मोदी जी बातें नहीं अब काम कीजिये…

जिस तरह आज यूपी के किसान मायूस हैं वैसा ही हाल बनारस के घाटों का है। बनारस के घट भी सूने हैं। किसी भी घाट का न तो पूरी तरह सौंदर्यीकरण हुआ और न ही विकास की वैसी योजनायें शुरू हुईं जैसा कि मोदी जी ने कहा था। अब यह मायूसी लगातार बढ़ रही है और साथ ही लोगों का गुस्सा भी।

sanjay sharma editor5बहुत उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अपनी सरकार के एक साल पूरा होने पर यूपी में आयेंगे तो कई बड़ी घोषणायें करेंगे। वो बतायेंगे कि एक साल में उनकी सरकार ने यूपी के लिये क्या किया। साथ ही यह भी बतायेंगे कि आने वाले अगले साल वह यूपी के लिये क्या करने जा रहे हैं। यह सोचना जायज भी था क्योंकि नरेंद्र मोदी इसी प्रदेश के एक जिले बनारस से सांसद हैं मगर मथुरा में हुई रैली ने सबको मायूस कर दिया। ऐसा लगा ही नहीं कि प्रधानमंत्री एक साल पूरा होने पर अपनी खुशी साझा करने आये हैं। पूरे भाषण में यही एहसास होता रहा मानो यह एक साल पूरा होने के खुशी में दिया गया भाषण नहीं है बल्कि यह एक चुनावी रैली है। इस रैली में देश के पीएम लोगों के सपनों से खेलते नजर आये। यह लोकतंत्र के लिये और आम आदमी के लिये ठीक नहीं है।
इस देश के लोगों ने, खास तौर पर यूपी के लोगों ने बहुत उम्मीदों के साथ नरेंद्र मोदी को वोट दिया था। इन लोगों को लगता था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी तस्वीर बदल जायेगी। बनारस के लोगों को भी लगा था कि देश की तस्वीर के साथ-साथ बनारस की तस्वीर भी बदलेगी।
मगर जिस तरह आज यूपी के किसान मायूस हैं वैसा ही हाल बनारस के घाटों का है। बनारस के घट भी सूने हैं। किसी भी घाट का न तो पूरी तरह सौंदर्यीकरण हुआ और न ही विकास की वैसी योजनायें शुरू हुईं जैसा कि मोदी जी ने कहा था। अब यह मायूसी लगातार बढ़ रही है और साथ ही लोगों का गुस्सा भी।
उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि अब वह किसकी तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देखें। यह तो सरासर धोखा ही हुआ है। इस रैली में पीएम लगातार कांग्रेस पर हमला ही करते नजर आये। लगा ही नहीं कि वह इस एहसास से बाहर हैं कि अब यह चुनाव का दौर नहीं है बल्कि वह इस देश के प्रधानमंत्री हैं। लोग बस सोचते ही रहे कि अब पीएम उनके बारे में कुछ कहेंगे मगर ऐसा हुआ नहीं। यह बदलाव का वक्त है मोदी जी लोग सब समझते और महसूस करते हैं। इस लिये अब सिफ बयानों से काम नहीं चलेगा कोई ठोस काम कीजिये। अग पीएम जी ऐसा ही करते रहे तो इस देश की जनता के हृदय में खुद को और अपने देश को लेकर आपसे जो उम्मीदें थीं वह धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो देंगी। अभी आपके पास वक्त है कि लोगों की सुनहरी उम्मीदों और सपनों की ओर ध्यान दें। अब सिर्फ बातें नहीं जनता को काम भी दिखाइये।

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