यादव सिंह को बचाते-बचाते खुद फंस गए रमा रमण

  • 4पीएम ने 10 महीने पहले ही छापा था कि आखिर रमा रमण को क्यों बचाया जा रहा है
  • हमारी खबर पर हाईकोर्ट की मोहर लगाई रमा रमण के काम करने पर रोक
  • यादव सिंह ने बांट दिए हजारों करोड़ के ठेके और रमा रमण खामोशी से देखते रहे
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश का काम देख रहे सपा के एक बड़े नेता के दुलारे हैं रमा रमण

संजय शर्मा
Captureलखनऊ। हमने दस महीने पहले ही छापा था कि यह संभव नहीं है कि जिस प्राधिकरण में एक आईएएस अफसर सीईओ हो और उसके नीचे एक मामूली इंजीनियर हजारों करोड़ के ठेकों की लूट कर रहा हो और सीईओ को इसकी जानकारी न हो। दरअसल तीन-तीन प्राधिकरण के सीईओ बनने के बाद रमा रमण ने उन सभी लोगों को भ्रष्टचार करने की खुली छूट दे दी जो किसी भी सूरत में बड़ा पैसा कमा सकते हैं। नतीजा यह हुआ है कि प्राधिकरण लूट का अड्डा  बन गया। अब हाईकोर्ट ने ना सिर्फ रमा रमण के काम करने पर रोक लगाई बल्कि तल्ख टिप्पणियां भी की हैं।
हैरानी की बात यह है कि हजारों करोड़ के घोटालों में नोएडा के अभियंता यादव सिंह को सीबीआई ने जेल भेज दिया। इतना सब होने के बावजूद रमा रमण का न तो तबादला किया गया और न ही उन पर हाथ डालने की हिम्मत सीबीआई की हुई।
यह रमा रमण का जादू ही था कि उन्हें मायावती ने नोएडा में तैनात किया था और सपा सरकार में भी उनका जलवा बरकरार रहा। वह नोएडा अॅथारिटी, ग्रेटर नोएडा अॅथारिटी और यमुना एक्सप्रेस वे में बतौर सीईओ काम कर रहे थे। नोएडा में उनका जलवा देखते ही बनता था। जब किसी को बड़ा प्लाट लेना होता था या फिर कोई बड़ा ठेका वह ऐसे लोगों को यादव सिंह के पास भेज देते थे और यादव सिंह बड़ी सफाई के साथ लंबी रकम लेकर उसका बंटवारा कर देता था।
जब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई तो जजों ने पूछा कि जब यादव सिंह और रामेन्द्र जैसे अफसरों पर घोटालों के आरोप हैं फिर भी छह सालों से यह अफसर क्यों जमें हुए हैं। कोर्ट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले बोर्ड को यह मामला सौंपते हुए पूछा है कि 20 जुलाई को वह बताएं कि इस मामले में उन्होंने क्या किया। अब देखना यह है कि रमा रमण के बुरे दिन शुरू होंगे या फिर पैसे के दम पर अपनी कुर्सी
बचा लेंगे।

नेताओं और अफसरों के करीबियों को यादव सिंह ने बांट दिए 13 हजार करोड़ के ठेके, रमा रमण देखते रहे… http://www.4pm.co.in/archive/4544

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