मेट्रो में धांधली का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मेट्रो के डिब्बों के टेण्डर देने में हुई गड़बड़ी के खिलाफ दायर याचिका में सुनवाई के दौरान जस्टिस शाही ने प्रदेश सरकार और लखनऊ मेट्रो से टेण्डर प्रक्रिया के सारे दस्तावेजों को अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही उनसे कहा गया है कि टेण्डर आखिर में कैसे दिया गया उसकी सारी प्रक्रिया भी वो बताएं।
गौरतलब है कि आरबीए कंसोडियम ने मेट्रो के डिब्बों के टेण्डर में गड़बड़ी और नियम विरुद्घ टेण्डर देने को लेकर हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के विरुद्घ याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई 19 नवंबर को न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वकील जे एन माथुर ने अपनी दलील पेश करते हुए कुछ दस्तावेज कोर्ट के समक्ष रखे। जिसमें मुख्यत: दो बातें बताई गईं, पहली कि लखनऊ मेट्रो के डिब्बों के टेण्डर वितरण की प्रक्रिया में किस प्रकार से धांधली हुई और दूसरा कि किस प्रकार से अधिक बोली लगाने वाली कंपनी अल्सटॉम को टेण्डर दे दिया जो कि साफ तौर से भ्रष्टïाचार का मामला है। सुनवाई के बाद जस्टिस शाही ने प्रदेश सरकार और लखनऊ मेट्रो से अगली सुनवाई 30 नवम्बर को टेण्डर से सम्बंधित सभी दस्तावेज लाने का आदेश दिया। साथ ही लखनऊ मेट्रो से टेण्डर की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी देने को कहा गया।
याचिकाकर्ता आरबीए कंसोडियम की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि मेट्रो के डिब्बों के टेण्डर देने में नियम विरुद्घ कार्यवाही हुई है और यह साफ तौर से भ्रष्टïाचार का मामला है। उनके अनुसार सबसे कम बोली लगाने वाले को टेण्डर न देते हुए जिसकी सबसे अधिक बोली थी उसे टेण्डर दे दिया गया। सबसे कम बोली लगाने वाले और अधिक बोली लगाने वाली कंपनी के मध्य 70 करोड़ 95 लाख का फर्क था, जो कि टेण्डर पाने वाली कंपनी अल्सटॉम ने रातो रात घटा दिया और अगले दिन उसके नाम से ऑर्डर निकाल दिया गया, जो कि सीवीसी की गाइडलाइन के बिल्कुल खिलाफ है और भ्रष्टïाचार की श्रेणी में आता है।
आरबीए कंसोडियम की ओर से कहा गया कि अल्सटॉम के खिलाफ दिल्ली मेट्रो में रिश्वत देने का मामला भी लंदन की कोर्ट में चल रहा है। साथ ही 2014 में इसका एमडी भी गिरफ्तार हो चुका है। ऐसे में इस तरह की भ्रष्टï कंपनी को किस तरह से टेण्डर दे दिया गया। आरबीए कंसोडियम ने इस सारे मामले में मुख्य सचिव आलोक रंजन और एमडी लखनऊ मेट्रो कुमार केशव को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है, क्योंकि इन लोगों को ही टेण्डर प्रक्रिया में आखिरी फैसला लेना था।

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