यादव सिंह को बचाने की कोशिश

सीबीआई जांच से सरकार को तो शुरू से ही परहेज था, वो तो नूतन ठाकुर की पीआईएल थी जिस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिये। यादव सिंह की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब 28 नवंबर 2014 को आयकर विभाग ने उसके घर पर छापा मारा था।

sanjay sharma editor5आखिर नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और एक्सप्रेस वे हाइवे के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर ही लिया। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सरकार ने सीबीआई पर बिना मंजूरी के जांच का आरोप लगाया है। हाईकोर्ट ने 15 जुलाई को यादव सिंह के मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। आदेश के बाद सीबीआई यादव सिंह पर अपनी नकेल कसने लगी है। सीबीआई के चंगुल में यादव सिंह की गर्दन फंसी हुई है पर सांसें उत्तर प्रदेश सरकार की थम रही हंै। प्रदेश सरकार ने उसे बचाने के लिए सारे जतन कर डाले। जब से यह मामला प्रकाश में आया तभी से प्रदेश सरकार उसे बचाने की कोशिश में लगी हुई थी। इतना बड़ा मामला और सपा-बसपा के किसी नेता ने इस पर चूं तक नहीं की। जो मायावती छोटी-छोटी बातों को लेकर प्रदेश में राष्टï्रपति शासन की मांग करती हैं, उन्होंने इस मुद्दे पर बोलना भी जरूरी नहीं समझा।
सरकार को तो वैसे भी सांप सूंघ गया था। सीबीआई जांच से सरकार को तो शुरू से ही परहेज था, वो तो नूतन ठाकुर की पीआईएल थी जिस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिये। यादव सिंह की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब 28 नवंबर 2014 को आयकर विभाग ने उसके घर पर छापा मारा था। छापे के दौरान मिली अकूत सम्पत्ति देखकर अधिकारियों की आंखे खुली की खुली रह गईं थीं। 10 करोड़ रुपये नगद और दो किलो हीरे मौके से मिले। अकूत सम्पत्ति के मालिक यादव सिंह की राजनैतिक साठगांठ किसी से छिपी नहीं है। सरकार चाहे किसी की हो यादव सिंह सबका सिरमौर बना रहा। राजनैतिक गलियारों में अच्छी पकड़ की वजह से सदैव महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान रहा। दिन-प्रतिदिन उसकी बढ़ती काली कमाई से सभी वाकिफ थे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वजह साफ है कि उसने कई बड़े लोगों को भी फायदा पहुंचाया है। तभी तो बसपा, जो हर समय सपा सरकार के कार्यों का विरोध करती रहती है, इस मुद्दे पर सपा सरकार का मौन समर्थन कर रही है।
नूतन ठाकुर की पीआईएल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बीते 15 जुलाई को यादव सिंह की अकूत संपत्ति की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था। हाईकोर्ट ने यादव सिंह के राजनैतिक संबंधों की जांच के लिए भी कहा था। सीबीआई ने अपना काम शुरू कर दिया है। उसकी कोठी सील हो गई है। तमाम अहम दस्तावेज सीबीआई अपने कब्जे में ले चुकी है। इस मामले को लेकर राजनैतिक द्वंद भी छिड़ गया है। इसका सबसे बड़ा कारण है उत्तर प्रदेश का 2017 में विधानसभा चुनाव।

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