यूपीटीयू अब तक नहीं जारी कर सका रिजल्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। यूपीटीयू में जनवरी में हुई इंजीनियरिंग की परीक्षा का रिजल्ट अभी तक जारी नहीं किया गया है। विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षायें मंगलवार से शुरू हो चुकी हैं इसके बाद भी अब तक छात्रों को उनकी पिछली परीक्षा के परिणाम के विषय में नहीं पता है। विश्वविद्यालय की इस नीति पर छात्रों में आक्रोश है।
यूपीटीयू की विषम सेमेस्टर परीक्षाएं दिसम्बर और जनवरी के बीच हुई थी। प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में पढऩे वाले दस हजार से अधिक विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम अभी तक जारी नहीं किये जा सके हैं। जिन विद्यार्थियों के परिणाम घोषित किये भी गये हैं उनके अंक 40 प्रतिशत से भी कम हैं। विवि प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा छात्रों को उठाना पड़ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया से आक्रोशित छात्रों का कहना है कि प्रशासन किसी कार्य को लेकर संजीदा नहीं रहता। समय से कोई भी कार्य पूरा करने की वे कोई जरूरत नहीं समझते हैं फिर चाहे इससे छात्रों को कितनी दिक्कतों का सामना ही क्यों न करना पड़े। मंगवालर से परीक्षाएं शुरू की जा चुकी हैं लेकिन अभी तक छात्रों को अपने पुराने परीक्षा परीणाम के बारे में नहीं पता है। छात्रों का कहना है कि यदि हमारे पिछले पेपर में बैक आ गया होगा तो दिक्कत तो हम लोगों को ही उठानी पड़ेगी।
छात्र और कॉलेज दोनों जिम्मेदार
कुलपति ओंकार सिंह ने बताया कि परिणाम घोषित करने में देरी तो हुई है लेकिन विवि के साथ-साथ छात्र भी इसके जिम्मेदार हैं कुछ देरी तो छात्रों द्वारा दी गयी गलत जानकारियों से हुई है। कुछ के लिए हमारा कॉलेज प्रशासन भी जिम्मेदार है। अगली बार से इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न हो इसका पूरा ख्याल मैं रखूंगा।
अनियमित शिक्षकों के भरोसे यूपीटीयू की परीक्षायें
लखनऊ। यूपीटीयू साढ़े तीन लाख छात्रों की परीक्षायें अनियमित शिक्षकों के भरोसे हैं। इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट के छात्रों की परीक्षायें सकंट में हैं। विश्वविद्यालय ने अपने शिक्षकों को छुट्ïटी नहीं दी है। इसके कारण इस सेमेस्टर हो रही परीक्षाओं में शिक्षकों की ड्यूटी की समस्या उत्पन्न हो रही है। वहीं अधूरे कोर्स के बीच परीक्षा देने के लिए छात्र बाध्य हैं। अनियमित शिक्षकों का इंतजाम किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लापरवाही से क्रोधित शिक्षकों ने परीक्षा में ड्यूटी करने से इंकार कर दिया है। यह वह शिक्षक हैं जिन्हें अब तक एक भी अवकाश नहीं दिया गया है। विश्वविद्यालय से जुड़े सौ से अधिक कॉलेजों ने अपने शिक्षकों को छुट्ïटी नहीं दी है जिससे परीक्षा ड्यूटी के लिए आवश्यक शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। अब विश्वविद्यालय को परीक्षा कराने के लिए अब जुगाड़ के शिक्षकों पर निर्भर होना पड़ेगा। मंगलवार को शुरू हुई परीक्षा में अनियमित शिक्षक भी पूरी तरह नजर नहीं आये। परीक्षाओं के पहले दिन से परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। परीक्षा कक्ष को देख कर नहीं लग रहा था कि परीक्षायें चल रही हैं। छात्रों का आरोप था कि हमारे कोर्स भी पूरे नहीं हुए हैं, परीक्षा आ गयी है तो पेपर देना ही है। इस पूरे मामले की जानकारी पर परीक्षा नियंत्रक ने सबको फटकार लगाई और साथ ही सबको नोटिस जारी कर सभी सवालों के जवाब मांगे हैं।

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