माया के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने आ रहे हैं मोदी

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, खुफिया विभाग की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद, चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी और कमांड़ो तैनात
अंबेडकर विश्वविद्यालय और अंबेडकर महासभा में जाकर दलितों को देंगे संदेश पीएम, विपक्ष ने कहा चुनाव से पहले भाजपा को याद आते हैं दलित

D1संजय शर्मा
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में 11 साल बाद देश का कोई प्रधानमंत्री आ रहा है। वह हैं नरेन्द्र मोदी। यूं तो उनका मुख्य कार्यक्रम अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत करना है। मगर इसके बाद अंबेडकर महासभा में पहुंचने की खबर ने प्रदेश का राजनैतिक तापमान बढ़ा दिया है। अब जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का लगभग एक साल ही बचा है तब अंबेडकर के बहाने भाजपा की नजर दलित वोटों पर है। मोदी लोकसभा चुनाव में इस वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगा चुके हैं, जिसके कारण लोकसभा में मायावती का खाता तक नहीं खुला था। इस बार भी भाजपा सोची समझी रणनीति के तहत माया के इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में जुटी है। यह तय माना जा रहा है कि कल प्रधानमंत्री दलितों के समर्थन में कोई ऐसी रणनीति का खुलासा जरूर करेंगे, जिससे दलितों में यह संदेश जाए कि भाजपा उनके साथ खड़ी है। मौजूदा वक्त में जब हैदराबाद में एक दलित छात्र के आत्महत्या ने पूरे देश का राजनीतिक तापमान गरम कर रखा है ऐसे में भाजपा पीएम के इसी दौरे के साथ प्रदेश के विधानसभा चुनाव की शुरूआत करना चाहती है।
मौजूदा माहौल में यूपी में भाजपा की हालत बेहतर नहीं है। आम लोग भी यह मान रहे है कि विधानसभा चुनाव में मुकाबला सपा और बसपा के बीच ही होना है। भाजपा जानती है कि इस माहौल में वह मुख्य मुकाबले में तभी आ सकती है, जब दलित वोट उसके साथ आ जाए। प्रदेश में लगभग 24 प्रतिशत दलित मतदाता हैं। पिछले लंबे समय से इसमें से बड़ा वोट बैंक हमेशा मायावती को वोट करता रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले सपा और भाजपा दोनों इसी वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती हैं। भाजपा इसी क्रम में अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है।
भाजपा ने इसकी शुरूआत अपने स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी को लखनऊ में बुलाकर कर दी है। अंबेडकर विश्वविद्यालय और अंबेडकर महासभा में भाजपा के चुनिंदा पदाधिकारी और कार्यकर्ता तैनात रहेंगे। प्रधानमंत्री दलितों के पक्ष में जो भी संदेश देंगे वह पूरे प्रदेश में जल्दी से जल्दी भेजा जाएगा। भाजपा की रणनीति यह है कि प्रधानमंत्री दलितों के पक्ष में जो भी संदेश दें उसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जा सके। उधर खुफिया विभाग की रिपोर्ट ने प्रशासन की नींदें उड़ा दी है।
इस रिपोर्ट के बाद प्रधानमंत्री की सुरक्षा की और कड़ी तैयारियां की गई हैं। पीएम के आने और जाने तक हर शख्स पर खुफिया विभाग की नजर रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव पास देखकर दलितों को लुभाने की कोशिशें कर रहे हैं जबकि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से दलितों के सम्मान और उत्थान की दिशा में कार्य किया है। आम जनता सबकी मंशा को भली भांति जानती है।
-वीरेन्द्र मदान, प्रवक्ता कांग्रेस

भाजपा बाबा साहब अंबेडकर के नाम को लेकर कभी राजनीति नहीं करती। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने बाबा साहब को हमेशा उपेक्षित रखा, जबकि भाजपा हमेशा उनके साथ खड़ी रही। जो लोग खुद को दलितों का नेता बताते हैं उन्हें दलितों से नहीं दौलत से मतलब है।
– मनीष शुक्ला, प्रवक्ता, भाजपा

56 नहीं 50 इंच का सीना है मोदी का
पूरे देश में पीएम मोदी के 56 इंच के सीने की उस समय चर्चा हुई थी जब लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा मुखिया पर तंज कसते हुए कहा था कि गुजरात जैसा राज्य बनाने के लिए 56 इंच का सीना चाहिए। मोदी जी को अंदाजा नहीं था कि उनके इस जुमले को बाद में विपक्ष उनका मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल करेगा। जब-जब देश में आतंकी घटनाएं हुई तब-तब विपक्ष ने इस 56 इंच के सीने पर तंज कसा। मगर अब जिस अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी आ रहे हैं उसी विश्वविद्यालय ने खुलासा किया है कि मोदी का सीना 56 इंच नहीं बल्कि 50 इंच का हैं। दरअसल विश्वविद्यालय के अधिकारी पीएम के लिए एक खास अचकन डिजाइन करवा रहे हंै और इसके लिए उन्होंने दर्जी को जो नाप दिया है उसमें पीएम मोदी का सीना 50 इंच का बताया गया है।

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