मान्यता समिति के लोगों ने वही किया जिसकी उम्मीद थी

  • कुछ पत्रकारों को मान्यता समिति के लोगों ने फोन किया और कहा कि वह उन्हें फोन पर ही कह दें उनका वोट पड़ जाएगा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्यस्तरीय मान्यता सवांददाता समिति का चुनाव अब और रोचक हो गया है। कल जिस तरह मौजूदा कार्य समिति के लोगों ने राजनीति की उससे पत्रकारों में खासा गुस्सा है। अधिकांश पत्रकार अब 30 अगस्त को मतदान करने के मूड में आ गए हैं। माना जा रहा है कि सभी वरिष्ठ पत्रकार एक बार फिर एकता की कोशिश कर रहे हैं। मगर कुछ लोग अभी भी चाहते हैं कि जिन लोगों ने पत्रकारों के हितो के खिलाफ काम किया है उनको बेनकाब किया जाए और ईमानदारी से सब पत्रकार एक जुट होकर वोट करें।

जब मौजूदा मान्यता समिति के पदाधिकारियों ने कार्यकाल खत्म होने के एक साल बाद भी चुनाव नहीं कराया तो पत्रकारों ने बैठक करके 6 सितम्बर को चुनाव कराने का निर्णय लिया। इससे बौखलाकर मान्यता समिति के लोगों ने 5 सितम्बर को जन्माष्टïमी के दिन ही चुनाव कराने का फैसला कर दिया। जब पत्रकारों ने कहा कि जन्माष्टïमी की रात तक पूजा करते हैं लिहाजा चुनाव 30 अगस्त को करा दिया जाए। इससे हड़बड़ाए मान्यता समिति के पदाधिकारियों ने 29 अगस्त को ही चुनाव कराने की घोषणा कर दी। पत्रकार हैरान थे कि रक्षाबंधन के दिन चुनाव कैसे हो सकता हैं।

मजे की बात यह है कि मान्यता समिति के मौजूदा पदाधिकारियों ने कई वरिष्ठï पत्रकारों से संपर्क करके कहा कि अचानक इस तरह चुनाव की घोषणा करना उचित नहीं है। उन्होंने सभी लोगों को भरोसा दिलाया कि वह खुद चुनाव नहीं लड़ेगे। उनकी बात पर भरोसा करके कुछ वरिष्ठï लोगों ने दूसरे गुट के लोगों से कहा कि मौजूदा पदाधिकारी चुनाव नहीं लड़ेंगे, यह हम वादा कर रहे हैं। इन स्थितियों के बाद कल इन लोगों की भी स्थिति उस समय खराब हो गई जब अन्तिम क्षण में मौजूदा मान्यता समिति के पदाधिकारियों ने फिर अपना नामांकन करा दिया।

मजे की बात यह है कि पहले अध्यक्ष पद के लिए एक नौजवान को तैयार किया गया था और मौजूदा मान्यता समिति के लोगों ने कहा था कि वह उसका पूरा सहयोग करेंगे, मगर जिस तरह अन्तिम क्षणों में इन पदाधिकारियों ने खुद चुनाव लडऩे का फैसला किया, उससे साफ हो गया कि यह सब राजनीति का हिस्सा था। यह नौजवान लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे थे और कह रहे थे कि समिति के लोगों ने पिछले तीन सालों से पत्रकारों को इसी तरह मूर्ख बनाया है। मजे की बात यह है कि दूसरा गुट जहां वोट डालने वाले लोगों का नामांकन के साथ उनके नाम, संस्था का नाम लिखकर हस्ताक्षर करा रहे हैं, जिससे यह रिकार्ड रहे कि मतदान किन-किन पत्रकारों ने किया है, वही दूसरी ओर मान्यता समिति के पदाधिकारी चुनाव में हेराफेरी करने के लिए इस तरह का कोई रिकार्ड नहीं रख रहे हैं। वह चुनाव के बाद फर्जी तरीके से यह घोषणा करने की तरकीब में जुटे हैं कि उन्हें बड़ी संख्या में लोगों ने वोट दिया। जब

रिकार्ड ही नहीं होगा तो यह पता ही नहीं चलेगा कि वोट किसने डाले। हास्याप्रद बात तो यह रही कि कुछ पत्रकारों को मान्यता समिति के लोगों ने फोन किया और कहा कि वह उन्हें फोन पर ही कह दें उनका वोट पड़ जाएगा। जाहिर है इन सब बातों के चलते अधिकांश पत्रकारों ने 30 अगस्त को ही मतदान करने का फैसला किया है।

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