मासूम के अत्याचार की 4पीएम में छपी खबर के बाद डीएम ने दिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश

  • खबर छपते ही डीएम राजशेखर ने जिला प्रोवेशन अधिकारी को भेजा 4पीएम के दफ्तर 
  • संस्था के कर्मचारी सबके साथ बरत रहे एक जैसा व्यवहार

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। निर्वाण संस्था के शेल्टर होम से भागकर 4पीएम के दफ्तर पहुंचे बच्चे की खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी राजशेखर ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल जिला प्रोबेशन अधिकारी आकांक्षा अग्रवाल को 4पीएम के कार्यालय भेजा। बच्चे को चाइल्ड लाइन के माध्यम से गोमती नगर थाने ले जाया गया। वहां कागजी कार्रवाई पूरा कर संबंधित संस्था को बच्चा सौप दिया गया। लेकिन जिलाधिकारी ने बच्चे के साथ मारपीट के मामले को दुखद बताया और बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराकर चोट के निशान की सत्यतता जांचने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। इसके साथ ही बच्चे के प्रति जागरूक नागरिक का फर्ज निभाने वाले 4पीएम टीम के सदस्यों का आभार भी व्यक्त किया है।
शेल्टर होम से भागने वाला बच्चा खरगापुर स्थित निर्वाण मानसिक होम का था। यह संस्था मंद बुद्धि बच्चों के लिए है लेकिन यहां सामान्य बच्चों को मंद बुद्घि वालों के साथ रखा गया है। यहां मंद बुद्घि वालों की देखभाल करने वाले कर्मचारी अपनी खीझ मिटाने के लिए सामान्य बच्चों के साथ दुव्र्यवहार करते हैं। उनको मारते-पीटते हैं। इसी वजह से कल छोटू नाम का एक बच्चा संस्था से भाग निकला था, जो 4पीएम कार्यालय के पास बदहवाश हालत में मिला। बच्चा इतना डरा हुआ था कि यहां से जाने को तैयार नहीं था। इस बच्चे की खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम राजशेखर ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को भेजा। चाइल्ड लाइन के भी लोग आए। इन दोनों टीमों ने गोमतीनगर थाने पहुंचकर कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बच्चे को निर्वाण संस्था के सुपुर्द कर दिया। निर्वाण संस्था के अधीन काम करने वाली भारत विकास सहयोग समिति का मानसिक होम खरगापुर में है। इस होम में कुल 48 लोग हैं, जिनमें कुल 9 बच्चे सामान्य और अन्य सभी मंद बुद्घि एवं विकलांग हैं। इनकी उम्र 10 से 45 साल के बीच है। संस्था के प्रबंधक रमेश लाल के मुताबिक मानसिक होम में देवरिया और अन्य जगहों से कुल 9 बच्चों को स्थानान्तरित किया गया है। ये बच्चे मानसिक रूप से सामान्य हैं लेकिन कुछ बच्चे सुनने और बोलने में अक्षम हैं। इसलिए बच्चों की देखभाल के लिए कार्यालय में जितेन्द्र कुमार और अभिषेक अवस्थी दो कर्मचारियों को रखा गया है। नियमों के खिलाफ सामान्य बच्चों को मंद बुद्घि बच्चों के साथ रखने की बात पर प्रबंधक ने चुप्पी साध ली। दरअसल निर्वाण संस्था से भागकर 4पीएम कार्यालय पहुंचे छोटू ने संस्था के कर्मचारियों जितेन्द्र और अभिषेक पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। जिस वक्त बच्चे को 4पीएम कार्यालय के लोगों ने पकड़ा, वह बदहवाश हालत में अपनी जान बचाकर भाग रहा था। अभिषेक अवस्थी बच्चे का पीछा कर रहा था। इस मामले में सूचना मिलने पर 4पीएम कार्यालय पहुंची चाइल्ड लाइन और जिला प्रोबेशन अधिकारी की टीम कागजी कार्रवाई करने गोमती नगर थाने पहुंची। वहां मालूम हुआ कि निर्वाण संस्था के प्रबंधक की तरफ से किसी बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत की गई है। ऐसे में संस्था के प्रबंधक को फोन करके थाने बुलाया गया।
उन्होंने बच्चे की पहचान करने के साथ ही मानसिक होम ले जाने की बात कही, लेकिन बच्चा उनके साथ जाने को तैयार नहीं था। आखिरकार जिला प्रोबेशन अधिकारी आकांक्षा अग्रवाल और चाइल्ड लाइन के कर्मचारियों रमेश लाल से हलफनामा लिखवाया, जिसमें बच्चे को सही ढंग से शेल्टर होम में रखने और दोबारा उत्पीडऩ होने पर जिम्मेदारी लेने की बात कही गई। तब बच्चे को संस्था के सुपुर्द किया गया।

दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई: राजशेखर

जिलाधिकारी राजशेखर ने छोटू के संबंध में जिला प्रोबेशन अधिकारी आकांक्षा अग्रवाल की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। इसलिए संस्था से भागकर जान बचाने के लिए 4पीएम कार्यालय पहुंचने वाले छोटू की मेडिकल जांच करवाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जिला प्रोबेशन अधिकारी को संस्था का विजिट कर बच्चों के रखरखाव से संबंधित सारी जानकारी मालूम कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया है।

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