मिशन यूपी में जुटे पीएम नरेन्द्र मोदी के मंत्री

  • मंत्रियों ने किया केंद्र की योजनाओं का बखान
  • मिशन 2017 के तैयारी में जुटे नेता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

Captureलखनऊ। साल 2017 के विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अपने मंत्रियों को क्षेत्रों में जाकर अपनी पैठ मजबूत करने के लिए आगाह कर दिया है। इसके लिए बाकायदा सभी नेताओं को हिदायत दे दी गई है। इसी योजना के तहत डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती ग्राम स्वराज अभियान के समापन पर रविवार को यूपी में केंद्रीय मंत्रियों ने डेरा डालना शुरू कर दिया है। अमेठी में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, पीलीभीत में मेनका गांधी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गाजियाबाद और कई इलाकों में दूसरे नेताओं ने अपना डेरा डाला। अलग-अलग जिलों में मोदी सरकार के इन मंत्रियों ने केंद्र की योजनाओं का बखान किया। वहीं, यूपी सरकार को कटघरे में भी खड़ा किया।
अपने अमेठी दौरे में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी लोगों की समस्याएं सुनती हुई दिखीं। ईरानी पूरी तरह से कांग्रेस पर हमलावर भी रहीं। अमेठी में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने लोगों को सीएसआर के माध्यम से शूटिंग रेंज बनाने का अश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि पीएम बीमा सुरक्षा में अगर कोई कठिनाई हो रही हो तो लोग उनको बताएं, वो कठिनाइयों को दूर करेंगी।स्मृति ने कहा कि लोग पीएम मुद्रा योजना से ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुड़ें, क्योंकि ये लोगों के हित की योजना है। पीलीभीत में मेनका गांधी ने उत्तराखंड के शक्तिमान घोड़े की टांग तोडऩे वाले को सजा देने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि शक्तिमान कोई आम घोड़ा नहीं था, बल्कि वो पुलिस फोर्स में अफसर था। इतना ही नहीं मेनका ने घोड़े के जरिए ही कांग्रेस पर कई सवाल खड़े किए। इसी क्रम में बीजेपी के राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने गाजियाबाद में कहा कि हमारी सरकार का पूरा श्रेय यूपी को जाता है क्योंकि यूपी ने हमें 73 सीटें दी। मैं यूपी का आभारी हूं। बीजेपी सरकार का खजाना गांवों की तरफ है और हम कस्बों को 21 करोड़ और गावों को 80 लाख रुपए देंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही जाता है। ये फिर साबित हो गया।
यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि दो साल में मोदी सरकार ने बहुत काम किया है। इतना काम कांग्रेस के 60 साल के कार्यकाल में भी नहीं हुआ है। मोदी के मंत्रियों और नेताओं के इस जनसंपर्क अभियान का मकसद लोगों में अपनी पहुंच बढ़ाना और प्रदेश के चुनावों के लिए वोट बैंक में इजाफा करना है। ऐसे में कई मंत्रियों को अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी बांट दी गई है।

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