मोहनलालगंज गैंगरेप के मामले में आज भी बरकरार है रहस्य

एक गार्ड के ऊपर ही पुलिस ने थोप दिये सारे अपराध

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मोहनलालगंज कोतवाली क्षेत्र में एक वर्ष पूर्व गैंगरेप कर बेरहमी से हत्या करने के मामले में एक वर्ष बाद भी लोगों के अंदर संशय बरकरार है। इस घटना का पर्दाफाश होने के बाद भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है। पुलिस के पर्दाफाश में सिर्फ एक गार्ड ही घटना के पीछे पाया गया था, जबकि मौके पर मौजूद लोगों ने साफ तौर पर कहा था कि पीडि़ता के साथ घटना को अंजाम देने में कई अन्य लोग शामिल रहे होंगे। इस मामलेमें पुलिस की जमकर किरकिरी हुई थी। इस मामले में एक वर्ष बाद एडीजी सुतापा सान्याल ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि उन्होंने जांच नहीं की थी, जबकि मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर जांच के लिए सुतापा सान्याल को कहा था।
17 जुलाई 2014 की सुबह मोहनलागंज के बलसिंह खेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में एक निर्वस्त्र महिला की लाश मिली थी। पूरे स्कूल परिसर में खून बिखरा पड़ा था। घटना स्थल का नजारा बयां कर रहा था कि किस तरह से दरिंदों ने उसके साथ हैवानियत की होगी। आरोप थे कि महिला के साथ गैंगरेप कर बेरहमी से उसे मारा गया। उसके गुप्तांग में लोहे की रॉड से वार किए गए थे, जबकि शरीर को चाकू से गोद दिया गया था। अगले दिन महिला की शिनाख्त देवरिया की रहने वाली महिला के रूप में हुई थी। महिला पीजीआई इलाके में रहकर पीजीआई हॉस्पिटल में नौकरी करती थी। उसके साथ उसके दो बच्चे भी रहते थे। पुलिस मामले की जांच में जुटी तभी उसे जानकारी मिली थी कि घटना वाली रात राजीव नाम के व्यक्ति ने महिला को फोन कर बुलाया था। जिसके बाद उसके साथ हैवानियत हुई। वहीं पूछताछ मेंं मृतका के बच्चों का कहना था कि राजीव घर आते थे। पुलिस ने मृतका के घर ही पास में एक निर्माणाधीन इमारत में गार्ड का काम करने वाले बलसिंह खेड़ा गांव निवासी रामसेवक को हत्याकांड का अभियुक्त बनाकर जेल भेज दिया था लेकिन इस मामले में कई ऐसे पहलू थे जिनके सवाल आज भी जवाब ढूंढ रहे हैं।

नहीं मिला मोबाइल फोन, राजीव के बारे में भी नहीं बता पाई पुलिस

एक साल बाद भी पुलिस मृतका का मोबाइल फोन तक तलाश नहीं कर सकीहै। जबकि इस फोन में कई ऐसे सबूत थे जो इस हत्याकांड की असल कहानी बयां कर देते। पुलिस सिर्फ यही कहती रही कि गार्ड राम सेवक राजीव बनकर बात करता था। लेकिन राजीव कौन है पुलिस इसकी जानकारी नहीं दे सकी थी। जबकि मृतका के बच्चों का कहना था कि राजीव अंकल घर आते थे और फोन पर बातचीत करते थे। सूत्रों का कहना था कि पुलिस ने गार्ड राम सेवक को अभियुक्त बनाने के लिए उसके बेटे को पकड़ कर कोतवाली लेकर आई थी। करीब एक सप्ताह तक उसे चोरी छिपे कहीं रखा था और रामसेवक पर जुर्म कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा था।

किडनी के मामले का भी नहीं हुआ पर्दाफाश
मृतका की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसकी दोनों किडनी सुरक्षित बताई गई थी, जबकि लिखा पढ़ी में महिला ने पीजीआई हास्पिटल में ही अपनी एक किडनी पति को दी थी। लेकिन इसके बाद भी उसके पति की मौत हो गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि मृतका ने किडनी डोनेट की थी तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दो किडनी कैसे निकली।

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