युवा प्रतिभा और नवाचार से संवरेगा देश…

क्या हम अपने युवाओं को समाज के प्रति संवेदनशील बना पा रहे हैं? हमारे कॉलेज, शोध संस्थाएं और सरकार के कार्यक्रम क्या देश के युवाओं को इस तरफ खींच पा रहे हैं जो उन्हें नवाचार और नए शोध के लिए प्रेरित करे? आज विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारतीय मेधाओं पर गौर करें तो इसके जवाब तलाशे जा सकते हैं।

sanjay sharma editor5राष्टï्पति प्रणब मुखर्जी ने फेस्टिवल ऑफ इनोवेशन के मौके पर सही ही कहा कि समेकित विकास का लक्ष्य हासिल करने के लिए युवा प्रतिभाओं को देश की प्रमुख सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के रचनात्मक हल तलाशने होंगे। इसके लिए राष्टï्रपति ने युवाओं पर पूरा भरोसा जताया।
राष्टï्रपति भवन में एक सप्ताह तक चले ‘फेस्टिवल्स ऑफ इन्नोवेशन’ के समापन के मौके पर उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘भारत भले ही तकनीक के क्षेत्र में एक विशेष स्तर पर पहुंच गया हो, लेकिन जब तक युवा मस्तिष्क में प्रतिबद्धता, समर्पण, निष्ठा और संवेदनशीलता नहीं होगी, हमारे संविधान में दी गयी न्यायसंगत सामाजिक व्यवस्था पहुंच से बाहर ही रहेगी।’ महामहिम की यह सीख हमारे समाज के चौमुखी विकास के लिए जरूरी है। लेकिन इसके पीछे कई सवाल भी खड़े होते हैं, जैसे क्या क्या हमारी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था होनहारों की सही पहचान कर पा रही हैं। क्या हम अपने युवाओं को समाज के प्रति संवेदनशील बना पा रहे हैं? हमारे कॉलेज, शोध संस्थाएं और सरकार के कार्यक्रम क्या देश के युवाओं को इस तरफ खींच पा रहे हैं जो उन्हें नवाचार और नए शोध के लिए प्रेरित करे?
आज विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारतीय मेधाओं पर गौर करें तो इसके जवाब तलाशे जा सकते हैं। आखिर क्यों हमारी युवा प्रतिभाएं देश से बाहर जाकर उनके विकास में बेहतर योगदान कर रहे हैं, जबकि हमारे देश में खुद इन प्रतिभाओं की पूरी जरूरत है। जाहिर है, एक ऐसा देश जहां प्राथमिक स्तर के ज्यादातर स्कूलों में विज्ञान की प्रयोगशालाएं सपने जैसी हो तो नई इनोवेशन को लेकर सवाल उठने लाजिमी हैं। इसके लिए देश में माहौल बनाना होगा। हमें अपने शिक्षण संस्थाओं में व्यवस्था को बदलना होगा। शोध और विज्ञान को अपनी कक्षाओं में ज्यादा तरजीह देनी होगी। तभी जाकर भारत के खुद के समस्याओं का समाधान हो सकेगा। देश की खुद की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें अपने खुद के मॉडल और नवाचार बनाने होंगे।
प्रधानमंत्री ने ‘स्किल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे बहुचर्चित कार्यक्रमों इन नावाचारों को गति देते दिखाई देते हैं। लेकिन महज श्रम के लिहाज से तैयार किए गये युवा क्या बदलाव ला पाएंगे। इस पर सोचना होगा। हमें अपने शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाना होगा। इसके लिए बुनियादी शिक्षा और विश्वविद्यालयों को भी पूरी तरह से तैयार करना होगा। जिससे नयी सोच को पुष्पित और पल्लवित किया जा सके। इन नवाचारों के केंद्र हमारे शैक्षिक संस्थान ही होंगे। इसके लिए हमें अपने शिक्षा में अमूलचूल परिवर्तन करने होंगे।

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