मोदी की रैली और किसानों का दर्द…

उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्या की है। ओलावृष्टिï और बेमौसम की बरसात ने किसानों को तबाह कर दिया है। किसान आंखों में आंसू भर के प्रधानमंत्री की तरफ देख रहे हैं और प्रधानमंत्री दुनिया भर में दौलत बांट रहे हैं।

sanjay sharma editor5अपनी सरकार के एक साल पूरा होने पर देश के प्रधानमंत्री मथुरा में एक बड़ी रैली करने आ रहे हैं। अच्छी बात है। पार्टी को इससे बल मिलेगा और कार्यकर्ताओं को उत्साह मिलेगा। पार्टी के लोग रैली को सफल बनाने के लिये दिन-रात जुट गये हैं। मगर मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या सिर्फ इस बार भी बातों से ही काम चल जायेगा या हकीकत में कुछ ऐसा होगा जो आम आदमी को राहत दे सके। एक साल से अच्छे दिनों के इंतजार में लोगों की आंखें पथरा गई हैं। मगर हकीकत में विकास कहीं होता नजर नहीं आ रहा। आम आदमी ने जिन सपनों के साथ सरकार बनाई थी वह सपने कहीं खोते नजर आ रहे हैं। लोग समझ नहीं पा रहे कि अब किससे बात करें और किससे शिकायत करें। हर कोई उनके सपनों के साथ जिस तरह खिलवाड़ करता नजर आ रहा है उसने उन लोगों की उम्मीदें तोड़ दी हैं। अब आम आदमी को लगने लगा है कि उसके सपनों की बात करने वाला कोई नहीं बचा। अब इस रैली में भी सिर्फ वही बातें की जायेंगी जिनको सुनते-सुनते वो थक चुका है और अब फिर से उन बातों को सुनने की उसमें हिम्मत भी नहीं बची है।
जिस समय नरेंद्र मोदी बनारस से सांसद बने थे उस समय लोगों को खुशी हुई थी कि अब पूर्वांचल की हालत सुधर जायेगी। दिमागी बुखार से तड़प-तड़प कर मर रहे बच्चों के परिजनों को लग रहा था कि कम से कम इस बार उनका इलाज हो सकेगा और उनके बच्चे एक नई जिंदगी की तरफ जा सकेंगे। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सभी को लगा था कि गोरखपुर और उसके आस-पास के इलाकों में केंद्र सरकार इस बीमारी की रोकथाम के लिये कुछ न कुछ नया करेगी।
इस साल भी पूर्वांचल में एक हजार से ज्यादा बच्चे इसी बीमारी के चलते मर गये। कहीं कोई प्रभावी इलाज या बीमारी की रोकथाम के लिये कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाया गया। यह कहीं न कहीं उन बच्चों और उनके परिजनों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ था क्यों वे नरेंद्र मोदी में अपना भविष्य देख रहे थे।
उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्या की है। ओलावृष्टिï और बेमौसम की बरसात ने किसानों को तबाह कर दिया है। किसान आंखों में आंसू भर कर प्रधानमंत्री की तरफ देख रहे हैं और प्रधानमंत्री दुनिया भर में दौलत बांट रहे हैं। मगर इन किसानों को देने के लिये उनके पास न तो वक्त है और न ही दौलत। यह किसान एक बार फिर केवल और केवल कोरी बातें सुनने के लिये मजबूर हैं और शायद उनकी तकदीर में सिर्फ और सिर्फ भाषण ही लिखे हैं। मोदी जी इस देश के लोग हर बार मूर्ख नहीं बन सकते। मथुरा रैली में आकर बताइये कि यूपी में आप क्या करने जा रहे हैं। सिर्फ एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलने वाला।

Pin It