यह कैसी सजा है जिसमें देवेंद्र दुबे का कोई नुकसान नहीं

गाली देने के मामले में गाजीपुर थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर करने का मामलाCapture
वेतन में कोई कटौती नहीं, वर्दी पर कोई दाग नहीं

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आईजी नवनीत सिकेरा को गाली देने के मामले में जांच के दौरान दोषी पाये जाने पर एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने गाजीपुर थानाध्यक्ष देवेन्द्र दुबे को देर रात लाइन हाजिर कर दिया। लेकिन यह ऐसी सजा है जिसमें दुबे को किसी प्रकार का नुकसान नहीं है। न ही दुबे के वेतन से कोई कटौती होगी और न ही उसकी वर्दी पर कोई दाग लगा। आईजी को गाली देने का मामला हवा में आया और हवा में ही चला गया। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लाइन हाजिर कर अधिकारियों ने अपना पीछा छुड़ा लिया।
बता दें कि थानाध्यक्ष के पद पर रहते हुये किसी भी दारोगा को वेतन के अलावा सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 90 रुपये अधिक मिलता है। यदि उस थाने पर एसएसआई की तैनाती यदि होती है या एसएसआई होता है तो यह 90 रुपये भी थानाध्यक्ष को नहीं मिलता है। गाजीपुर थाने पर एसएसआई की तैनाती होती है। ऐसे में किसी भी दारोगा को यदि चार्ज मिलता है तो उसे कोई अधिक पैसा नहीं मिलता है। सिर्फ उसका वेतन ही मिलता है। ऐसे में चापलूस दारोगा चार्ज के लिये परेशान रहते है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चार्ज मिलने के बाद 90 रुपये के जगह पर दारोगा को प्रतिमाह अवैध वसूली से लाखों रुपये मिलते है। जो सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं होता है। इसी रुपये की लालच में दारोगा थाने का चार्ज लेने के लिये उतावले रहते है। गौर करें तो देवेंद्र दुबे को लाइन हाजिर करने से उसका कोई नुकसान नहीं हो रहा है। दुबे का जो वेतन था वहीं रहेगा। ऐसी सजा मिलना आखिरकार किस काम का है जिससे कोई नुकसान नहीं है। नुकसान होने पर ही गलती करने वाला व्यक्ति भविष्य में ऐसी गलती दोहराने का साहस नहीं कर पाता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि लाइन हाजिर होने की सूचना मिलने पर दुबे यह कहते हुये सुना गया कि एक माह के अंदर जहां बहाल होगा वहीं वह राजधानी में ही थाने का चार्ज भी लेगा।

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