मुद्दे को तूल देते माननीय

अधिकांश विश्वविद्यालय में फैलोशिप समय से नहीं मिलती है। कभी-कभी तो एक-एक साल पर छात्रों को फैलोशिप मिलती है। जो छात्र आर्थिक रूप से सक्षम होते है उन्हें परेशानी नहीं होती लेकिन जो उसी फैलोशिप पर निर्भर होते हैं उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोहित वेमुला के साथ भी ऐसा ही कुछ था। रोहित के लिए फैलोशिप की बहुत अहमियत थी।

sanjay sharma editor5हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला खुदकुशी मामले पर राजनीति तेज हो गई है। नेता अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के लिए यूनिवर्सिटी पहुंच रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब किसी की मौत पर सियायत की गई हो। अक्टूबर माह में नोएडा के बिसहाड़ा गांव में अखलाक की मौत के बाद देश का माहौल बिगाडऩे की कोशिश हुई थी। सभी राजनीतिक दलों के नुमाइंदे वहां पहुंचकर अल्पसंख्यों को साधने की कोशिश में दिखे थे। एक बार फिर दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी पर राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं। हर कोई दलितों का मसीहा बनने की कोशिश कर रहा है। अब सभी को रोहित की मौत पर अफसोस हो रहा है। यह सच है कि रोहित के साथ जो कुछ भी हुआ वह गलत था। रोहित ने व्यवस्था से तंग आकर खुदकुशी की। पिछले सात माह से रोहित को फैलोशिप नहीं मिली थी। आर्थिक तंगी और अन्य समस्याओं से परेशान होकर रोहित ने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
अधिकांश विश्वविद्यालयों में फैलोशिप समय से नहीं मिलती है। कभी-कभी तो एक-एक साल पर छात्रों को फैलोशिप मिलती है। जो छात्र आर्थिक रूप से सक्षम होते हैं उन्हें परेशानी नहीं होती लेकिन जो उसी फैलोशिप पर निर्भर होते हैं उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोहित वेमुला के साथ भी ऐसा ही कुछ था। रोहित के लिए फैलोशिप की बहुत अहमियत थी। राजनीतिक पार्टियों के माननीय लोग इसे मुद्दा बनाने पर तुले हैं। हमारे माननीय लोग व्यवस्था दुरुस्त करने में विश्वास नहीं करते हैं। सिर्फ जुबानी जंग जीतने में यकीन करते हैं। देश में जब भी ऐसी कोई घटना होती है तो राजनीतिक पार्टियां माहौल बिगाडऩे की कोशिश करती हैं। इस मसले पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने भी अपना पक्ष रखा। बुधवार को जब स्मृति ईरानी प्रेस कांफ्रें स कर रही थीं तो बहुत ही आक्रामक मुद्रा में नजर आयीं। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने अपनी प्रस्तावना से लेकर हर सवाल के जवाब में इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में भावनाओं को भडक़ाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है इसलिए वे मजबूर हुई हैं कि अपनी तरफ से सिर्फ तथ्यों को सामने रखें।
फिलहाल रोहित वेमुला खुदकुशी मामले में राजनैतिक पार्टियों की बयानबाजी शुरू हो गई है। विश्वविद्यायल के 10 प्रोफेसरों ने भी प्रशासनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि मानव संसाधन मंत्रालय इस मामले में तथ्यों को तोड़-मरोडक़र पेश कर रहा है। खैर जो भी हो, इस मामले पर राजनीति तेज हो गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे को माननीय लोग किस तरह भुनाते हैं।

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