मेडिकोज छात्रों ने चलाई मुहिम ‘इंटर्नशिप के पैसे बढ़ाये जाएं’

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले केजीएमयू के मेडिकोज
काम के बदले मिलने वाला, पैसा काफी कम

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के मेडिकोज यूथ आइकॉन के बैनर तले मेडिकल के छात्र अपने इन्टर्नशिप में मिल रहे पैसों को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इससे अब तक 900 छात्र जुड़ चुके हैं। अपनी इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए छात्रों ने हस्ताक्षर अभियान भी चला रखा है और इससे होम्योपैथी और आयुर्वेद कॉलेजों के छात्रों को भी जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि वह जो काम करते हैं, उसके बदले उन्हें मिलने वाला पैसा काफी कम है। इसी सिलसिले में बीते 15 दिसम्बर को उनकी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मुलाकात हुर्ई थी। पर अभी तक इंटर्नशिप की राशि बढ़ाने को लेकर कोई निर्णय नहीं आया है।
छात्रों की मांग की अगुवाई कर रहे संस्था मेडिकोज यूथ आइकॉन के अध्यक्ष डॉ. अजीत यादव का कहना है कि मेडिकल छात्र इन्टर्नशिप में 12-12 घंटे काम करते हैं। उसके बदले में उन्हें जो भुगतान किया जाता है, वह काफी कम है। मुख्यमंत्री श्री यादव से मुलाकात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनसे पीजी की सीटों को बढ़ाने के साथ-साथ इन्टर्नशिप के पैसों को बढ़ाने की मांग की गयी थी। हालांकि इसमें से एक मांग मानते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश में पीजी की 174 सीटें बढ़ा दी हैं। पर इंटर्नशिप की राशि बढ़ाने संबंधी अभी तक कोई फैसला नहीं आया है। इसको देखते हुए छात्रों ने एक मुहिम चला रखी है, जिसके जरिये यह लोग अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं। डॉ. अजीत का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर केजीएमयू के छात्र एकजुट हुए हैं। इन लोगों ने हस्ताक्षर अभियान भी चला रखा है और अब इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए होम्योपैथी और आयुर्वेद कालेजों के छात्रों को भी इससे जोड़ा जायेगा। जिससे सीएम तक उनकी बात पहुंच सके।

छात्रों में जागरूकता की कमी

मेडिकोज का कहना है कि वह लोग 12-12 घंटे काम करते हैं। उसके बाद भी इन्टर्नशिप के नाम पर सिर्फ 7500 रुपये मिलते हैं, जो मनरेगा में मिलने वाली मजदूरी से भी कम हैं। मौजूदा समय के लिहाज से ये पैसा काफी कम है। सभी पैथी के छात्रों को जो इन्टर्नशिप के पैसे दिये जाते हैं, वह एक समान होते हैं। अभी प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल कॉलेज के छात्रों को अपने इन्टर्नशिप में मिल रहे पैसे के बारे में पता ही नहीं है। उन सभी को जागरूक कर इस मुहिम से जोड़ा जायेगा और मांगों को लेकर अभियान चलाया जायेगा।

छात्रों ने कहा…
डॉ. अजीत यादव केजीएमयू 2010 बैच के छात्र रहे हैं। उनका कहना है कि वह छात्रों की समस्याओं को जानते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री तक छात्रों की समस्या पहुंचाना चाहते हैं। सीएम युवाओं की परेशानियों को भलीभांति समझते हैं। केजीएमयू में छात्रों से 12-12 घंटे काम लिया जाता है, साथ ही सरोजनीनगर, बंथरा स्थित अस्पतालों में ड्यूटी भी लगा दी जाती है।

केजीएमयू से एमबीबीएस कर रहे कुलदीप का कहना है कि इन्टर्नशिप के पैसे बढ़ाना बहुत जरूरी है। काम के हिसाब से पैसे भी मिलने चाहिए।

एमबीबीएस 2014 बैच के छात्र योगेश वर्मा का कहना है कि हम लोगों को इन्टर्नशिप के दौरान जो पैसे मिलते हैं वो मौजूदा समय के हिसाब से काफी कम हैं। यदि हमलोगों को भी बढक़र पैसे मिलने लगे तो बहुत अच्छाछ रहेगा।

एमबीबीएस के छात्र प्रदीप चौहान बताते हैं कि जब सभी को काम के बदले अच्छे पैसे मिलते हैं तो हम लोगों को ही कम पैसे क्यों मिलते हैं। हमारा काम अलग है, काम और पैसे का कोई जोड़ नहीं है, यदि पैसा भी अच्छा मिले तो बहुत अच्छा है।

केजीएमयू के छात्र प्रदीप चौधरी का कहना है कि हम लोग जो मुहिम चला रहे हैं, उससे सभी मेडिकल के छात्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। काम के हिसाब से पैसे मिलने चाहिए।

2०14 बैच के एमबीबीएस छात्र आयुष मौर्या ने बताया कि हमारे यहां छात्रों की इन्टर्नशिप के दौरान कई घंटे काम करना होता है। इसके बदले जो पैसा मिलता है, उसको बढ़ाया जाना चाहिए। छात्र इसके लिए एकजुट हैं कि उन्हेें मिलने वाले इन्टर्नशिप के पैसे बढ़ाये जायें।

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