मुख्य सचिव ने फेरा भ्रष्ट चंचल तिवारी के अरमानों पर पानी, विवादित शासनादेश रद्द

करोड़ों का भ्रष्टाचार रोकने को 4पीएम की मुहिम रंग लाई

  • 14वें वित्त आयोग के साढ़े तीन हजार करोड़ में हेराफेरी करने के लिए 5 करोड़ रुपए लेकर प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल तिवारी ने कर दिया था विवादित शासनादेश
  • 4पीएम ने लगातार इस मुद्दे को उठाया, मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने लगाई चंचल तिवारी को फटकार और रद्द कर दिया विवादित शासनादेश

संजय शर्मा
11 AUG PAGE611लखनऊ। प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल तिवारी ने 14वें वित्त आयोग के हजारों करोड़ रुपए में हेराफेरी करने के लिए तानाबाना तो बहुत सुनियोजित तरीके से बुना था, मगर 4पीएम के खुलासे ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। जब हमने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश किया तो हडक़ंप मचा। मुख्य सचिव ने पूरे मामले की फाइल तलब की और चंचल तिवारी की क्लास लगाते हुए इस विवादित शासनादेश को रद्द कर दिया। शासनादेश भले ही रद्द हो गया हो, मगर चंचल तिवारी पर कोई कार्रवाई न होने से इसके गलत संदेश जा रहे हैं।
चंचल तिवारी ने इन पैसों में हेराफेरी करने के लिए जारी शासनादेश में जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की हैसियत खत्म कर दी थी और उन्हें पंचायतीराज कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उनकी चरित्र पंजिका लिखने जैसे अधिकारों से भी वंचित कर दिया था। इस शासनादेश से पूरे प्रदेश के आईएएस अफसर भी भौचक्के थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस तरह का गलत शासनादेश कोई आईएएस अफसर ही कैसे कर सकता है।
दरअसल इस शासनादेश के पीछे भ्रष्टïाचार की कई छुपी हुई कहानियां थी। सूत्रों का कहना है कि पंचायतीराज विभाग के कुछ कर्मचारी नेताओं से चंचल तिवारी ने डील की थी। इस डील में तय हुआ था कि चंचल तिवारी शासनादेश कर देंगे कि 14वें वित्त आयोग के पैसे निकालने के लिए एडीओ पंचायत ही अधिकृत होंगे और वह अपने एकल हस्ताक्षर से ही पैसा निकाल सकेंगे। इससे पहले पैसा खंड विकास अधिकारी और एडीओ पंचायत के संयुक्त हस्ताक्षर से निकलता था। यहीं नहीं उन्होनें डीएम और सीडीओ को भी पंचायत कर्मियों के कार्यों में दखल से अलग कर दिया। यही नहीं शासनादेश में कहा गया कि एडीओ पंचायत का दफ्तर अलग होगा और वह खंड विकास अधिकारी के अधीन काम नहीं करेंगे।
इस शासनादेश के बदले 5 करोड़ रुपए देना तय हुआ। इन रुपयों की वसूली के लिए प्रदेश भर से सफाई कर्मचारियों को झांसा दिया गया कि उन्हें ग्राम पंचायत अधिकारी बना दिया जाएगा और ग्राम पंचायत अधिकारयों से कहा गया कि उनका भी प्रमोशन हो जायेगा और वह राजपत्रित अधिकारी बन जाएंगे।
4पीएम ने जब इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ किया तो पंचायतीराज के कुछ नेता बौखला गए और उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर 4पीएम की मान्यता तक रद्द करने का अनुरोध किया। मजे की बात यह है कि इसी खत में इन नेताओं ने स्वीकार भी कर लिया कि आंदोलन के नाम पर प्रदेश में वसूली की गई।
इस शासनादेश के विरोध में ग्राम विकास और पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी आमने-सामने आ गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। इसके बाद मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने मुख्यमंत्री को पूरी रिपोर्ट भेजी। सीएम अखिलेश यादव भी इस बात से सहमत थे कि विकास खंडों पर खंड विकास अधिकारी ही सबसे बड़ा अधिकारी होता है। इसके बाद पहले ग्राम्य विकास का जीओ जारी किया गया और फटकार खाने के बाद चंचल तिवारी ने ही दूसरा जीओ जारी किया, जिसमें पहले की तरह संयुक्त हस्ताक्षर करने का आदेश था।

विवादित शासनादेश की होगी जांच:दीपक

मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने स्पष्टï किया है कि पूर्व की भांति शासन स्तर पर मुख्य सचिव/एपीसी, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त, जिला स्तर पर जिलाधिकारी और विकास खंड स्तर पर खंड विकास अधिकारी ही शासन का सर्वोच्च अधिकारी होता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से अलग शासनादेश करना गलत है और वह इसकी जांच कराएंगे कि आखिर किन परिस्थतियों में यह शासनादेश जारी किया गया। उन्होंने स्पष्टï शब्दों में कहा कि कर्मचारियों को राजनीति करने की जगह अपने काम पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि सरकार उनके हितों का पूरा ध्यान रखती है।

मजबूरी में शासनादेश जारी करना पड़ा चंचल को

चंचल तिवारी ने पंचायतराज का जीओ जारी करने के लिए सारे हथकंड़े अपना लिए। जब ग्राम्य विकास का जीओ जारी हुआ तब चंचल ने अपने एक चेले नेता से बयान भी जारी करा दिया कि वह मुख्य सचिव के आदेश को नहीं मानेंगे। इसके बाद मुख्य सचिव ने अपनी शैली में जब चंचल तिवारी को समझाया तो वह पसीने-पसीने हो गए और कुछ घंटों में ही जीओ जारी हो गया। मजे की बात यह है कि चंचल के हस्ताक्षर से जारी जीओ की कॉपी डीएम को नहीं की गई बल्कि एडीओ पंचायत को की गई। यह बात सभी अफसरों में हंसी का विषय बनी क्योंकि जीओ की प्रति इतने छोटे कर्मचारियों को नहीं की जाती। सबने कहा कि चंचल एडीओ पंचायत के प्रति अपना प्यार रोक नहीं पा रहे।

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