यूपी में 44 लाख गरीबों को मिल रहा समाजवादी पेंशन योजना का लाभ

समाजवादी पेंशन योजना की सफलता से प्रदेश सरकार काफी उत्साहित है। इस योजना का लाभ सूबे के 44 लाख परिवारों को मिल रहा है। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का माध्यम मिल रहा है। इसलिए प्रदेश सरकार पार्टी नेताओं और अधिकारियों से मिले बेहतर फीडबैक के आधार पर आगामी वित्तीय वर्ष में लाभार्थी परिवारों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है।

Captureप्रभात तिवारी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में समाजवादी पेंशन योजना के अंतर्गत सूबे में 44 लाख 99 हजार 486 परिवारों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस योजना का लाभ अर्ह व्यक्तियों तक पहुंचाने में पूरा सरकारी अमला जुट गया है। अब तक 39 लाख 82 हजार 990 लाभार्थी परिवारों को समाजवादी पेंशन योजना के लिए चयनित किया जा चुका है। इसके साथ ही लाभार्थियों के खाते में सरकार की तरफ से निर्धारित 500 रुपये मासिक की धनराशि भेजी जा रही है। इसमें एक साल की धनराशि चार किश्तों में भेजी जा रही है। लाभार्थियों के खाते में एक बार में तीन महीने की धनराशि पहुंचायी जा रही है। इसके अलावा आवेदकों के सत्यापन की कार्रïवाई पूर्ण होने और जांच के बाद समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर अपडेट होने वाले विवरणों के अनुसार लाभार्थियों का नाम सूची में जोड़ा और घटाया भी जा रहा है। सूची में दर्ज नामों और खाता संख्या के अनुसार तीसरे महीने लाभार्थियों के खाते में 500 रुपये मासिक के हिसाब से 1500 रुपये भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से शिकायतें मिलने पर लाभार्थियों की जांच करवाने और उनका नाम सूची से हटवाने की कार्रवाई भी की जा रही है।

लाभार्थी परिवारों की संख्या में पांच लाख की बढ़ोत्तरी
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014-15 में समाजवादी पेंशन योजना की सफलता से उत्साहित होकर लाभार्थी परिवारों की संख्या में पांच लाख का इजाफा कर दिया। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2014-15 में 39 लाख 99 हजार 486 परिवारों के सापेक्ष चयनित लाभार्थी परिवारों की संख्या 33 लाख 13 हजार 506 थी। जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष यानी वर्ष 2015-16 में समाजवादी पेंशन योजना का लक्ष्य 44 लाख 99 हजार 486 परिवार निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के सापेक्ष चयनित लाभार्थी परिवारों की संख्या 39 लाख 82 हजार 990 है। इस योजना के अंतर्गत अकेले लखनऊ में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 54 हजार 264 परिवारों को लाभ मिल रहा है।

पेंशन की शर्तें
समाजवादी पेंशन योजना के अंतर्गत लाभ पाने वाले परिवारों के मुखिया के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। जो शिक्षा, साक्षरता एवं स्वास्थ्य से संबंधित हैं। इसमें लाभान्वित परिवार में 6-14 आयु वर्ग के बालक और बालिका अनिवार्य रूप से विद्यालय जाते हों। लाभान्वित परिवार के स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति आवश्यक होनी चाहिए, जो कुल कार्य दिवसों के 70 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए। समाजवादी पेंशन प्राप्त होने के पश्चात लाभान्वित परिवार में 15 वर्ष से अधिक उम्र के प्रत्येक सदस्य जो साक्षर नहीं हैं, उनको साक्षर होने के लिए साक्षरता मिशन के कार्यक्रम में नियमित रूप से सम्मिलित होना अनिवार्य होगा। लभान्वित परिवार के 5 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों का नियमित टीकाकरण कराया जाना आवश्यक होगा। लाभान्वित परिवार के 6-14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को वर्ष में कम से कम एक बार स्कूल में आयोजित होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण कराना आवश्यक होगा। इसके अलावा लाभान्वित परिवार में गर्भवती महिला का संस्थागत प्रसव कराया जाना आवश्यक होगा। इसी प्रकार बेसिक शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी पेंशनर्स से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। लाभान्वित परिवार में यदि कोई व्यक्ति 14-35 आयु वर्ग का है और अपना कौशल बढ़ाने का इच्छुक है, तो उसको कौशल विकास मिशन के अंतर्गत उसका चयन कर प्राथमिकता पर कौशल बढ़ाने की सुविधा प्रदान की जायेगी। इसका मकसद परिवार के आर्थिक उत्थान की व्यवस्था कराना है। इसके अलावा लाभान्वित परिवार का स्वास्थ्य बीमा कार्ड भी प्राथमिकता के आधार पर बनाया जायेगा ताकि संबंधित परिवार को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल सके।

