारो के खेद व्यक्त करने पर उन्हें छोड़ दिया गया। 1954 में एक गंभीर मामले पर आरके करंजिया को भी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था।
-के विक्रम राव, अध्यक्ष श्रमजीवी पत्रकार यूनियन

फर्जी स्टिंग करने वालो के लिए चेतावनी होगा यह फैसला

देश भर के कई चैनल टीआरपी बटोरने के लिए फर्जी स्टिंग ऑपरेशन का सहारा ले रहे हैं। पिछले दिनों भी जेएनयू के छात्रों के नारों के साथ छेड़-छाड़ करके पूरे देश में तनाव फैला दिया गया। इस तरह के फर्जी स्टिंग ऑपरेशन से पूरी मीडिया की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं। देश की सबसे बड़ी मीडिया वेबसाइट भड़ास 4मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह का कहना है कि चिटफंड चलाने वाले, बिल्डर और ब्लैक मनी रखने वाले लोग चैनल खोल रहे हैं और मीडिया संस्थानों को पैसा कमाने का अड्डïा बनाते जा रहे हैं तो एक दिन पूरी मीडिया पर सवाल खड़े होने ही हैं। जाहिर है यह मीडिया संस्थानों के लिए बेहद संवदेनशील समय है।

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