मिलता है करोड़ों का बजट फिर भी दर-दर भटकते हैं मरीज

डॉक्टरों के गुस्से का शिकार होने से बचने के लिये कुछ भी बताने से डरते हैं मरीजों के परिजन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। सीतापुर निवासी सतीश अपनी पत्नी के इलाज के लिए आये हैं। उनकी पत्नी के जीभ के बगल में गिलटी है। जिससे उन्हें गंभीर तकलीफ है। सतीश का कहना है कि वह घंटों से भटक रहे हैं। डॉक्टरों की ओर से इधर-उधर भेजा जा रहा है लेकिन इलाज मिलना संभव नहीं है।
यह परेशानी मात्र सतीश की नहीं है बल्कि असाध्य रोग से पीडि़त उन तमाम मरीजों की है जिन्हें व्यवस्था के अभाव में रखा जा रहा है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। हालांकि बाद में केजीएमयू के उपचिकित्साधिकारी डॉ वेद के हस्तक्षेप के बाद उसे इलाज मिल गया।
केजीएमयू को असाध्य रोगों के इलाज के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिलता है। ताकि जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे मरीजों का इलाज हो सके लेकिन केजीएमयू में असाध्य रोगों के इलाज के लिए आये मरीजों को जहां भटकना पड़ रहा है वहीं मरीजों के तीमारदारों को भी काफी मुश्किलों के बीच दिन-रात काटना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि देखने वाले की रूह कांप जाये। एक ही बेड पर दो से तीन मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। सरकार की मंशा है कि गंभीर बीमारी से पीडि़त मरीजों को बेहतर इलाज मिले लेकिन शायद जनता को लाभ मिलना मुश्किल हो रहा है।
कैंसर से पीडि़त मरीजों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं बेड की कमी, कहीं संसाधनों की कमी है। तीमारदारों को खासी परेशानियों के बीच रहना पड़ रहा है।
सुरेश, रमेश और छोटू (काल्पनिक नाम), एक ही बेड पर तीन कैंसर से पीडि़त मरीज लेटे हुए हैं। तीनों की उम्र मात्र पांच से आठ साल के बीच है। इनके बगल में बच्चों के माता-पिता बैठे हुए हैं, जिनकेचेहरों पर मायूसी है। बच्चे कैंसर से पीडि़त हैं लेकिन वो कुछ बयां कर पाने में असमर्थ हैं क्योंकि समाज ने वह शब्द नहीं सिखाये हैं जिससे वह अपने भाव व्यक्त कर सकें या अपना गुस्सा जाहिर कर सकें। उनके अभिभावक इस बात से वाकिफ होने के बाद भी मुंह पर ताला जड़े हैं कि कहीं बच्चे डॉक्टरों के कोप का शिकार न हो जाएं। केजीएमयू में ठीक प्रशासनिक कार्यालय के पास स्थित कैंसर बाल रोग विभाग का हाल देख आम इंसान सिहर कर कपकपा उठे। लेकिन प्रशासन जागता है या नहीं यह देखना है। सरकार की मंशा तो गरीबों को बेहतर इलाज देने की है लेकिन डॉक्टरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये से हालात बद से बदत्तर होते जा रहे हैं।
जांच के लिए पीजीआई जाइये
केजीएमयू में पिछले तीन दिनों से सीटी स्कैन नहीं हो पा रहा है। केजीएमयू प्रशासन का कहना हे कि एसी खराब होने से जांच नहीं हो पा रही है लकिन सूत्रों की माने तो सीटी स्कैन मशीन ही खराब है। केजीएमयू के डॉक्टर मरीजों को जांच के लिए पीजीआई भेज रहे हैं लकिन उनकी तरफ से किसी प्रकार का रेफर संबंधी कागज नहीं लिखा जा रहा है। ऐसे में मरीजों को पीजीआई जैसे वीआईपी असपताल में जांच होने में संशय बरकरार है।

Pin It