मौत का रास्ता बना सिविल का गेट

– रोहित सिंह
Captureलखनऊ। सिविल अस्पताल का मेन गेट अस्पताल में एंबुलेंस से आने वाले मरीजों के लिए मौत के रास्ते से कम नहीं है। अस्पताल में भारी भीड़ और आने-जाने वाले मरीजों और तीमारदारों के वाहनों की भारी संख्या से अस्पताल में एंबुलेंस मेन गेट में बुरी तरह से फंस जाती है। जिससे गंभीर मरीजों को अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचने में समय लग जाता है। कभी-कभी तो हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि मरीज की जान पर खतरा मंडराने लगता है।
अस्पताल शहर के केंद्र हजरतगंज में होने के कारण यहां मरीजों की लंबी भीड़ होती है। यहां की ओपीडी में प्रतिदिन दो से ढाई हजार की होती है। 456 बेड के इस अस्पताल में मरीजों की लंबी भीड़ से अस्पताल खचाखच भर जाता है। मेन गेट तक वाहनों के खड़े हो जाने से अस्पताल में घुसना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल में जगह की कमी के चलते पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। जिससे वाहनों को एक व्यवस्था के अनुरूप खड़ा करवाना मुश्किल है। जिससे खासकर एंबुलेंस से आने वाले गंभीर मरीजों को अपनी जान हथेली पर रखकर इलाज कराना पड़ता है। कई बार तो गेट से निकलने में लोगों में विवाद हो जाता है। यह स्थिति अक्सर अस्पताल में छुट्ïटी के एक दिन बाद पैदा हो जाती है। समस्या का एक और कारण है कि अस्पताल का मेन गेट और इमरजेंसी तक पहुंचने का रास्ता एक ही है। जिसके चलते दिक्कतें और भी बढ़ जाती हैं। अस्पताल के पीछे की ओर का गेट ज्यादातर बंद रहता है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए सिविल के पूूर्व सीएमएस डॉ एस के हसन ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव में सिविल अस्पताल और सूचना विभाग की दीवार तोडक़र एक में मिलाये जाने की बात कही गई थी। ताकि वाहनों को खड़ा करने के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की जा सके। जिससे मरीजों को इस गंभीर समस्या से निजात मिल सके। लेकिन शासन की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार का जबाब नहीं आया है।

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