यात्रियों की सुरक्षा का मसला गंभीर

रेल से यात्रा करने वालों के साथ दुर्घटनाएं होना आम बात हो गई है। ट्रेन के स्लीपर कोच में बिना टिकट यात्रा करने वालों की भीड़ भी कम नहीं होती है। बिना टिकट और आरएसी या वेटिंग टिकट लेकर यात्रा करने वाले लोगों के बीच आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी छिपे होते हैं, जो बाकायदा रिजर्वेशन कराकर यात्रा करने वालों को डरा-धमका कर सीट देने के लिए मजबूर करते हैं।

sanjay sharma editor5ट्रेनों में लूट, डकैती और छेडख़ानी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सिकंदराबाद से गोरखपुर जा रही राप्ती सागर एक्सप्रेस को बदमाशों ने एक बार फिर अपना निशाना बनाया। ट्रेन में यात्रा कर रहे सीआरपीएफ के जवान और एक अन्य व्यापारी को लूटकर बदमाश फरार हो गये। ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात जीआरपी और आरएएफ के जवान कुंभकरणीय नींद में सोते रहे। उन्हें यात्रियों की चीख-पुकार बिल्कुल भी सुनाई नहीं दी।
रेल से यात्रा करने वालों के साथ दुर्घटनाएं होना आम बात हो गई है। ट्रेन के स्लीपर कोच में बिना टिकट यात्रा करने वालों की भीड़ भी कम नहीं होती है। बिना टिकट और आरएसी या वेटिंग टिकट लेकर यात्रा करने वाले लोगों के बीच आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी छिपे होते हैं, जो बाकायदा रिजर्वेशन कराकर यात्रा करने वालों को डरा-धमका कर सीट देने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे लोग अक्सर तीन से चार की संख्या में होते हैं। इसलिए सामान्य व्यक्ति लड़ाई-झगड़े के डर से मान जाते हैं लेकिन बहुत से लोग गलत ढंग से सीट हथियाने वालों से भिड़ जाते हैं। ऐसे लोगों के साथ ट्रेनों में अक्सर मारपीट और ट्रेन से बाहर फेंकने की घटनाएं होती रहती हैं। इसी प्रकार महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़छाड़, यात्रियों का सामान चुराने और डकैती की घटनाएं भी होती रहती है। जबकि सरकार की तरफ से ट्रेन से यात्रा करने वालों की सुरक्षा का जिम्मा जीआरपी और आरएएफ को सौंपा गया है। इसके बावजूद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जीआरपी और आरएएफ के जवान गंभीर नहीं है। लालापुर और पनकी स्टेशन के बीच राप्ती सागर एक्सप्रेस में लूट की घटना जीता-जागता प्रमाण है। आंकड़ों पर नजर डालें तो रेलवे स्टेशन और ट्रेन में दर्ज अपराधों की संख्या चौंकाने वाली है। वर्ष 2014 में 349 और 2015 में 457 आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। जबकि 2016 में 30 जून तक 253 मामले दर्ज हो चुके हैं। ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। इस बात से ट्रेनों में होने वाली आपराधिक घटनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ऐसे में रेल मंत्री सुरेश प्रभू को ट्रेनों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने, टैल्गो ट्रेन चलाने और भविष्य में बुलेट ट्रेन चलाने का सपना देखने की बजाय यात्रियों की सुरक्षा का खास प्रबंध करना होगा। इंसान टिकट लेकर आराम से अपनी सीट पर बैठकर बेखौफ होकर यात्रा कर सके, ऐसी सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करानी होगी। यात्रियों की एक शिकायत पर सुरक्षा जवान पहुंच सकें, जनता में ऐसा विश्वास पैदा करना होगा। यदि ऐसा करने में रेल मंत्री कामयाब नहीं होते हैं, तो उनकी सारी कोशिशों पर असुरक्षा भारी पड़ेगी।

Pin It