मेट्रो को मिलेगी रफ्तार, सरकार खजाना खोलने को तैयार

 मुजाहिद जैदी
Captureलखनऊ। लखनऊ में मेट्रो निर्माण का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन अभी तक मेट्रो प्रोजेक्ट को पीआईबी की मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि अगस्त के पहले हफ्ते में एक बार फिर पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड की बैठक होने वाली है । अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाएगी। वहीं यूपी सरकार ने भी ये तय किया है कि अगर मेट्रो प्रोजेक्ट को पीआईबी की क्लीयरेंस नहीं मिलती है तो वो अपने खर्चे पर प्रथम चरण का काम पूरा कराएगी।
लखनऊ में भले ही मेट्रो के निर्माण का काम तेजी से चल रहा हो लेकिन अभी तक इस मेट्रो प्रोजेक्ट को पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड की मंजूरी नहीं मिली है। इसे लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच खींचतान लगातार जारी है। वहीं यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इसे लेकर केंद्र सरकार पर कई बार निशाना साध चुके हैं। प्रदेश सरकार की कोशिश है कि यूपी में दिसंबर 2016 तक मेट्रो चला दी जाए। राजधानी में सबसे पहले मेट्रो का नार्थ साउथ कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है।
ट्रांसपोर्ट नगर से मुंशी पुलिया तक रूट प्रस्तावित है। ये रूट तकरीबन 23 किलोमीटर लंबा होगा। जिसमें कुल 22 स्टेशन बनाए जाएंगे जिनमें 19 एलिवेटेड और 3 अंडरग्राउंड स्टेशन होंगे । इसमें से ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच तकरीबन 8 किलोमीटर स्ट्रेच पर मेट्रो के निर्माण का काम चल रहा है ! और एलएमआरसी के कुमार केशव, एमडी, लखनऊ मेट्रो का कहना है कि मेट्रो का सिविल वर्क तकरीबन 40 फीसदी पूरा हो चुका है और दूसरे काम भी तेजी से चल रहे हैं। उनके मुताबिक दिसंबर 2016 तक लखनऊ में मेट्रो जरूर चल जाएगी।
दरअसल लखनऊ मेट्रो का कुल बजट तकरीबन 6800 करोड़ का है जिसमें केंद्र सरकार तकरीबन 20 फीसदी और राज्य सरकार 27 फीसदी खर्च वहन करेग। जबकि पूरे प्रोजेक्ट का 53 फीसदी पैसा विदेशी फंडिग से आएगा और इसके लिए जरूरी है कि लखनऊ मेट्रो को जल्द से जल्द पीआईबी की मंजूरी मिले, क्योंकि बिना पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड की मंजूरी के कोई भी विदेशी बैंक इस प्रोजेक्ट को लोन नहीं दे पाएगा । हाल ही यूरोपियन इंवेस्टमेंट बोर्ड की टीम ने लखनऊ मेट्रो का दौरा किया था और इस प्रोजेक्ट को लोन देने पर सहमति भी जताई थी। लेकिन लगातार पीआईबी क्लीयरेंस मिलने में देरी हो रही है और यही वजह है कि यूपी सरकार ने एलएमआरसी को ये कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो प्रदेश सरकार इस प्रोजेक्ट को अपने पैसे से बनाएगी, लेकिन पैसे की कमी के कारण मेट्रो का प्रोजेक्ट लटक जाए ये सरकार नहीं होने देगी।

प्रथम चरण पर तकरीबन 2000 करोड़ का खर्च

लखनऊ के लोगों को मेट्रो का बेसब्री से इंतजार लेकिन फिलहाल मेट्रो की राह में कुछ रुकावटें भी हैं। हालांकि अधिकारियों को उम्मीद है कि अगस्त में होने वाली पीआईबी की मीटिंग में मेट्रो को मंजूरी मिल जाएगी और सारी रुकावटें जल्द दूर हो जाएंगी।

Pin It