मामला मैनेज करने में जुटा लविवि प्रशासन

  • एलयू के स्कॉलर छात्र शक्ति कुमार की मौत का मामला

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। शक्ति की मौत के साथ उठे कई सवालों के जवाब देने में नाकाम लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन मामला मैनेज करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। गुरुवार की सुबह विवि के प्रॉक्टर ने शक्ति के बड़े भाई वरुण यादव को मिलने के लिए बुलाया और कहा कि कुलपति जी शाम को आप से मिलना चाहते हैं। वहीं कुछ छात्र संगठनों ने शक्ति की मौत के मुआवजे के रूप में दस लाख रुपए उसके परिवारवालों को देने की मांग विवि प्रशासन से की है। वहीं विवि और शक्ति के साथियों ने उसकी मौत की जो भी कहानी बतायी है उसमें भी फर्क पाया गया है।

शक्ति के परिवारवालों का कहना है कि शक्ति ने एमएससी देहरादून से किया है। उसे पहाड़ों की बारीकियां अच्छी तरह से पता थी। उसकी मौत की वजह उसका प्रतिभाशाली होना बन गया। उसके साथियों के साथ विभाग के लोग भी इस बात की सराहना करते थे कि उसके रिसर्च पेपर और उसका डाटा बहुत अच्छा है। शक्ति खुद अपने परिवार वालों और साथियों से यह कहता था कि जिस दिन मैं अपना डाटा सबमिट करूंगा तो सबकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी।

कहां गया शक्ति का डाटा
शक्ति के बड़े भाई वरुण यादव का कहना है कि हमें शक्ति हमेशा अपने जमा किये गये डाटा के विषय में बहुत ही दृढ़ता से कहता था की मेरे डाटा को कोई टक्कर नहीं दे पायेगा। अब हम लोगों को उसके पास से कोई डाटा नहीं मिला जबकि वह सारा डाटा अपने लैपटॉप में रखता था। एक सीडी मिली है वह भी बिल्कुल ब्लैंक थी। उसका तीन साल का जमा किया हुआ डाटा हम लोगों को कुछ भी नहीं मिला सभी जगह तलाशने के बाद भी हाथ खाली हैं।

परिवारीजनों को सूचना क्यों नहीं दी गयी
परिवारवालों का यह भी आरोप है कि शक्ति 31 मई को दो बजे दिन में लापता हो गया था लेकिन इसकी सूचना हम लोगों को 1 जून को 9:30 चली। वह भी विवि की जगह मेरे दोस्त के जरिये से पता चला। क्या कारण था कि शक्ति के लापता होने की बात हम से छिपायी गयी।

किस बात पर हुआ था पिछले साल इसी टूर पर विभाग के बाबू से झगड़ा
विवि को पता था कि पिछले साल इसी टूर पर बाबू विनीत से झगड़ा हो चुका था तो फिर इस टूर पर उन्हीं के साथ शक्ति को क्यों भेजा गया अजय मिश्रा खुद क्यों नहीं गये। आज तक नहीं पता उस झगड़े की क्या वजह थी।

कुलपति को इस घटना की जानकारी चार दिन बाद लगी
वरुण यादव का कहना है कि कुलपति को इस बात की जानकारी घटना के चार दिन बात पता चली यह लापरवाही नहीं तो और क्या है कि उनके यहां के छात्र की मौत हो जाती है और उन्हें कुछ भी पता नहीं चलता है। यह वाकई सच है या जान बूझकर अनभिज्ञ बनने का ढोंग।

साथी नहीं खोल रहे जुबान
साथ गये लोग अलग अलग कहानी बना रहे हैं उनसे सवाल करने पर वह कोई भी जवाब नहीं दे रहें हैं। संवेदनहीनता तो यह है कि शक्ति की मौत के बाद किसी ने फोन पर भी अफसोस जताने की कोशिश नहीं किया।

Pin It