युवाओं में बढ़ा खादी का के्रज

युवाओं को भा रहे हैं खादी के जैकेट, कुर्ता और शर्ट हर साल बढ़ रही है खादी की बिक्री

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। एक समय था कि खादी सिर्फ बड़े बुजुर्ग और राजनीति से संबंध रखने वाले लोग पहनते थे, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। वर्तमान में युवाओं को खादी के कपड़े आकर्षित कर रहे हैं। अब खादी बड़े-बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युवा भी पहन रहे हैं। खादी की शर्ट, जैकेट, कुर्ता युवाओं की पहली पंसद है। जिसका नतीजा है कि अब बाजार में डिजायनर खादी के कपड़ों की भरमार है। युवाओं को ध्यान में रखकर खादी के कपड़े डिजाइन किए जा रहे हैं। इसका परिणाम है कि खादी कपड़ों की बिक्री में साल दर साल बढ़ोत्तरी हो रही है।
एक वक्त था कि खादी के कपड़ों की मांग ज्यादा न होने की वजह से यह सिर्फ गांधी आश्रम में ही मिलते थे लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब तो बड़ी-बड़ी कंपनियां ब्राण्डेड खादी के कपड़े युवाओं को ध्यान में रखकर बना रही हैं और युवा इसे पंसद भी कर रहे हैं। खादी के कपड़ों की बिक्री में इजाफा हुआ है इसकी पुष्टिï गांधी आश्रम लखनऊ मुख्यालय के महामंत्री वीबी पाण्डेय भी करते हैं। श्री पाण्डेय कहते हैं कि बदलते वक्त के साथ खादी के कपड़ों की बिक्री में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। खासकर युवाओं में खादी कपड़ों के प्रति उत्साह देखते ही बनता है। अनुमान है कि साल 2016 में खादी कपड़ों की बिक्री 5 करोड़ के पार पहुंच जायेगी। खादी कपड़ों की बिक्री पर राज्य सरकार की ओर से 10 प्रतिशत तक टैक्स पर छूट दी जाती है। इसके आलावा केंद्र सरकार की ओर से खादी के विकास के लिए अनुदान दिया जाता है। वीबी पांडेय ने कहा कि जैसे-जैसे समय बदलता जा रहा है, खादी का स्वरूप भी बदला है।

खादी कपड़े पहनने के लाभ
दरअसल खादी कपड़े हर मौसम में अनुकूल होते हैं। जाड़ों में ये शरीर में गर्मी बनाये रखते हैं और गर्मियों में ठंडक की अनुभूति कराते हैं। इसलिए लोग इसे ज्यादा पंसद करते हैं। खादी की गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है।

पिछले चार सालों में गांधी आश्रम लखनऊ में खादी कपड़ों की बिक्री

वर्ष 2012 – 32 लाख
वर्ष 2013 – 1.50 करोड़
वर्ष 2014 – 2.50 करोड़
वर्ष 2015 – 4 करोड़

रेडीमेड सेल में हुई तेजी से बढ़ोत्तरी

खादी कपड़ों में 4 प्रकार होते हैं। मिल क्लॉथ, आउट लुंग, हैण्ड लूम, खादी। इनमें से रेडीमेड कपड़ों की बिक्री में तेजी से वृद्धि हुई है। 2015 में अभी तक इसका कारोबार एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। युवाओं की पसंद को देखते हुए गांधी आश्रम में यूथ कॉर्नर की शुरुआत की गयी है, जहां युवाओं की लंबी भीड़
लगी रहती है।

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