युवक कांग्रेस को मनमोहन की नसीहत

डॉ. हनुमंत यादव
दिल्ली में युवक कांग्रेस द्वारा गत 19 नवम्बर को स्वर्गीय इंदिरा गांधी की 98वीं जयन्ती के अवसर पर आयोजित सम्मेलन में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा योजना आयोग समाप्त कर दिए जाने के कारण देश की आर्थिक नीति दिशाहीन हो गई है। उनका कहना था कि आर्थिक नीतियों एवं विकास की दिशाहीनता का मुख्य कारण उस योजना आयोग का समाप्त किया जाना रहा है जिसने भारत सरीखे विविधतापूर्ण देश में योजनाबद्ध विकास की जरूरतें पूरी करने के लिए और अर्थव्यवस्था को गतिशील करने की सकारात्मक भूमिका अदा की। उनका कहना था कि देश के योजनाबद्ध विकास के लिए 65 साल पहले स्वर्गीय पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा योजना आयोग की स्थापना की गई थी तथा स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी का मानना था कि देश के विविध हिस्सों के विकास के लिए योजना आयोग मजबूत किया जाना जरूरी है इस प्रकार सरकार द्वारा योजना आयोग को समाप्त करने से देश का नुकसान हुआ है । डॉ. मनमोहन सिंह ने युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे अभियान चलाकर लोगों को बताएं कि योजना आयोग समाप्त करने का फैसला देश के लिए नुकसानदायक रहा है।
डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने उद्बोधन में यह नहीं बताया कि आम जनता को योजना आयोग के समाप्त करने से होने वाले नुकसान के बारे में कैसे समझाया जाय क्योंकि आर्थिक नीतियों एवं विकास की दिशाहीनता आम आदमी की समझ के बाहर है। आश्चर्य इस बात का भी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2014 को योजना आयोग को समाप्त करने के ऐलान के 15 महीने बाद वे युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सलाह दे रहे हैं। डॉ. मनमोहन सिंह युवक कांग्रेस को तो नसीहत दे रहे हैं किन्तु उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा के सदस्य के रूप में क्या उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। उन्हें स्मरण होगा कि राज्य सभा में एक लिखित सवाल के उत्तर में सरकार की ओर से केन्द्रीय योजना मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने 31 जुलाई 2014 को स्पष्ट रूप से कहा था कि सरकार के पास फिलहाल योजना आयोग को खतम करने या उसके मौजूदा स्वरूप में परिवर्तन करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि योजना आयोग को युक्तिसंगत बनाने या उसके ढांचे में बदलाव के बारे में सरकार सबसे पहले संसद को सूचित करेगी। एक पखवाड़ा भी नहीं बीत पाया था कि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देशवासियों के लिए दिए गए अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योजना मंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा 31 जुलाई को संसद में दिए गए बयान को झुठलाते हुए 64 साल पुराने योजना आयोग को समाप्त करने एवं उसके स्थान पर एक नए संस्थान की स्थापना के इरादे का ऐलान कर दिया गया। डॉ. मनमोहन सिंह राज्य सभा में सरकार की गलतबयानी का मुद्दा उठाने में असफल रहे। कांग्रेस पार्टी चाहती तो इस मुद्दे पर लोकसभा के कामकाज को ठप्प कर सरकार को बयान देने पर मजबूर कर सकती थी।
प्रधानमंत्री मोदी का कहना था कि सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए नीति आयोग की स्थापना की गई है तथा अब आर्थिक नीतियां एवं योजनाएं मुख्यमंत्रियों की सलाह से बनाई जाएंगी। डॉ. मनमोहन सिंह संसद एवं संसद के बाहर यह बताने में चूक गए कि योजना आयोग की सर्वोच्च निकाय राष्ट्रीय विकास परिषद है जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं। योजना आयोग द्वारा बनाई गई पंचवर्षीय योजनाओं के राष्ट्रीय विकास परिषद् द्वारा अनुमोदन के बाद ही योजना का क्रियान्वयन होता है। राष्ट्रीय विकास परिषद योजनाओं की मध्यावधि समीक्षा भी करती है। वैसे तो राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक साल में कम से कम एक बार होनी चाहिए किन्तु जरूरत पडऩे पर साल में कई बैठकें आयोजित की जा सकती हैं। बैठकों की अधिकतम सीमा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। राष्ट्रीय विकास परिषद जरूरत पडऩे पर मुख्यमंत्रियों के कार्यकारी समूह भी बना सकती थी। डॉ. मनमोहन सिंह योजना आयोग एवं राष्ट्रीय विकास परिषद के दस साल तक सभापति रहे किन्तु राज्य सभा तथा उसके बाहर सरकार द्वारा योजना आयोग को समाप्त कर नए संस्थान की स्थापना के लिए दिए गए तर्कों का जोरदार जवाब देने में विफल रहे। सहकारी संघवाद तो राष्ट्रीय विकास परिषद को मजबूत करके भी किया जा सकता था।
भारत के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अर्थशास्त्र के स्नातकोत्तर कक्षा में विकास एवं आर्थिक नियोजन एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। पहले दिन ही हम छात्रों को बताते हैं कि समयबद्ध आर्थिक विकास के लिए आर्थिक नियोजन पहली शर्त है तथा योजना बनाने, उसको देशभर में लागू करवाने, अनुश्रवण तथा समीक्षा करने के लिए एक केन्द्रीय प्राधिकरण की आवश्यकता होती है जिसे सोवियत संघ के समान भारत में भी योजना आयोग कहते हैं। छात्रों को योजना आयोग का महत्व एवं उपलब्धियों के बारे में बताया जाता है। यह भी पढ़़ाया जाता है कि राज्यों को अपनी राज्य योजना बनाने की पूरी आकाादी होती है तथा राज्य के मुख्यमंत्री के साथ योजना आयोग की उपाध्यक्ष की बैठक में राज्य योजना के लिए केन्द्रीय सामान्य, विशेष एवं अतिरिक्त सहायता राशि स्वीकृति होती है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योजना आयोग को समाप्त करने की चौंका देने वाली घोषणा के बाद विकास एवं आर्थिक नियोजन का अध्यापन करने वाले प्राध्यापकों के लिए छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देते नहीं बन पा रहा था।

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