मिड डे मील के मानकों का भी पालन नहीं

छात्रों के भोजन की गुणवत्ता से नहीं है मतलब

बच्चों की शिकायत के बावजूद नहीं हो रहा सुधार

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्राथमिक विद्यालय खुले एक माह होने वाला है पर मिड डे मील की समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। कहीं खाने में कीड़े तो कहीं दूध पीकर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। कहीं समय से भोजन नहीं मिल रहा है तो कही सब्जी में आलू खोजने से नहीं मिल रहा है। भोजन की गुणवत्ता का ख्याल किसी को नहीं है, बस लक्ष्य है कि बच्चों को दोपहर में कुछ भी खाने को दे दिया जाए।
सरकार दिन-प्रतिदिन मिड डे मील योजना को अच्छा बनाने में जुटी है। आए दिन मिड डे मील के मेन्यू में बदलाव किया जाता है। केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार की कोशिश है कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो, पर प्रदेश में मिड डे मील योजना सही तरीके से संचालित नहीं हो रही है। उदाहरण के लिए स्कूलों में बुधवार को बच्चों को दूध देने की योजना थी पर यह कई स्कूलों में सही तरीके से संचालित नहीं हो रही है। लखीमपुर के एक स्कूल में पहले ही दिन बच्चे दूध पीकर बीमार पड़ गए। बहुत से स्कूलों में बच्चों को दूध मिला ही नहीं। स्कूलों में भोजन देने वाली संस्थाओं ने दूध देने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा 3.80 पैसे में खाना और दूध कैसे देंगे।

दूध के दामों में भी की जा रही है धांधली
मार्केट में दूध की कई कीमते हैं। पैकेट वाले दूध की कीमत 40 से लेकर 48 रुपए है। दूधिए जो दूध देते हैं उनकी कीमत में तो बहुत अंतर है। वह 35 से 40 रुपए लीटर देते हैं। मिड डे मील में दूध देने वाली संस्थाएं सरकार से 50 रुपये लीटर का दाम ले रही हैं।
मिड डे मील के खानों की नही होती है जांच
स्कूलों में दिये जाने वाले खाने की जांच भी नहीं होती है। इसकी जांच स्कूल के शिक्षक करते हैं और न ही योजना तैयार करने वाले आला अधिकारी ही इसकी जांच करने के लिए किसी को भेजते हैं। यह सरासर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। खाने की जांच न होने की वजह से कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें बच्चे मिड डे मील का खाना खाकर गंभीर रूप से बीमार पड़े।
जिम्मेदारों को नहीं है मतलब
मिड डे मील की जिम्मेदारी स्कूल के अध्यापकों से लेकर स्वयं सेवी संस्थाओं पर है, पर भोजन की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। जिम्मेदारों को बच्चों के स्वास्थ्य से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ स्कूलों में बच्चों को गर्म व स्वास्थ्यवर्धक खाना मिल रहा है पर ग्रामीण अंचल में स्थिति खराब है।

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