लखनऊ में लाभार्थियों की स्थिति
राजधानी में समाजवादी पेंशन योजना का लाभ पाने वाले परिवारों की संख्या 54 हजार 264 है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत ब्लाकवार लाभार्थियों की सूची तैयार की गई है। इस सूची के अंतर्गत बीकेटी ब्लाक में लाभार्थी परिवारों की संख्या 5380, चिनहट ब्लाक में 1201 परिवार, गोसाईंगंज ब्लाक में 4363 परिवार, काकोरी ब्लाक में 3267 परिवार , माल ब्लाक में 4640 परिवार, मलिहाबाद ब्लाक में 3772 परिवार, मोहनलालगंज ब्लाक में 5497 परिवार और सरोजनीनगर ब्लाक में 4707 लाभार्थी परिवार हैं। इसी प्रकार शहरी क्षेत्र के अंतर्गत अमेठी में 140 परिवार, बीकेटी में 33 परिवार, गोसाईंगंज में 54 परिवार, इंटौजा में 176 परिवार, काकोरी में 175 परिवार, लखनऊ पूर्वी में 173 परिवार और लखनऊ पश्चिमी में 17793 परिवार, महोना में 121 परिवार, मलिहाबाद में 276 परिवार और नगराम में 2196 लाभार्थी परिवार हैं। इस तरह शहरी क्षेत्र में लाभार्थी परिवारों की कुल संख्या 21437 है। इस योजना का लाभ लेने वाला व्यक्ति पेंशन के संबंध में आनलाइन जानकारी भी प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही समाज कल्याण विभाग में लाभार्थी का मोबाइल नंबर दर्ज होने पर पेंशन आने की सूचना मोबाइल पर भी दी जाती है।

जनपद स्तरीय समितियों का गठन
समाजवादी पेंशन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शासन स्तर से समितियों का भी गठन किया गया है। इस समित में जिलाधिकारी (अध्यक्ष), मुख्य विकास अधिकारी (सदस्य सचिव), अपर जिलाधिकारी (सदस्य), नगर आयुक्त (सदस्य), जिला सूचना विज्ञान अधिकारी (सदस्य तकनीकी), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सदस्य), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (सदस्य), कोषाधिकारी (सदस्य), जिला समाज कल्याण अधिकारी (सदस्य) और समस्त उप जिलाधिकारी (सदस्य) शामिल होते हैं। इस योजना का क्रियान्वयन नियमानुसार करवाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी के पर्यवेक्षण में समस्त शासकीय दायित्वों का निर्वहन करते हैं। जिलाधिकारी समाजवादी पेंशन योजना का नियमित रूप से अनुश्रवण करता है। वह लाभार्थी परिवारों के चयन में धांधली या विवाद की शिकायत सामने आने पर समिति के सदस्यों के साथ बैठक करता है। इसके बाद सभी बिन्दुओं का गहनता से अध्ययन करता है, तब निर्णय लेता है।

लाभार्थियों के चयन का तरीका
समाजवादी पेंशन योजना के तहत लाभार्थियों का चयन ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत के माध्यम से और शहरी क्षेत्र में उपजिलाधिकारी या सिटी मैजिस्ट्रेट के माध्यम से किया जाता है। ग्राम पंचायत की तरफ से समाजवादी पेंशन योजना के अभ्यर्थियों का प्रस्ताव खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय के माध्यम से जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय को भेजा जाता है। इस प्रस्ताव का सत्यापन किया जाता है। इसमें अभ्यर्थी अर्ह पाये जाने पर प्रस्ताव को अनुमोदित कर शासन को भेज दिया जाता है। शासन स्तर से पेंशन के लाभार्थी को नियमानुसार पेंशन की धनराशि बैंक खाते में भेज दी जाती है। इस योजना के लाभार्थियों का सत्यापन तीन महीने बाद दोबारा भी कराया जाता है। इसका मकसद मृत और अपात्र व्यक्तियों की पहचान करना और पेंशन पाने वालों की सूची में बदलाव करना है।
इसके अलावा समाजवादी पेंशन योजना के तहत पात्रों के चयन की शर्तें निर्धारित की गई हैं। इसमें पेंशन के लिए आवेदन करने वाला अभ्यर्थी विधवा, विकलांग और वृद्धावस्था पेंशन का लाभार्थी न हो। प्रदेश सरकार की तरफ से संचालित योजनाओं के अंतर्गत बेरोजगारी भत्ता न लेता हो। परिवार में 0.5 हेक्टेयर सिंचित और 0.1 हेक्टेयर से अधिक असिंचित भूमि न हो। बुन्देलखण्ड, मिर्जापुर एवं सोनभद्र क्षेत्र में यह सीमा क्रमश: एक हेक्टेयर सिंचित और 2 हेक्टेअर असिंचित भूमि न होना निर्धारित किया गया है। परिवार में किसी भी प्रकार का मोटराइज्ड वाहन, मशीनीकृत कृषि उपकरण नहीं होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर परिवार में जीप, कार, थ्री व्हीलर, स्कूटर, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर, थ्रेसर और हारवेस्टर इत्यादि न हो। परिवार का कोई भी व्यक्ति सरकारी, गैस सरकारी, एनजीओ और निजी संगठनों में नियमित वेतन भोगी न हो। परिवार का कोई भी सदस्य आयकर दाता न हो। परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी या अर्ध सरकारी सेवा से रियायर होने के बाद पेंशन की सुविधा न ले रहा हो। इसमें भी अत्यधिक गरीब और पिछड़े परिवारों को वरीयता प्रदान करने का नियम है। शहरी क्षेत्र में भी समाजवादी पेंशन योजना के अभ्यर्थियों की पात्रता का नियम लगभग ऐसा ही है।

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