मोदी की तरह विकास को मुद्ïदा बनाने में जुटे अखिलेश यादव

बहरहाल, मुख्यमंत्री अपनी पीठ थपथपाने में लगे जरूर हैं लेकिन वह कई मोर्चों पर अपनों के कारण ही घिरे नजर आ रहे हैं। शैलेन्द्र अग्रवाल जैसे भ्रष्ट सपा नेताओं के कारण पार्टी की छवि गिर रही है तो राममूर्ति जैसे मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई में पार्टी के भीतर पनपता अंतर्विरोध यह बताता है कि मुलायम परिवार कई सवालों से जूझ रहा है।

– अजय कुमार
गुजरात के ‘विकास’ को उजागर कर जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं, कुछ माह बाद होने वाले बिहार चुनाव के लिये वहां के सीएम नीतीश कुमार पहले दोस्त और अब कट्टर विरोधी विकास का डंका बजाने के मामले में नमो के पद चिन्हों पर चल सकते हैं तो उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं।
अखिलेश सरकार और समाजवादी पार्टी के आकाओं को इस बात की उम्मीद तो है नहीं कि उनके विरोधी उनके कामकाज की तारीफ करेंगे। इसलिये अखिलेश सरकार अपने कामों का गुणगान करने के लिये नमो की तरह युद्ध स्तर पर प्रचार अभियान चलायेगी। इसके लिये विशेषज्ञों की मदद ली जायेगी। सरकार के कामकाज की जानकारी जन-जन तक पहुंचे इसके लिये प्रचार माध्यमों के सहारे अभियान चलाया जायेगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सरकार व पार्टी के खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार का कड़ा जवाब देने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी के लोगों को अब दुष्प्रचार के खिलाफ चुप नहीं बैठना चाहिए। इससे लोगों में सरकार के कामकाज को लेकर भ्रम फैलता है। सीएम अखिलेश यादव पार्टी के जिला व महानगर अध्यक्षों व महामंत्रियों को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाने के लिये आजकल उनके साथ बैठकें कर रहे हैं। समाजवादी सरकार अपने कामों का प्रचार-प्रसार करेगी तो एम-वाई (मुस्लिम-यादव) वोट के समीकरण का भी ध्यान रखेगी, लेकिन ऐसा करते समय इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि जाति आधारित राजनीति से दूरी बनाकर चला जाये।
सपा आलाकमान के लिये परेशानी की वजह यह है कि उसके नेता और कार्यकर्ता सत्ता के नशे में चूर हैं। चाहे मंत्री कैलाश चौरसिया का एक सरकारी सेवक को थप्पड़ मारने का मामला हो या फिर शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्या में उनके मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा के नाम आने की बात हो अथवा जगह-जगह मारपीट-गुंडागर्दी करते नेता कार्यकर्ता। सपा के अंदरूनी हालात से समाजवादी आलाकमान की परेशानी छिपी नहीं है। हालात में सुधार लाया जा सके इसलिये सपा के शीर्ष नेता अपने जिला अध्यक्षों और महामंत्रियों से अलग-अलग बातचीत करके उनसे जानकारी हासिल कर रहे हैं। बताया जाता है कि सीएम अखिलेश यादव ने अपने कई अध्यक्षों से बातचीत में जमीनी स्थिति बेहतर करने पर जोर दिया। सपा के नेता और कार्यकर्ता सरकार के कामकाज को लेकर कितना जागरूक हैं, इसका पता लगाने के लिये हाल में सीएम ने इन लोगों से प्रदेश सरकार की पांच उपलब्धियां पूछ लीं। इस पर, ज्यादातर तीन या चार उपलब्धियां ही बता पाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की उपलब्धियों की जानकारी लें और उन्हें लोगों तक पहुंचाएं। विधानसभा के 2017 में होने वाले चुनाव के मद्देनजर यह बहुत जरूरी है। मुख्यमंत्री ने जिलाध्यक्षों को आदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर जब उनकी सरकार पर आरोप लगें तो चुप न बैठें। बल्कि इसका अपने विरोधियों को कड़ाई से जवाब दें। लोगों को बताएं कि कानून-व्यवस्था अगर ठीक नहीं है तो विकास कैसे हो रहा है।
बहरहाल, मुख्यमंत्री अपनी पीठ थपथपाने में लगे जरूर हैं, लेकिन वह कई मोर्चों पर अपनों के कारण ही घिरे नजर आ रहे हैं। शैलेन्द्र अग्रवाल जैसे भ्रष्ट सपा नेताओं के कारण पार्टी की छवि गिर रही है तो राममूर्ति जैसे मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई में पार्टी के भीतर पनपता अंतर्विरोध यह बताता है कि कई सवालों से जूझ रहा है मुलायम परिवार। रही सही कसर राज्यपाल राम नाईक पूरी करने में लगे हैं। राज्यपाल ने यूपी के मौजूदा हालात से संबंधित एक रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपी है, जिसमें कहा गया है कि अब तक राज्य सरकार ने लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है। विधान परिषद सदस्यों के मनोनयन को राज्य सरकार की उलझन, कानून व्यवस्था से भी राज्यपाल ने पीएम मोदी को अवगत कराया है। भले ही यह एक औपचारिक प्रक्रिया थी, लेकिन इसके राजनैतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं।

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