यादव सिंह के काले धंधे में नेताओं के साथ कई आईएएस अफसरों ने भी लगाए थे पैसे

यूपी की सियासत में मचने वाला है अब तक का सबसे बड़ा राजनैतिक भूचाल
यादव सिंह की डायरी में है राजनेताओं और आईएएस अफसरों की सूची
नेताओं के अलावा अफसरों से भी अरबों का लेन-देन किया था यादव सिंह ने

2017 के विधानसभा चुनाव की पटकथा का मुख्य सूत्रधार बनेगा यादव सिंह

E1संजय शर्मा
लखनऊ। यादव सिंह की पैसे की बरसात में सिर्फ नेता ही नहीं भीगे। एनआरएचएम घोटाले की तरह यूपी के आईएएस अफसरों ने भी इस बहती गंगा में हाथ धोने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सीबीआई ने भी तसल्ली से इन अफसरों की जन्म पत्री तैयार कर ली है। यादव सिंह की डायरी में भी इन चमचमाते आईएएस अफसरों के नाम दर्ज है। अगर सीबीआई राजनैतिक गुणा भाग के चक्कर में नहीं पड़ी तो इन आईएएस अफसरों की बची हुई नौकरी जेल में गुजरेगी।
जिस दिन यादव सिंह के घर पर छापा पड़ा था और उसकी गाडिय़ों में करोड़ों रुपए के हीरे और नगदी मिली थी। तभी तय हो गया था कि आने वाला समय यादव सिंह और उनके आकाओं की परेशानी बढ़ाने वाला है। उस समय यादव सिंह के पास एक डायरी मिली थी। इस डायरी में उसके और उसके आकाओं के गुनाहों का कच्चा चि_ïा था।
यह तय था कि अगर आयकर विभाग उस डायरी के नाम उजागर कर देता तो देश की राजनीति में तहलका मच जाता। मगर केन्द्र की सरकार ऐसी डायरियों का भरपूर इस्तेमाल करना जानती है। वह जानती है कि ऐसे नामों से क्षेत्रीय दलों पर किस तरह दबाव बनाया जाता है। लिहाजा इस डायरी से भी दबाव बनाया गया और सब जानते हैं कि बिहार में सपा ने चुनाव लडऩे का फैसला क्यों किया। बाद में इंडियन एक्सप्रेस में खुलासा भी कर दिया था कि यादव सिंह की कंपनी में सपा के महासचिव रामगोपाल यादव के पुत्र की भी पार्टनरशिप थी। मजे की बात यह है कि इससे पहले यादव सिंह बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई सिद्धार्थ की पार्टनरशिप को लेकर खासा चर्चा में थे। जाहिर है कि यादव सिंह के पैसे के खेल ने सपा और बसपा दोनों को एक ही तराजू में लाकर खड़ा कर दिया था और भाजपा यही चाहती थी।
अब यह मामला सीबीआई के पास पहुंचने के बाद यूपी विधानसभा चुनाव से 6 माह पहले इन गुनाहगारों की सूची सीबीआई अदालत के सामने पेश कर सकती है, जिसमें नेताओं के साथ-साथ गुनाहगार अफसर भी होंगे। भाजपा रणनीति बना रही है कि जनता में यह संदेश दिया जा सके कि क्षेत्रीय दल भ्रष्टïाचार में डूबे हैं, जाहिर है अगर ऐसा होता है तो इसके केन्द्र में यादव सिंह की दास्तान ही होगी।

रमा रमण पर अभी तक मेहरबानी
नोएडा विकास प्राधिकरण में बसपा सरकार में जिस समय यादव सिंह के घोटालों की पटकथा लिखनी शुरू की गई थी, उस वक्त वहां के सीईओ रमा रमण ही थे और जब सपा सरकार में भी यादव सिंह के घोटालों के कारनामे जारी रहे। तब भी वहां के सीईओ रमा रमण ही थे। बिना सीईओ के मर्जी के एक पत्ता भी नहीं हिलता। यादव सिंह की गिरफ्तारी हो गई मगर रमा रमण आज भी वहीं डटे हुए हैं।

सपा-बसपा दोनों गुनाहगार
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा है कि यादव सिंह को बचाने की सपा और बसपा दोनों ने पूरी कोशिशें की। पहले सीबीसीआईडी के डीजी जगमोहन यादव से क्लीन चिट दिलवाई और फिर बचाने को आयोग का गठन किया। मगर अब सच्चाई जनता के सामने आ ही जायेगी।

कठोरतम सजा मिले बेइमानों को
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता वैभव माहेश्वरी ने कहा कि जनता के खून पसीने की कमाई को अफसर और नेता किस तरह लूटते हैं यह यादव सिंह को देखकर समझा जा सकता है। सीबीआई को तोते की तरह इस्तेमाल करके इन दलों को ब्लैकमेल करने की जगह उन नेताओं को अफसरों पर कठोरतम कार्रवाई करनी चाहिए। जिनकी ब्लैकमनी यादव सिंह के यहां लगी है।

यादव सिंह को मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए
बसपा महासचिव और नेता विरोधी दल स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा है कि यादव सिंह को मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। जांच एजेंसियों को निष्पक्षता के साथ अपना काम करना चाहिए। मामला कोर्ट और सीबीआई के पास है लिहाजा भाजपा क्या मुद्दा बनाएगी यह वही जाने, मगर सीबीआई को ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए।

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