यहां रुपये गिनवाने के लिए भी देने पड़ते हैं रुपये

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। शहर की जानी मानी प्राइवेट यूनिवर्सिटी बाबू बनारसी दास में हर छोटे-बड़े व मुश्किल काम भी बड़ी सरलता से हो जाते हैं। बस उसकी एक ही शर्त है कि जेबें भरी होनी चाहिए। सभी काम की कीमत छात्रों को चुकानी पड़ती है। काम कोई भी हो चाहे वह असमय छात्रों से प्रवेश के लिए शुल्क के अतिरिक्त डोनेशन के नाम पर लाखों रुपये हो या फीस के पैसों कि गिनती करानी हो।
यूनिवर्सिटी में एमबीए, आईटी, बीटेक, बीबीए, एमबीए ,बीडीएस, नर्सिग, मासकॉम, के अतिरिक्त कई प्रोफेशनल कोर्स कराए जाते हैं। इसमें प्रवेश लेने के लिए कई जिलों से स्टूडेंट आते हैं लेकिन यहां के अनोखे नियमों से सभी हैरान परेशान हैं। असमय यहां डोनेशन के दम पर किसी भी समय प्रवेश मिल जाता है। एक्टिविटी के नाम पर या फिर एटेण्डेंस शॉर्ट होने पर भी पैसा देना पड़ता है। हद तो तब हो गयी जब छात्रों एंव उनके अभिभावकों को फीस के पैसे देने पर उनकी गिनती के लिए भी अपनी जेबें ढीली करनी पड़ीं। छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब हम काउन्टर पर फीस जमा करने गये तो शुल्क के अलावा कैशियर ने दो हजार रुपये और मांगे, यहां फीस के पैसे की गिनती के अलग से एक से दो हजार रुपये लगते हैं। वहीं बीबीए के एक छात्र ने कहा कि जब मेरे पिता फीस जमा करने गये तो वह केवल निर्धारित रुपयेे ही लाए थे। इस नियम की पूर्ति न कर पाने पर उन्हें बिना फीस जमा किए ही लौटना पड़ा था। एमबीए की एक छात्रा ने बताया कि यहां 100 के नोटों जमा करने पर उसकी गिनती के दो हजार और 500 की नोटों पर 1000 हजार रुपये लिये जाते हैं।

जिसकी कोई रसीद भी नहीं दी जाती है। मजबूरी मे छात्रों एंव उनके माता-पिता को ये पैसे देने पड़ते है।
छात्रों ने यह भी बताया कि इस अनोखे कानून के कारण छात्रों एवं उनके गर्जियन को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है क्योकि बीबीडी मे लगभग 80 प्रतिशत विधार्थिय दूर दराज शहरों से आकर यहां पढ़ते है। ऐसी स्थिति में किसी से मदद की कोई उम्मीद भी नही होती। इस कारण अक्सर ही शुल्क काउन्टर पर बहस होती रहती है। इस सम्बन्ध में कई बार छात्रों और उनके अभिभवकों ने कालेज प्रशासन से सवाल भी किया किन्तु कोई सही जवाब हाथ नही आया। मध्यम वर्गीय छात्रों को इन से खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्रों का आरोप है कि कालेज कि कार्य प्रणाली को देखने के बाद सोचने वाला विषय यह है कि जिस नोट गिनने वाली मशिन के जरिए बैकों में लाखों करोड़ो कि गिनती पल भर मे होती है। वह मशिन बीबीडी मे हजारों कि गिनती करने में असर्मथ है। या फिर यूनिर्वसिटी ने अवैध कमाई करने का एक नया तरिका निकाल रखा है।

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