मुंह के कैंसर रोगियों के लिए संजीवनी बना केजीएमयू, सर्जरी का बनाया रिकॉर्ड

ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने एक साल में 100 से ज्यादा मरीजों का किया सफल इलाज

capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू स्थित ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक साल में 100 से अधिक मुंह के कैंसर से पीडि़त मरीजों की सर्जरी करने का रिकार्ड बनाया है। इन चिकित्सकों की कोशिशों से अब तक सैकड़ों लोगों को नई जिन्दगी मिल चुकी है। साथ की उत्तर भारत में केजीएमयू एक मात्र ऐसा संस्थान बन गया है, जहां पर मुंह के कैंसर से पीडि़त मरीजों का इलाज किया जाता है जबकि राजस्थान, बिहार, उत्तराखण्ड तथा छत्तीसगढ़ में मेडिकल कालेज होने के बाद भी वहां पर मुंह के कैंसर पीडि़तों की सर्जरी संभव नहीं हो पा रही है। यहां तक की दिल्ली स्थित मेडिकल कालेज में भी इस विभाग के चिकित्सक मुंह के कैंसर से पीडि़तों की सर्जरी नहीं हो पा रही है।
केजीएमयू के मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर तथा डेन्टल इमप्लांट यूनिट के इंचार्ज डॉ.यूएस.पाल के मुताबिक मुंह के कैंसर से पीडि़त मरीज का आपरेशन करना एक जटिल प्रकिया है। इस सर्जरी में कैंसर पीडि़त व्यक्ति के चेहरे से लेकर आंख,नाक और कान तक का ध्यान भी रखना पड़ता है। पेशेंट की सर्जरी के दौरान प्लास्टिक सर्जन,थैरोटिक सर्जन, कैंसर विशेषज्ञ तथा कैंसर सर्जन की आवश्यकता पड़ती है। जिस किसी भी मेडिकल कालेज में सारे विशेषज्ञ एक साथ मिल पाते हैं। वहीं पर ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग का संचालन किया जाता है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में उन सभी प्रकार की विधाओं के विशेषज्ञों के साथ ही ट्रेंड पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद है। जिसके कारण यहां पर इस विभाग में मुंह के कैंसर से पीडि़त मरीजों की सर्जरी व इलाज सफलता पूर्वक किया जा रहा है।
प्रो.यूएस.पाल का कहना है कि ओरल एण्ड मैकिसलोफेशिलय सर्जरी विभाग डेन्टल और मेडिकल के बीच सेतु का काम करता है। अक्सर लोगों में भ्रान्ति रहती है कि डेन्टल विभाग में केवल दांत से संबंधित बीमारियों और दांतों को लगाने एवं उखाडऩे का काम किया जाता है। जिसके चलते बहुत सारे मरीजों में भ्रम की स्थित पैदा हो जाती है।
परिणामस्वरूप उनको इलाज मिलने भी बिलम्ब होता है। ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में मुंह के कैंसर के साथ ही दुर्घटना में टूटे जबड़ों को सही करने का काम भी किया जाता है। कई बार दुर्घटना तथा अन्य कारणों से चेहरे में विकृति आ जाती है। कई बार जबड़ा टूटने पर पसली से हड्डïी निकाल कर जबड़ा बनाने का काम भी इस विभाग द्वारा किया जाता है।

कैंसर पीडि़तों को डेट देने में होता है दुख: प्रो.यूएस.पाल
प्रो.यूएस.पाल बताते हैं कि उत्तर भारत में मुंह के कैंसर से पीडि़त मरीजों का इलाज करने वाला अकेला संस्थान होने की वजह से केजीएमयू का ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग सालाना करीब 100 मरीजों का ऑपरेशन करता है। इसकी वजह से साल भर मरीजों का भारी दबाव रहता है। यहां दूसरे राज्यों से भी मरीज आते है। सप्ताह में पांच दिन विभाग की दोनों ओटी लगातार काम करती है, क्योंकि एक ऑपरेशन थियेटर (ओटी) में मरीज को बेहोश करके और दूसरी ओपीडी में सुन्न करके आपरेशन किया जाता है। इन दोनों ओटी में जबड़ा ठीक करने से लेकर मुंह के कैंसर से पीडि़त मरीजों की सर्जरी की जाती है। ऐसे में कई मरीजों ही हालत देखकर दुख होता है, उसके बावजूद डेट देकर कुछ दिन बाद बुलाना पड़ता है।

प्लास्टिक सर्जन की होती है अहम भूमिका
ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में थ्रोरोटिक सर्जन ,कैंसर रोग विशेषज्ञ तथा कैंसर सर्जन की अहम भूमिका होती है,लेकिन इसके अलावा प्लास्टिक सर्जन की अक्सर जरूरत पड़ती है। चिकित्सकों के मुताबिक मुंह के कैंसर से पीडि़त रोगियों की सर्जरी के दौरान अक्सर व्यक्ति का चेहरा विकृत हो जाता है। गाल नहीं रह जाते,पूरा जबड़ा खुला रहता है,ऐसे में मरीज भोजन भी नहीं कर पाता है। जिसको ऑपरेशन के माध्यम से प्लास्टिक सर्जन ही ठीक करता है। ऐसे में मरीज का आत्मविश्वास मजबूत होना चाहिए है। अब तक हमने जितने भी ऑपरेशन किए हैं। उसमें अक्सर प्लास्टिक सर्जन डॉ .विजय कुमार का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

Pin It