‘मोदी वापस जाओ’ के नारों ने बिगाड़ा भाजपा का जायका

दलित वोटों को लुभाने की कोशिशों को लगा करारा झटका
विपक्ष ने कहा दलित समुदाय जानता है कि भाजपा है दलित विरोधी
हैदराबाद में दलित छात्र की मौत के मामले में आज वामदलों ने किया हजरतगंज में प्रदर्शन

R 14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी अपने स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी की लखनऊ यात्रा को लेकर दलितों को लुभाने की जो रणनीति बना रही थी, वह अंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्रों के मोदी वापस जाओ के नारे ने तार-तार कर दिया। देश में यह पहला मौका है जब किसी विश्वविद्यालय में मोदी वापस जाओ के नारे लगे हैं। भाजपा के लिए चिंता की बात यह भी है कि यह नारे अंबेडकर विश्वविद्यालय में लगे हैं। विपक्ष इस हंगामे से खासा खुश है और वह कह रहा है कि अब साफ हो गया है कि भाजपा दलितों के नाम पर सिर्फ नाटक करती है।
यूपी में दलित समुदाय के 24 प्रतिशत वोटों के लिए सभी पार्टियों में घमासान चल रहा है। भाजपा की निगाह भी इसी दलित समुदाय पर लगी है। भाजपा जानती है कि अगर लोकसभा की तरह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी दलितों ने भाजपा का साथ दे दिया तो उसे विधानसभा में भारी फायदा हो सकता है।
भाजपा मान रही थी कि उसके स्टार प्रचारक मोदी लखनऊ में दलित समुदाय में एक बड़ा संदेश छोड़ देंगे इसीलिए अंबेडकर विश्वविद्यालय के अलावा अंबेडकर महासभा में भी पीएम मोदी का कार्यक्रम रखवाया गया था। मगर हैदराबाद में दलित छात्र की मौत से नाराज छात्रों ने कल पीएम के सामने नारे बाजी करके माहौल बिगाड़ दिया।
इससे पहले दलित समुदाय को संदेश देने के लिए पीएम मोदी ने कोई कसर भी नहीं छोड़ी। हैदराबाद के दलित छात्र रोहित की मौत के छठे दिन पहली बार पीएम मोदी ने उस पर बोला। न सिर्फ बोला बल्कि उनका गला भी रूंध गया, जिस छात्र की मौत को लेकर पूरे देश में हंगामा चल रहा है उस पर 6 दिन तक पीएम मोदी की चुप्पी यूं ही नहीं रही। दरअसल इसका भी रणनीति के तौर पर पीएम फायदा उठाना चाहते थे।
इस दलित छात्र की मौत को लेकर देश भर में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी पर निशाना साधा जा रहा है। भाजपा जानती है कि अगर यह आंदोलन जारी रहा तो दलितों में इसके खराब नतीजे जायेंगे, लिहाजा पीएम मोदी ने तय किया कि इस छात्र की मौत पर पहली बार अंबेडकर विश्वविद्यालय में बाबा साहेब अंबेडकर की तारीफ करते हुए ही बोला जाए, इससे एक तीर से दो शिकार हो जायेंगे। दलितों में अच्छा संदेश भी जाएगा और मृत छात्र के प्रति उनकी संवेदना भी जाहिर हो जाएगी, मगर प्रधानमंत्री के सामने छात्रों में नारे बाजी करके पूरा माहौल बिगाड़ दिया।
इस नारेबाजी के राजनैतिक नतीजे भी दिखने भी शुरू हो गए। आज वामदलों ने हजरतगंज में प्रदर्शन किया और पैदल मार्च निकाला। रिहाई मंच आज उन नौजवनों को सम्मानित कर रहा है, जिन्होंने कल पीएम के सामने नारेबाजी की थी। जाहिर है कि भाजपा को अब एक और बार यह साबित करने की चुनौती होगी कि वह दलित हितों की सोचती है।
देश भर के दलित मोदी सरकार से नाराज हैं। जिस तरह का कृत्य स्मृति ईरानी और बंडारू दत्तात्रेय ने किया है। वह अक्षम्य है। इसी वजह से लखनऊ में मोदी गो बैक के नारे लगे और विरोध प्रदर्शन किया गया। ऐसा करके जनता ने मोदी को संकेत दे दिया है कि वह छलावे की राजनीति में विश्वास नहीं करती है।
-सत्यदेव त्रिपाठी, वरिष्ठ नेता, कांग्रेस

एक तरफ पीएम मोदी हैदराबाद के छात्र की मौत के 6 दिन बाद राजनैतिक नाटक कर रहे थे उसी समय सिर्फ उनके सामने विरोध प्रदर्शन करने पर छात्रों को हिरासत में ले लिया गया। इस घटना से साबित हो गया कि भाजपा का लोकतंत्र में भरोसा नहीं है। आप इस दोहरे चरित्र का हर स्तर पर विरोध करेगी
-वैभव महेश्वरी, प्रवक्ता आम आदमी पार्टी

रोहित बेमुला प्रकरण दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचार का जीता जागता नमूना है। इसीलिए दलितों के उत्पीडऩ से आहत लोगों ने लखनऊ में नरेन्द्र मोदी गो बैक के नारे लगाये। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को समझ जाना चाहिए कि
दलितों के नाम पर घडिय़ाली आंसू बहाने से कुछ हासिल नहीं होगा।

-स्वामी प्रसाद मौर्या, बसपा
लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। मगर तहजीब के शहर लखनऊ में प्रधानमंत्री के सामने जिस तरह से यह विरोध हुआ वह उचित नहीं था। प्रधानमंत्री जी को जैसे ही छात्रों के हिरासत में लिये जाने की खबर मिली तत्काल उनके कार्यालय ने रिहा करने को कहा।
-मनीष शुक्ला, प्रवक्ता, बीजेपी

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