यूपी चुनाव को लेकर सियासी गलियारे में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

  • भाजपा, कांग्रेस और बसपा समर्थकों की तरफ से लगाए गए पोस्टर से गरमाया सियासी माहौल
  • बनारस, इलाहाबाद, कानपुर, हाथरस और गोरखपुर में लगाए जा चुके हैं विवादित पोस्टर

Captureप्रभात तिवारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गलियारे में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक दलों के लोग पोस्टर एवं बैनर के माध्यम से खुद को बेहतर और अन्य पार्टियों की कमियां गिनाने में जुट गए हैं। प्रदेश में होने वाली जनसभाओं के दौरान भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों के नेता जुबानी जंग लडऩे लगे हैं। इसलिए आम जनता को भी चुनाव जल्द होने की आहट मिल चुकी है। उसने भी अपने दिलो-दिमाग को टटोलने और हानि-लाभ का जोड़-तोड़ भिड़ाना शुरू कर दिया है।
यूपी में महीने भर पहले पोस्टर वार की शुरुआत बनारस से हुई। यहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या को पोस्टर में श्रीकृष्ण और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को यूपी का चीरहरण करने वाला दर्शाया गया था। इस पोस्टर को रुपेश कुमार ने लगवाया था, जिसमें मायावती, राहुल गांधी, आजम खां और ओवैसी को यूपी का चीरहरण करने वाला बताया गया था। इस पोस्टर पर जमकर बवाल हुआ और भाजपा ने रूपेश को पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद इलाहाबाद में सुभाष चौराहे पर कांग्रेस पार्टी के समर्थकों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधा और पोस्टर में लिखा गया कि चाय बेचने वाले केशव भैया, रहस्य पर से पर्दा हटाओ, करोड़पति बनने का राज तो बताओ। इसके अलावा अपराधियों और भ्रष्टाचारियों की भरमार 2017 में भाजपा का अंतिम संस्कार । इसी क्रम में कानपुर महानगर ईकाई की तरफ से कानपुर में कई जगह विवादित पोस्टर लगाए गए, जिसमें चाल चरित्र चेहरा तीन कैटेगरी बनाकर नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और केशव प्रसाद को निशाना बनाया गया था। इसमें केन्द्र सरकार पर जनता से झूठे वादे करने, गुजरात में फर्जी इनकाउंटर करने और आपराधिक छवि के व्यक्ति को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाने का आरोप लगाया गया था। इन सभी पोस्टरों का भाजपा के लोगों ने जबरदस्त विरोध किया और कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर 65 साल तक देश को बर्बाद करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।

नेताओं की जुबानी जंग
2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जुबानी जंग शुरू हो गई है। नीतीश कुमार के यूपी में शराब बंदी वाले बयान पर राजेन्द्र चौधरी और केसी त्यागी का बयान काफी दिनों तक चर्चा में रहा है, जिसमें राजेन्द्र चौधरी ने नीतीश कुमार के यूपी दौरे को लेकर सवाल खड़ा किया तो जदयू से केसी त्यागी ने सपा मुखिया की बिहार चुनाव के दौरान रैलियों में जाने को लेकर पलटवार शुरू कर दिया। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बयान जारी किया कि यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में हमारा मुकाबला केवल सपा से है। उनके इस बयान पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में हमारा किसी से मुकाबला नहीं है। हम दोबारा सरकार बनाएंगे। ऐसे में सियासी गलियारे में बहुत ही तेजी के साथ पोस्टर, बैनर के अलावा जनसभाओं में जुबानी जंग छिड़ चुकी है। ये जंग
चुनाव खत्म होने और नई सरकार बनने के महीने-दो महीने बाद तक जारी रहने की उम्मीद है।

गोरखपुर में भी योगी समर्थकों ने लगाया था विवादित पोस्टर

पूर्वांचल में कट्टर हिन्दूवादी छवि के नेता योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में भी विवादित पोस्टर लगे। यहां अब की बार योगी सरकार के पोस्टर लगाकर योगी को नायक और मायावती, अखिलेश यादव, राहुल और असदुद्दीन ओवैसी की फोटो को गधे के ऊपर चिपका कर भगाने की बातें कही गई थीं। इसके विरोध में गोरखपुर में कांग्रेस के समर्थकों ने भी विवादित पोस्टर छपवाया, जिसमें राहुल गांधी को पुलिस की वर्दी में जन रक्षक बताया गया। इस पोस्टर में अखिलेश यादव, मायावती, केशव प्रसाद और ओवैसी पर तमाम तरह के आरोप लगाये गये थे। इस पोस्टर विवाद में बसपा समर्थक भी पीछे नहीं रहे। बसपा समर्थकों ने हाथरस में 24 अप्रैल को बसपा सुप्रीमो को काली का अवतार बताया गया था। इसके साथ ही मनमोहन भागवत, नरेन्द्र मोदी और स्मृति ईरानी को काली के गुस्से का शिकार होता दिखाया गया था। इस पोस्टर को लेकर भाजपा समर्थकों ने बसपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बसपा नेताओं पर प्रदेश का माहौल बिगाडऩे का आरोप लगाया।

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