मुुुख्यमंत्री की सुरक्षा में लापरवाही…

यहां सवाल उठता है कि आखिर जब सभी को पता था कि मुख्यमंत्री को आना है फिर ऐसी लापरवाही कैसे हो गई। इसके अलावा इंजीनियरों का सबसे गैरजिम्मेदाराना रवैया तब दिखा कि जैसे ही पता चला कि सीएम लिफ्ट में फंस गए हैं तो वह मदद के बजाय डर की वजह से भाग गए।

sanjay sharma editor5सूबे में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति कोई होता है तो वह निश्चित ही मुख्यमंत्री ही है। यदि मुख्यमंत्री की सुरक्षा के साथ लापरवाही हो जाए तो यह निश्चित ही इसके लिए अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे। कल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी पत्नी के साथ दोपहर में विधानसभा में आयोजित बाल संसद में भाग लेने जा रहे थे। मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ लिफ्ट में फंस गए। इसका कारण तकनीकी गड़बड़ी बताया गया। लिफ्ट को ठीक होने में लगभग 15 मिनट लग गए। सबसे दुखद यह रहा कि जब लिफ्ट रूक गई तो लिफ्ट की चाभी ढंूढी जाने लगी लेकिन मिली नहीं। यह लापरवाही की घोर इंतहा है। सचिवालय, विधानसभा, मुख्यमंत्री आवास जैसी जगहों पर इस तरह की घटनाएं होती हैं तो यह निंदनीय है। इन जगहों पर मुख्यमंत्री का आना-जाना लगा रहता है। यहां आम आदमी का प्रवेश वर्जित है और इन जगहों पर भारी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी मुस्तैदी से लगे रहते हैं। ऐसी दशा में लापरवाही की कोई घटना होती है तो यह अधिकारियों के ढुलमुल रवैये की वजह से है। खैर इस मामले में सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं और कुछ लोगों को बर्खास्त भी कर दिया है। इसके अलावा लिफ्ट लगाने वाली कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए गए।
यहां सवाल उठता है कि आखिर जब सभी को पता था कि मुख्यमंत्री को आना है फिर ऐसी लापरवाही कैसे हो गई। इसके अलावा इंजीनियरों का सबसे गैरजिम्मेदाराना रवैया तब दिखा कि जैसे ही पता चला कि सीएम लिफ्ट में फंस गए हैं तो मदद के बजाय डर की वजह से वह भाग गए। यह घटनाएं निश्चित ही लापरवाही की परिचायक है। यहां एक सवाल यह भी उठता है कि जब अधिकारी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मामले में लापरवाही बरत सकते हैं तो आम जनता से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे करते होंगे? इसके पहले भी एक बार सीएम अखिलेश यादव गोमतीनगर विस्तार में निरीक्षण के लिए गए थे तो वहां भी लिफ्ट में फंस गए थे। यह मामला भी अधिकारियों की लापरवाही की वजह से हुआ था।
प्रदेश सरकार जहां एक ओर प्रदेश में विकास और अच्छी व्यवस्थायें होने के दावे कर रही है वहीं कुछ नाकारा अफसरों के कारण इस दावे पर पानी फिरता नजर आ रहा है। यदि जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों में सुधार नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री द्वारा विकास के लिये किये जा रहे अथक प्रयास विफल ही साबित होंगे।

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