मोदी सरकार के दो साल

मोदी सरकार का सत्ता में आना किसी चमत्कार सरीखे था। क्योंकि मोदी एक ब्रांड के तौर पर उभर कर सामने आए और उन्हीं के भरोसे लोकसभा चुनाव लड़ा गया। चुनाव परिणाम भी उम्मीद से बेहतर दिखा। नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के चुनावों में किसी चतुर पेशेवर की तरह पहले से स्थापित ब्रांड को खत्म किया।

sanjay sharma editor5मोदी सरकार के कार्यकाल को दो साल पूरे हो गए। इस उपलक्ष्य में मोदी सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है। किसी भी सरकार के पास गिनाने के लिए अनगिनत उपलब्धियां होती हैं और विपक्षी दलों के पास उन उपलब्धियों को खारिज करने के उतने ही तर्क होते हैं। लेकिन असली सच्चाई जनता ही बता सकती है। क्योंकि सरकारी योजनाओं का लाभ जनता को मिलता है। इसलिए उससे बेहतर आंकलन कोई नहीं कर सकता। सरकार द्वारा किए गए अच्छे और बुरे कार्यों का हिसाब किताब चुनाव में जनता कर देती है। उपलब्धियां गिनाने से जनता वोट नहीं देती, नहीं तो गिनाने वाली उपलब्धियां छह साल के शासन के बाद वाजपेयी सरकार के पास भी थीं और दस साल के शासन के बाद मनमोहन सिंह सरकार के पास भी थीं, लेकिन दोनों सरकारों की उपलब्धियों को जनता ने खारिज कर दिया। नतीजतन दोनों ही सत्ता से बाहर हो गईं।
मोदी सरकार का सत्ता में आना किसी चमत्कार सरीखे था। क्योंकि मोदी एक ब्रांड के तौर पर उभर कर सामने आए और उन्हीं के भरोसे लोकसभा चुनाव लड़ा गया। चुनाव परिणाम भी उम्मीद से बेहतर दिखा। नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के चुनावों में किसी चतुर पेशेवर की तरह पहले से स्थापित ब्रांड को खत्म किया। उन्होंने भारतीय राजनीति के सबसे बड़े ब्रांड नेहरू-गांधी परिवार के खिलाफ जमकर प्रचार किया और समाज के एक बड़े हिस्से में इस ब्रांड की महत्ता को धराशाई ही कर दिया। उनके नकारात्मक प्रचार ने मनमोहन सिंह की छवि को एक भले आदमी से नाकाम आदमी में बदल दिया। फिर इस ध्वस्त ब्रांड का स्थान भरने के लिए उन्होंने अपनी एक सकारात्मक छवि चमकाई। अपनी छवि चमकाने के लिए नरेंद्र मोदी ने ‘अच्छे दिन’,‘भ्रष्टाचार से मुक्तसरकार’, ‘काले धन की विदेशों से वापसी’ से लेकर ‘गुजरात मॉडल’और ‘मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिम गवर्नेंस’ जैसे कई लुभाने वाले नारे दिए। पाकिस्तान को सबक सिखाने और अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को देश से रूखसत करने जैसे कई असंभव वादे भी किये गये। कुल मिलाकर ऐसा बताया गया कि देश को एक मसीहा मिल गया है जो सबकी समस्याओं का समाधान चुटकियों में कर देगा। उस समय तो सब ठीक रहा लेकिन सत्ता संभालने के बाद जब वादे धरातल पर नहीं दिखे तो टिप्पणियां होना स्वाभाविक था। आज भी विपक्षी उन्हीं सब मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधते रहते है। जनता के पास अभी मौन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मोदी सरकार अपनी उपलब्धियों को गिना रही है। उपलब्धियों के गिनाने के साथ-साथ सरकार को इस अवसर पर पिछली कमियों का भी मंथन कर लेना चाहिए। क्योंकि जनता जब जवाब देती है तो बड़ी से बड़ी राजनीतिक पार्टियां गर्त में चली जाती है। उदाहरण के लिए कांग्रेस का हाल देख सकते हैं।

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