मौत पर सियासत

यह सौ फीसदी सच है कि रोहित के साथ गलत हुआ। एक होनहार छात्र का इस तरह व्यवस्था से दुखी होकर इतना बड़ा कदम उठाना अनेक सवाल खड़ा करता है। रोहित को न्याय मिलना ही चाहिए लेकिन किसी की मौत पर सियासत कर देश का माहौल बिगाडऩा कहीं से ठीक नहीं है।

sanjay sharma editor5हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला के खुदकुशी मामले पर जबर्दस्त राजनीति हो रही है। इस घटना को हुए एक पखवारा हो गया। इतना लंबा वक्त गुजरने के बाद होना यह चाहिए था कि इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर व्यवस्था दुरुस्त करने की कोशिश होनी चाहिए थी लेकिन जिस तरीके से राजनीतिक दल इस मामले को तूल देकर देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं, वह कतई ठीक नहीं है। रोहित वेमुला की मौत पर कांग्रेस खूब सियासत कर रही है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह से बयानबाजी कर रहे हैं उससे तो यह प्रतीत हो रहा है कि जैसे कांग्रेस के शासनकाल में दलितों के साथ कभी कुछ बुरा हुआ ही नहीं।
रोहित ने जिस दिन खुदकुशी की थी उस दिन भी राहुल गांधी हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी गए थे और शनिवार को फिर हैदराबाद पहुंचकर छात्रों के साथ राहुल वेमुला को न्याय दिलाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए। राहुल ने ट्वीट में कहा, ‘सपनों और महत्वाकांक्षाओं से भरा एक युवा जीवन संक्षिप्त हो गया। हम यह उसे, महात्मा गांधी की स्मृति को और हर उस भारतीय छात्र को समर्पित करते हैं जो पक्षपात और अन्याय से मुक्त भारत का सपना देखता है।’ यह सौ फीसदी सच है कि रोहित के साथ गलत हुआ। एक होनहार छात्र का इस तरह व्यवस्था से दुखी होकर इतना बड़ा कदम उठाना अनेक सवाल खड़ा करता है। रोहित को न्याय मिलना ही चाहिए लेकिन किसी की मौत पर सियासत कर देश का माहौल बिगाडऩा कहीं से ठीक नहीं है।
राहुल गांधी लगातार केन्द्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनके हिसाब से एनडीए के शासनकाल में दलित सुरक्षित नहीं है। जबकि सच्चाई यह है केन्द्र में शासन किसी भी राजनीतिक पार्टी का हो, दलितों के साथ हमेशा अन्याय हुआ है। राष्टï्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक साल 2014 में दलितों के खिलाफ 47064 अपराध हुए थे। मतलब औसतन हर घंटे पांच से ज्यादा (5.3)दलितों के खिलाफ अपराध हुए। अपराधों की गंभीरता को देखें तो इस दौरान हर दिन दो दलितों की हत्या हुई और हर दिन औसतन छह दलित महिलाएं (6.17) बलात्कार की शिकार हुईं। अगर यूपीए-एक और यूपीए-दो के दस सालों के शासन के दौरान दलित उत्पीडऩ की घटनाओं पर नजर दौड़ाएं, तो कांग्रेस को खुद पर सोचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसलिए राजनीतिक दल बयानबाजी करने के बजाय काम पर ध्यान दें तो देश तरक्की करेगा और लोग अमन-चैन से रहेंगे।

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